रायपुर- छत्तीसगढ़ बीजेपी ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन भेजा है. कोरोना वायरस संक्रमण के फैलाव को रोकने की जा रही कवायद के बीच बीजेपी के 13 बिंदुओं पर आधारित इस ज्ञापन में कई सवाल उठाए गए हैं. बीजेपी ने गरीबों की जरूरतों को पूरी करने में जुटे सामाजिक संगठनों के राहत कार्यों को रोक उनसे सीधे सामग्री लेकर जिला प्रशासन के जरिए बांटे जाने के आदेश को आपत्तिजनक कहा है. बीजेपी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि राज्य में लाॅकडाउन के निर्देशों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है, इसका पालन कड़ाई से सुनिश्चित किए जाने की जरूरत है. वहीं शराब दुकान खोलने की संभावनाओं पर कटाक्ष करते हुए बीजेपी ने कहा है कि इसे खोला जाना कई तरह की समाजिक परिस्थितियों को जन्म देखा.बीजेपी ने कहा है कि कोरोना के खिलाफ लड़ाई में और भी ज्यादा मुस्तैदी से काम करने की जरूरत है.

छत्तीसगढ़ बीजेपी की ओर से मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भेजा गया ज्ञापन

प्रति

मुख्यमंत्री,

छत्तीसगढ़ शासन मुख्यमंत्री निवास,

रायपुर.

द्वारा- जिलाधिकारी

विषय : कोविड-19 महामारी से निपटने कुछ आवश्यक आग्रह.

महोदय,

वैश्विक महामारी कोविड-19 के कारण न केवल हमारे जीवन के समक्ष संकट उत्पन्न हुआ है बल्कि जीविका भी बड़ी संख्या में खत्म हो गयी है. लोग रोजीरोज़गार की समस्या से जूझ रहे हैं. गरीब लोगों को दैनिक ज़रूरतों के लिए भी मोहताज होना पड़ा है. ऐसे में सामजिक और स्वयंसेवी संगठनों, भाजपा समेत अन्य राजनीतिक दलों द्वारा लगातार चलाये जा रहे राहत कार्यों से इस वास्तविक आपातकाल के समय में काफी सहायता मिल रही है. शासन-प्रशासन को भी ज्यादा मुस्तैदी के साथ काम करने की जरूरत है.

वर्तमान स्थिति में निम्नलिखित कदम उठाये जाने का आग्रह है :

1. शासकीय अमले की पहुंच गली-मोहल्लों तक नहीं है और न ही उनका नेटवर्क उतना बड़ा है. ऐसे आकस्मिक संकट के समय सबसे बड़ी भूमिका स्वयंसेवी सामाजिक सांस्कृतिक संगठनों, धार्मिक समूहों की होती है. देश भर में ये संगठन अलग-अलग जगह पर कार्य कर पीड़ित मानवता की सेवा कर रहे हैं. इन्हें ज्यादा से ज्यादा प्रोत्साहित और सम्मानित किये जायें. प्रदेश में भी आवश्यक ‘सोशल डिस्टेंसिंग’ का पालन करते हुए सतत इन्हें प्रोत्साहित किये जायें.

2. दुर्भाग्यजनक यह है कि स्वयंसेवी संगठनों के कार्यों को मान्यता देना तो दूर, उलटे उन्हें शासकीय आदेश द्वारा कार्य करने से रोका गया है. उनसे कहा जा रहा है कि वे स्वतंत्र रूप से राहत कार्य नहीं चलाएं और राहत सामग्री अगर देना है तो शासन को सौपें. यह आदेश आपत्तिजनक है, इसे शीघ्र वापस लेकर संगठनों को कार्य करने दिए जायें.

3. तथ्यों के आलोक में ऐसा ज्ञात हो रहा है कि कांग्रेस सरकार इन संगठनों से सामग्री लेकर राहत कार्य को अपने राजनीतिक प्रचार का माध्यम बनाना चाहती है. ऐसी मंशा अनचित है. किसी भी शासकीय सामग्री पर नेताओं का चित्र न केवल इस विपत्ति के समय में उपहासजनक होगा अपितु यह प्रदेशवासियों, गरीबों के स्वाभिमान के साथ भी खिलवाड़ जैसा होगा.

4. शासन द्वारा पार्षदों को उनकी निधि से एक लाख रुपया आयुक्त के यहां जमा करने कहा गया है, यह भी निहायत अनुचित है. पार्षदगण चुने गए जन-प्रतिनिधि हैं. उन्हें क्षेत्र और उनकी समस्याओं, वास्तविक ज़रूरतमंदों की बेहतर जानकारी होती है. उनसे निधि वापस ले लेना वास्तव में न केवल आपदा राहत में अडंगा लगाने जैसा होगा अपितु यह प्रतिनिधियों के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन जैसा भी होगा. अतः पार्षदों को अपने निधि का स्व-विवेक से उपयोग कर राहत कार्य करने दिए जायें.

5. राज्य शासन ने लगातार यह प्रचारित किया है कि वह ग्राम-पंचायतों को दो दो क्विंटल चावल दे रही है जिससे गांव में किसी को भी भूखा नहीं रहने दिया जाएगा. शासकीय विज्ञप्तियों में कहीं ऐसा देखने में नया आया कि इसके लिए पंचायतों से पैसे वसूल करने थे लेकिन, उनसे पैसे लिए गए हैं. दुखद आश्चर्य है कि आम दिनों में हम जनता के लिए एक-दो रूपये (एपीएल के लिए दस रूपये) किलो चावल देते हैं जबकि ऐसी परिस्थिति, इस बड़े संकट के समय शासन अपना चावल खपा कर गावों से करीब 33 रूपये किलो कीमत वसूल रही है. इसे तत्काल रोका जाय और पंचायतों से लिए गए पैसों को उन्हें वापस किये जायें. यह समय ज्यादा से ज्यादा निधि उपलब्ध कराने का है न कि स्थानीय निकायों-पंचायतों-प्रतिनिधियों से पैसे वसूलने का.

6. अनेक स्थानों पर सड़े अनाज वितरित किये जाने की शिकायतें मिली हैं. इनपर तत्काल कारवाई किये जायें और अच्छी सामग्री लोगों को उपलब्ध कराएं जायें.

7. ऐसा देखा गया है कि सब्जी बाज़ारों एवं ऐसे अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लॉकडाउन की धज्जियां उड़ायी जा रही है. लॉकडाउन का हर हाल में पूरी कड़ाई से पालन सुनिश्चित किये जायें. इसी तरह अनेक ऐसे कारणों से यह संदेह उत्पन्न हो रहा कि शासन शराब बेचना चाह रही है. ऐसे संकट के समय शराब दुकानों का खुलना, संभावित भीड़ के कारण न केवल सोशल परिस्थितियां भी पैदा होगी. अतः कम से कम लॉकडाउन की अवधि तक शराबबंदी का पालन अवश्य किये जायें.

8. बड़ी संख्या में प्रदेश के लोग देश के अन्य स्थानों पर फंसे हैं. उन्हें राशन पानी एवं अन्य सहायता की आवश्यकता है. शासन शीघ्र ऐसे लोगों के खाते में एक आवश्यक राशि ट्रांसफर करे और देश के किसी भी हिस्से में वे हों, उनकी व्यवस्था करे. लॉकडाउन की अवधि तक उन्हें कहीं भी दिक्कत नहीं हो, ऐसा सुनिश्चित किये जायें.

9. प्रदेश में कोरोना टेस्ट की व्यवस्था न्यून है. इसे ज्यादे से ज्यादा बढाए जाए. केवल ‘केन्द्रीय एम्स रायपुर’ में अभी तक मरीजों का इलाज हो रहा है. राज्य शासन को चाहिए कि स्वयं के स्तर पर भी संभावित ज़रूरतों के मद्देनज़र जिलों या संभागों में वार्ड/बिस्तरों की व्यवस्था करे. दवा आदि का भी उचित संग्रहण-भंडारण किये जायें. सभी क्षेत्रों को सेनिटाइज किये जायें. सेनिटाइजर/साबुन आदि की भी आपूर्ति पर्याप्त रहे इसकी चिंता हो. मास्क एवं पीपीपीई भी पर्याप्त रखे जायें.

10. माननीय हाई कोर्ट के आदेश के अनुपालन में, मरकज से आये तबलीगी जमातियों की तलाश, लैब की स्थापना आदि के लिए प्रयास युद्ध स्तर पर हो. किसी भी साधन या मार्ग से कैसे भी मरकज से आने वाले तबलीगी समेत अन्य कोई भी संन्दिग्ध या समूह प्रदेश की सीमा में नहीं घुस पायें, इसे उच्च प्राथमिकता के साथ सुनिश्चित किये जायें. चिन्हित लोगों का कोरेंटाइन/आइसोलेट करना, टेस्ट/इलाज़ आदि की व्यवस्था पर्याप्त हो.

11. असंगठित क्षेत्र के मजदूरों एवं अन्य की विशेष चिंता करने की ज़रुरत है. विधवाओं एवं अन्य को निराश्रित पेंशन नियमित रूप से जारी किये जायें. प्रदेश में ऐसे लोग भी काफी संख्या में हैं जिनका राशन कार्ड नहीं बना है. अतः बिना राशन कार्ड के भी शासन द्वारा चावल एवं अन्य सहायता मिले, ऐसी व्यवस्था किये जाने की ज़रूरत है.

12. यह महामारी क्योंकि वैश्विक है अतः इससे निपटने विश्व स्तर पर कुछ मानक शब्द उपयोग किये जा रहे हैं. सोशल डिस्टेंसिंग, कोरोना, कोविड-19, लॉकडाउन, कोरेंटाइन, आइसोलेशन …. ऐसे तमाम मानक शब्द ही उपयोग किये जायें. प्रदेश स्तर पर इन शब्दों के साथ छेड़-छाड़ न किये जायें. इससे राष्ट्रीय स्तर पर संवाद में कन्फ्यू जन पैदा होगा. ये सभी मानक शब्द अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार किये गए हैं, इसे ऐसे ही रहने दिया जाय.

13. प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी दवारा किये गए अन्य सभी आह्वानों/निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित किये जायें. लॉकडाउन पूरी तरह सफल करने तमाम असहमतियों, पूर्वाग्रहों को नज़रंदाज़ करते हुए सबके लिए समान भाव से राहत/सुरक्षा मिले, ऐसे प्रयत्न किये जायें. इन तमाम बिन्दुओं पर गंभीरता से कारवाई कर हम इस असाधारण परिस्थियों का सामना कर अपने प्रदेश को सुरक्षित रख सकते हैं.

धन्यवाद.

भवदीय

भारतीय जनता पार्टी

छत्तीसगढ़ प्रदेश.

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