क्या नगर निगम प्रशासन राजधानी से हरियाली छिनने पर है उतारू ? पार्षद लापता ! मोहल्लेवासियों ने ठेकेदार को भगाया

सत्यपाल सिंह राजपूत रायपुर। एक तरफ राजधानी रायपुर में करोड़ों रुपये खर्च ऑक्सीजोन बनाया जाता है. लोकार्पण के दौरान कहा जाता है कि रायपुर को इसी तरह से स्वच्छ सुंदर, हरा-भरा रखा जाएगा. लोगों से अपील की जाती है कि वो अपने आस-पास एक पेड़ अवश्य लगाएं, उसकी देख-भाल करें. लेकिन दूसरी तरफ यह भी जान लीजिए कि इसी रायपुर में नगर निगम प्रशासन ही हरियाली छिनने पर उतारू हो गया है !

जी हाँ ! हरियाली छिनने का यह मामला देवेन्द्र नगर इलाके से सामने आया है. इस इलाके में एक्सप्रेस वे किनारे रोपे गए पेड़ों की बलि लेने की कोशिश की जा रही है. पेड़ों की बलि लेने का काम नगर निगम प्रशासन की ओर से किया जा रहा है. निगम का ठेकेदार आज पेड़ों की कटाई करने के लिए जैसे ही जेसीबी लेकर पहुँचा मोहल्लेवासियों ने उसे घेर लिया. पेड़ों की कटाई से नाराज मोहल्लेवासियों ने जमकर हंगामा किया. भारी विरोध के बाद ठेकेदार काम रोक कर वहाँ से भाग निकला.

दरअसल मोहल्लेवासियों ने एक्सप्रेस वे के किनारे बादाम, कदम, सीताफल, कटहल, अमरूद जैसे फलों के 200 पेड़ लगाए हैं. लेकिन अब इन पेड़ों को काटकर वहाँ पर निगम प्रशासन फुटपाथ बनाना चाहता है. इसी का विरोध स्थानीय लोग कर रहे हैं.

कॉलोनी वासियों का कहना है कि यहाँ फुटपाथ की कोई ज़रूरत नहीं है. दो महीना पहले ही सड़क बनाया गया है. कॉलोनी के मेन रोड के किनारे 200 से ज़्यादा पौधा रोपा गया था. हमने गर्मी के दिनों भी पानी सींचकर पेड़ को जीवित रखा है. लेकिन अब उसकी बलि लेने की कोशिश की जाए यह हमसे बर्दाश्त नहीं होगा. हमने पेड़ों की कटाई को लेकर कड़ा विरोध जताया है. निगम आयुक्त को भी इसकी जानकारी दे गई है.

पार्षद लापता !

हैरानी की बात ये है कि इतना सबकुछ हो गया लेकिन स्थानीय पार्षद लापता है. मोहल्लेवासियों ने कहा कि पार्षद तो यहाँ आए ही नहीं है. पता नहीं वे हमारे साथ इस विरोध में हैं या नहीं.

साहब को ही नहीं पता क्या हो रहा उनके इलाके में ?

मजे की बात तो ये है कि जोन कमिश्नर आर.के. डोंगरे को उनके ही इलाके में क्या हो रहा है इसकी सही जानकारी नहीं है. साहब से जब हमने बात की तो उन्होंने सफाई देते हुए यह तो कहा कि फुटपाथ बनाने का टेंडर हुआ है, लेकिन काम कौन कर है इसकी जानकारी उन्हें नहीं. और तो पेड़ काटने की भी जानकारी साहब को हमसे ही मिली. बताइये भला ऐसे अधिकारी हैं डोंगरे साहब.

देखना होगा कि इस मामले में जन हितैषी कहलाने वाले महापौर एजाज़ ढेबर कोई एक्शन लेते या नहीं. देखना यह भी होगा कि प्रधानमंत्री पुरस्कार पाने वाले आईएएस निगम आयुक्त सौरभ कुमार इस मामले में क्या कार्रवाई करते हैं ?

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