कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के परासिया में हुए चर्चित कफ सिरप कांड में एक बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। मामले के मुख्य आरोपी डॉक्टर प्रवीण कुमार सोनी ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट से अपनी याचिका वापस ले ली है। ​डॉक्टर सोनी ने अपने खिलाफ दर्ज एफआईआर (FIR) और पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट को रद्द करने की मांग को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि, अदालत के एक कड़े रुख और निर्देश के बाद आरोपी को अपनी याचिका वापस लेने पर मजबूर होना पड़ा।

ऐसे हुआ कुछ घटनाक्रम

मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के समक्ष जानकारी दी कि इस दुखद घटना में कुल 27 बच्चों की जान गई थी। सरकार का तर्क था कि जिन बच्चों की जान गई है, उनके माता-पिता इस मामले के मुख्य प्रभावित पक्ष हैं। ​इस पर हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिका की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने से पहले सभी मृत 27 बच्चों के अभिभावकों को भी इस याचिका में पक्षकार (पार्टी) बनाया जाए। अदालत के इस निर्देश के बाद मामला पूरी तरह बदल गया।

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​अभिभावकों के पक्षकार बनने की स्थिति से बचने के लिए आरोपी डॉक्टर की ओर से उनके बड़े भाई अयोध्या प्रसाद सोनी ने शपथ पत्र के साथ याचिका वापसी का आवेदन पेश किया, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। हालांकि, डॉक्टर ने भविष्य में नई याचिका दायर करने का कानूनी अधिकार सुरक्षित रखा है।

इन मामलों को दी थी चुनौती

डॉक्टर प्रवीण सोनी ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 528 के तहत याचिका दायर कर परासिया थाने में दर्ज अपराध क्रमांक 296/2025 को चुनौती दी थी। ​धारा 105 (गैर-इरादतन हत्या): डॉक्टर ने इस गंभीर धारा को हटाने की मांग की थी।

  • ​धारा 106 का तर्क: याचिका में दावा किया गया कि यह मामला इलाज के दौरान हुई अनहोनी (धारा 106) का है, न कि गैर-इरादतन हत्या का।
  • ​अन्य धाराएं: इसके अलावा डॉक्टर ने BNS की धारा 276, 238, 336(3), 3(5) और ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट की धारा 27(a) को भी चुनौती दी थी।

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​डॉक्टर की मुख्य दलील यह थी कि उन्होंने बच्चों का इलाज पूरी सद्भावना और ईमानदारी से किया था। उन्होंने दवा में मिलावट करने या किसी भी प्रकार के सबूत मिटाने के आरोपों से साफ इनकार किया था। याचिका वापस लेने से मुख्य आपराधिक मामला समाप्त नहीं हुआ है। हाईकोर्ट से याचिका खारिज या वापस होने का सीधा मतलब यह है कि पुलिस की ओर से दाखिल चार्जशीट पर अब निचली अदालत में नियमानुसार सुनवाई और आपराधिक मुकदमा जारी रहेगा। ​27 बच्चों को खोने वाले पीड़ित परिवारों की नजरें अब अदालत की आगे की कार्यवाही पर टिकी हैं।

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