Bihar News: देश की सियासत में इन दिनों आरक्षण का मुद्दा फिर से बहस का केंद्र बना हुआ है। दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे आरक्षण हटाओ आंदोलन को लेकर राजनीतिक तापमान लगातार बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। इस बीच बिहार में सत्ताधारी दल एनडीए में दलित राजनीति के दो प्रमुख चेहरे आरक्षण को लेकर आमने-सामने हो गए हैं, जिनके बयानों ने इस बहस को एक नई दिशा देने के साथ ही इसे और तेज कर दी है।
चिराग ने खुलकर की आरक्षण की वकालत
दरअसल हालही में चिराग पासवान ने आरक्षण को लेकर कड़े और साफ शब्दों में कहा था कि आरक्षण हटाना तो दूर की बात है। आरक्षण की समीक्षा हो, उन्हें यह भी मंजूर नहीं है। चिराग का यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ था। वहीं, चिराग के इस बयान के बाद बिहार सरकार में मंत्री और हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार सुमन ने रिजर्वेशन को लेकर बड़ा बयान दिया है।
आरक्षण की समीक्षा के पक्ष में संतोष सुमन
डॉ. संतोष कुमार सुमन ने कहा कि, आरक्षण की समीक्षा का अर्थ उसे समाप्त करना नहीं, बल्कि उसका लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि, हमने SC-ST आरक्षण में उप-वर्गीकरण के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का तब भी समर्थन किया था और आज भी करते हैं। आखिर 79 वर्ष की आजादी के बाद यह सवाल पूछना गलत कैसे हो सकता है कि आरक्षण का लाभ किन वर्गों को कितना मिला और समाज के सबसे निचले पायदान पर खड़े कौन-से लोग आज भी इससे वंचित हैं?
EWS व्यवस्था का दिया हवाला
संतोष सुमन ने कहा कि, हमारे देश में सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन को पहचानने के लिए वर्गीकरण की व्यवस्था पहले भी हुई है। सामान्य वर्ग के भीतर आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए EWS की व्यवस्था बनी, पिछड़े वर्गों में भी पिछड़ा और अतिपिछड़ा की अलग पहचान की गई। जब एक ही बड़े सामाजिक वर्ग के भीतर वास्तविक वंचितों तक लाभ पहुंचाने के लिए अलग श्रेणियां बनाई जा सकती हैं, तो फिर दलित समाज के भीतर भी यह देखना क्यों गलत है कि आरक्षण का लाभ सबसे वंचित लोगों तक पहुंच रहा है या नहीं?
वंचित तक लाभ पहुंचे, यही समाजिक न्याय- संतोष सुमन
उन्होंने आगे कहा, दलित समाज कोई एकरूप वर्ग नहीं है। उसके भीतर भी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति में अंतर है। यदि कुछ जातियां आरक्षण का लाभ लगातार अधिक प्राप्त कर रही हैं और कुछ आज भी पीछे हैं, तो उन तक अवसर पहुँचाने के लिए उप-वर्गीकरण क्यों नहीं होना चाहिए? इसका अर्थ रिजर्वेशन समाप्त करना नहीं है। बल्कि बाबा साहब डॉ. आंबेडकर के दिए संवैधानिक अधिकार को उसके वास्तविक हकदारों तक पहुंचाना है। अंत में संतोष सुमन ने कहा कि, रिजर्वेशन बचाना है तो उसकी पहुंच भी न्यायपूर्ण बनानी होगी। रिजर्वेशन रहे, लेकिन उसका लाभ सबसे वंचित तक पहुंचे। यही सामाजिक न्याय है।
आरक्षण खैरात नहीं – चिराग पासवान
बीते दिनों एक कार्यक्रम के दौरान चिराग पासवान ने खुलकर आरक्षण की वकालत करते हुए कहा था कि, जाति आधारित आरक्षण को खत्म नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह सांविधानिक अधिकार है। उन्होंने सवाल उठाते हुए पूछा कि, क्या किसी के कह देने भर से रिजर्वेशन खत्म किया जा सकता है? यह सांविधानिक अधिकार है। चिराग ने कहा कि रिजर्वेशनकिसी को दी जाने वाली खैरात नहीं है, बल्कि ऐसा सांविधानिक अधिकार है, जिसे दुनिया की कोई ताकत कभी खत्म नहीं कर सकती।
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