CJP Leaders Abhijeet Dipke-Sourav Das and Ashutosh Ranka Deep fakes Case: वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन यानी एसआईआर को लेकर चुनाव आयोग (Election Commission) में मतभेद को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी यानी सीजेपी ने CEC ज्ञानेश कुमार खिलाफ ‘सीजेपी प्रोटेस्ट 2.0’ (CJP Protest 2.0) करने का ऐलान किया है। हालांकि इस बीच सीजेपी नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका की भी मुश्किलें बढ़ाने वाली खबर सामने आई है। दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) आज आपराधिक रिट याचिका पर कॉकरोच जनता पार्टी के नेताओं के खिलाफ तुरंत सुनवाई करने के राजी हो गई है। चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच ने मामले को सुनवाई के लिए लिस्ट करने के लिए कहा है।
दरअसल एक महिला ने कॉकरोच जनता पार्टी के एक्टिविस्ट सौरव दास, संस्थापक अभिजीत दीपके, आशुतोष रंका और रत्ना सिंह पर पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उसकी AI-जनरेटेड तस्वीरों को एडिट करके फैलाने का आरोप लगाया है। महिला ने कोर्ट को बताया गया कि इस मामले में FIR पहले ही दर्ज हो चुकी है और महिला अब इन तस्वीरों को हटवाना चाहती है।
महिला ने याचिका में आरोप लगाया है कि महिला की मॉर्फ की गई तस्वीरें कुछ पोर्न वेबसाइटों पर भी अपलोड और शेयर की गई। महिला द्वारा दाखिल याचिका के मुताबिक मामले में FIR दर्ज होने के बावजूद साइबर अथॉरिटी ने कंटेंट हटाने के लिए जरूरी कार्रवाई नहीं की। महिला ने दावा किया है कि डीपफेक तस्वीरें अभी भी इंटरनेट पर वायरल हैं और उन्हें रेप की धमकियां और जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं। याचिका में महिला ने कोर्ट से पुलिस सुरक्षा देने की भी मांग की है। साथ ही सोशल मीडिया और पोर्न वेबसाइटों से आपत्तिजनक तस्वीरों और डीपफेक कंटेंट को तुरंत ट्रेस कर ब्लॉक करने और हटाने की मांग की है।
वहीं यह सुनवाई ऐसे वक्त में हो रही है जब अभिजीत दीपके और सीजेपी ने भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है। उन्होंने कहा है कि अगर 26 सितंबर तक कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती से आंदोलन शुरू करेंगे। हालांकि उससे पहले अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका के लिए ही मुश्किलें बढ़ाने वाली खबर सामने आई है।
हो सकती है 7 साल की सजा
बता दें कि भारत में किसी की डीपफेक यानी मार्फ्ड फोटो या डियो बनाकर वायरल करना गंभीर अपराध की श्रेणी में आता है। इसमें अपराध सिद्ध होने पर 3 साल से लेकर 7 साल तक की जेल और भारी जुर्माने लगाने का प्रावधान है। यदि डीपफेक फोटो या वीडियो यौन रूप से स्पष्ट (अश्लील) हैं, तो पहली बार दोषी पाए जाने पर 5 साल तक की जेल और दोबारा ऐसा करने पर 7 साल तक की कैद व भारी जुर्माने की सजा हो सकती है।
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