राजधानी दिल्ली में हाल के दिनों में महिलाओं से जुड़े गंभीर अपराधों के कई मामले सामने आए हैं। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के एक पार्क में नाबालिग से कथित गैंगरेप के मामले के बाद सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्क में CCTV और पर्याप्त रोशनी की कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं। सिलसिलेवार सामने आई इन घटनाओं के बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने प्रशासन की कमियों को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि सरकार इन घटनाओं से सबक ले रही है और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा।
सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर जोर
हालिया घटनाओं के बाद दिल्ली में पुलिस गश्त, स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी और सार्वजनिक स्थानों की निगरानी को लेकर चर्चा तेज हुई है। दिल्ली पुलिस आयुक्त ने भी अधिकारियों को अंधेरे स्थानों, खराब सीसीटीवी और पार्कों व सुनसान इलाकों में सुरक्षा संबंधी कमियों की पहचान कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। वहीं, दिल्ली के उपराज्यपाल ने भी सभी पार्कों का सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इसमें रोशनी, सुरक्षा व्यवस्था, सफाई और पेट्रोलिंग की स्थिति की जांच की जानी है।
दिल्ली में 16 वर्षीय लड़की से चलती बस में गैंगरेप के मामले को लेकर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस मामले में प्रशासन की गलती स्वीकार करते हुए कहा कि सरकार को इस घटना से सबक लेने की जरूरत है। मुख्यमंत्री से सवाल किया गया कि 2012 के निर्भया गैंगरेप मामले के बाद भी क्या प्रशासन ने पर्याप्त सबक नहीं लिया। उनसे यह भी पूछा गया कि करीब 47 किलोमीटर तक चलने वाली बस कई चेकपॉइंट से गुजरती रही, लेकिन उसे रास्ते में एक बार भी क्यों नहीं रोका गया।
गैंगरेप की घटना पर मानी गलती
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि इस मामले में निश्चित रूप से गलती हुई थी और बस की जांच नहीं की गई। उन्होंने बताया कि बस के खिलाफ 11 चालान किए गए थे। सीएम ने कहा कि अब किसी भी बस के ड्राइवर और कंडक्टर का पुलिस रिकॉर्ड चेक करने पर जोर दिया जा रहा है, चाहे वे निजी एजेंसी के माध्यम से ही क्यों न नियुक्त किए गए हों। उन्होंने कहा कि आपराधिक रिकॉर्ड वाले किसी व्यक्ति को स्कूल बस, निजी बस या सरकारी बस चलाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके लिए सभी ड्राइवरों और कंडक्टरों का पुलिस वेरिफिकेशन जरूरी होगा और इन व्यवस्थाओं को सख्ती से लागू किया जाएगा।
‘हर घटना हम सभी के लिए दर्दनाक’
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सरकार ने पिछली घटनाओं से कुछ नहीं सीखा है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में होने वाली हर आपराधिक घटना सभी के लिए दुखद है। रेखा गुप्ता ने कहा कि एक मां, महिला और मुख्यमंत्री के तौर पर ऐसी घटनाओं से उन्हें भी दुख होता है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि ऐसी घटनाएं न हों और प्रशासन पूरी तरह से प्रभावी परिणाम देने के लक्ष्य के साथ काम कर रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस बल दिन-रात काम करता है और प्रशासन तथा पूरा सिस्टम इसमें शामिल है, लेकिन एक भी घटना होना चिंता का विषय है।
आस्था कुंज गैंगरेप के बाद डार्क स्पॉट पर जोर
दक्षिण दिल्ली के कालकाजी स्थित आस्था कुंज पार्क में नाबालिग से कथित गैंगरेप और इसके बाद हुए विरोध प्रदर्शनों को लेकर सवाल पूछे जाने पर मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी बेटी या महिला के साथ घटना होने पर वह तुरंत यह जानने की कोशिश करती हैं कि घटना कैसे हुई और किन व्यवस्थाओं में सुधार की जरूरत है। रेखा गुप्ता ने बताया कि सभी संबंधित एजेंसियों को डार्क स्पॉट को तुरंत सुरक्षित करने के निर्देश दिए गए हैं। उनका कहना है कि ऐसे स्थानों पर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करना सरकार की प्राथमिकता है।
करीब एक लाख नई स्ट्रीट लाइट लगाने का दावा
मुख्यमंत्री के मुताबिक, उनकी सरकार के सत्ता में आने के बाद दिल्ली में करीब एक लाख नई स्ट्रीट लाइटें लगाई गई हैं। उन्होंने बताया कि ये लाइटें सेंसर से जुड़ी हैं और खराब होने की स्थिति में कंट्रोल रूम को तत्काल अलर्ट मिलता है। सीएम के अनुसार, अलर्ट मिलने के बाद संबंधित एजेंसी को लाइट ठीक करने के लिए भेजा जाता है। सरकार का कहना है कि स्ट्रीट लाइट और डार्क स्पॉट की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जा रहा है, ताकि सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा संबंधी कमियों को जल्द दूर किया जा सके।
सत्य निकेतन हादसे पर बोलीं- जिम्मेदारी से इनकार नहीं
सत्य निकेतन में इमारत गिरने से सात लोगों की मौत के मामले में मुख्यमंत्री ने सरकार और नगर निगम की जिम्मेदारी से इनकार नहीं किया। हालांकि, उन्होंने इस मामले को लेकर पिछली सरकारों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। रेखा गुप्ता ने कहा कि वह यह नहीं कहेंगी कि सरकार की कोई जिम्मेदारी नहीं है। उनके मुताबिक, जिम्मेदारी जरूर है, लेकिन दिल्ली एक दिन में नहीं बनी है। उन्होंने सवाल उठाया कि पिछले वर्षों में दिल्ली सरकार और नगर निगम में कौन-कौन सी सरकारें थीं और उस दौरान ऐसी व्यवस्थाओं पर कितना काम हुआ।
पुरानी सरकारों पर भी सवाल
पीजी के रजिस्ट्रेशन की कार्रवाई अब शुरू होने के सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें मुख्यमंत्री बने करीब डेढ़ साल हो चुके हैं और उनसे पहले भी दिल्ली में सरकारें थीं। उन्होंने सवाल किया कि इससे पहले ऐसी घटनाओं के बाद पीजी को लेकर व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई और क्या पहले आग लगने या इमारत गिरने जैसी घटनाएं नहीं हुई थीं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वह घटना वाली जगह पर पहुंचती हैं और जरूरत पड़ने पर वहां लंबे समय तक मौजूद रहकर राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी करती हैं। उनका कहना था कि इसका उद्देश्य प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय रखना और राहत कार्य में देरी नहीं होने देना है।
‘दिल्ली में पहले SDRF नहीं था’
मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली में अपना SDRF (स्टेट डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स) उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि जब किसी आपदा की स्थिति में तत्काल राहत और बचाव की जरूरत होती है, तब ऐसी विशेष फोर्स जरूरी होती है। रेखा गुप्ता ने दावा किया कि उनके कार्यकाल से पहले दिल्ली में ऐसी फोर्स नहीं थी। उन्होंने पिछली सरकारों से भी सवाल किया कि पहले जब ऐसी घटनाएं होती थीं, तब मुख्यमंत्री कितनी बार घटनास्थल पर पहुंचकर राहत कार्यों की निगरानी करते थे।
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