बैंक कर्मचारियों के यूनियन ने 28 से 30 सितंबर तक देशव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। यूनियन की प्रमुख मांगों में 5 दिन का बैंकिंग सप्ताह लागू करना शामिल है। इस दौरान यूनियन दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना देना चाहता है, लेकिन पुलिस की ओर से प्रदर्शन की अनुमति नहीं मिलने के बाद मामला दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) पहुंच गया है। यूनियन ने जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग को लेकर हाईकोर्ट का रुख किया है। मामले की सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। बैंक कर्मचारी लंबे समय से सप्ताह में पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग कर रहे हैं। यूनियन का कहना है कि 5 दिन का बैंकिंग सप्ताह लागू होने से कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन अवकाश मिलेगा।

बैंक कर्मचारियों की 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल के बीच दिल्ली हाईकोर्ट ने प्रदर्शन की अनुमति को लेकर अहम निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को बैंक यूनियनों की ओर से शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए मांगी गई वैकल्पिक जगह पर फैसला लेने को कहा है। बैंक यूनियनों ने पहले दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना और प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी। हालांकि, पुलिस ने जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्या का हवाला देते हुए अनुमति देने से इनकार किया था। इसके बाद यूनियनों ने वैकल्पिक तौर पर दिल्ली में किसी अन्य स्थान पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति देने की मांग की।

28 सितंबर तक लेना होगा फैसला

हाईकोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि वह 28, 29 और 30 सितंबर को शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जंतर-मंतर के अलावा किसी वैकल्पिक स्थान के अनुरोध पर विचार करे और 28 सितंबर तक फैसला ले। कोर्ट ने यह भी कहा कि पुलिस द्वारा लिए गए फैसले की जानकारी संबंधित बैंक यूनियन को दी जानी चाहिए। इस तरह अब प्रदर्शन के लिए वैकल्पिक स्थल को लेकर पुलिस को निर्धारित समय सीमा में निर्णय करना होगा। यूनियनों का दावा है कि संबंधित अधिकारी तक आवेदन पहुंचने की जानकारी नहीं मिलने के बाद उन्होंने रामलीला मैदान, राजेंद्र प्लेस और द्वारका में प्रदर्शन की अनुमति के लिए पुलिस अधिकारियों के सामने अलग-अलग अनुरोध किए। इसके बाद द्वारका के पुलिस उपायुक्त ने 11 सितंबर को द्वारका सेक्टर-10 में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इसके लिए ब्रिक्स सम्मेलन का हवाला दिया गया।

18 सितंबर के प्रदर्शन की अनुमति भी नहीं मिली

याचिका के अनुसार, यूनियनों ने 18 सितंबर को प्रदर्शन के लिए भी 1 सितंबर को संसद मार्ग के पुलिस उपायुक्त के समक्ष आवेदन किया था। यूनियनों का आरोप है कि आवेदन पर करीब 17 दिनों तक कोई जवाब नहीं मिला। याचिका में कहा गया है कि प्रदर्शन से ठीक एक दिन पहले 17 सितंबर की रात करीब 10 बजे अनुमति नहीं देने संबंधी पत्र दिया गया। यूनियनों का दावा है कि अनुमति पर इस तरह देरी से फैसला होने के कारण वे 11 और 18 सितंबर को प्रस्तावित प्रदर्शन नहीं कर सके। अब बैंक यूनियनें 28 से 30 सितंबर के दौरान प्रस्तावित देशव्यापी हड़ताल के बीच दिल्ली में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए जगह की अनुमति मांग रही हैं। हाईकोर्ट ने पुलिस को जंतर-मंतर के अलावा किसी वैकल्पिक स्थान के अनुरोध पर 28 सितंबर तक फैसला लेने का निर्देश दिया है।

क्या हैं बैंक यूनियनों की प्रमुख मांगें?

यूनियनों की प्रमुख मांगों में बैंकिंग क्षेत्र में पांच दिन का कार्य सप्ताह लागू करना शामिल है। इसके अलावा यूनियनें सरकार की प्रदर्शन आधारित प्रोत्साहन योजना को वापस लेने या फिलहाल रोकने की मांग कर रही हैं। यूनियनों का कहना है कि इस योजना में बदलाव यूनियनों के साथ द्विपक्षीय बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। इसके साथ ही बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों से जुड़े लंबित मुद्दों का समाधान करने की मांग भी की गई है।

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