दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने शुक्रवार को राजधानी में संचालित पेइंग गेस्ट (PG) इमारतों की सुरक्षा और उनके भवन प्लान को लेकर अधिकारियों से जवाब मांगा। अदालत ने 1,723 PG इमारतों के भविष्य को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि इनके लिए मंजूर बिल्डिंग प्लान का पता क्यों नहीं लगाया जा सका या उनका सत्यापन क्यों नहीं हो पाया। अदालत के सामने बताया गया कि सत्य निकेतन में PG इमारत गिरने की घटना के बाद MCD ने कुल 2,453 PG भवनों का सर्वे किया था। इनमें से केवल 730 इमारतों के लिए ही मंजूर बिल्डिंग प्लान उपलब्ध या सत्यापित हो सका। वहीं, 1,723 इमारतों के लिए स्वीकृत भवन योजना का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया या उसका सत्यापन नहीं हो सका। सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी को भी अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति दे दी।
दिल्ली हाई कोर्ट 6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक PG इमारत के गिरने के बाद सामने आए सुरक्षा संबंधी मुद्दों को लेकर दायर कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। इन याचिकाओं में दिल्ली में PG के रूप में इस्तेमाल होने वाली इमारतों में सुरक्षा व्यवस्था, भवन निर्माण की अनुमति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने शुक्रवार को दिल्ली नगर निगम (MCD) से सवाल किया कि जिन इमारतों के मंजूर बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं हैं, उनके खिलाफ कानून कब अपना काम करेगा।
1,723 PG इमारतों के प्लान का नहीं चला पता
हाई कोर्ट ने इस स्थिति को लेकर MCD से इन इमारतों के संबंध में की जा रही कार्रवाई की जानकारी मांगी। पीठ ने यह भी पूछा कि जिन भवनों के स्वीकृत प्लान उपलब्ध नहीं हैं, उनके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया कब शुरू होगी। अदालत ने MCD से दिल्ली में PG के रूप में इस्तेमाल होने वाली जगहों को नियंत्रित करने वाली मौजूदा कानूनी व्यवस्था और नियमों का विस्तृत ब्यौरा भी मांगा है। याचिकाओं में PG भवनों में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, भवन निर्माण की अनुमति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े सवाल उठाए गए हैं।
सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि 2,453 PG इमारतों में से केवल 730 के लिए ही बिल्डिंग प्लान उपलब्ध हैं, जो कुल संख्या के एक-तिहाई से भी कम है। अदालत ने सवाल किया कि बाकी करीब दो-तिहाई इमारतों का क्या होगा। पीठ ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि क्या उन्होंने दिल्ली में PG के रूप में इस्तेमाल होने वाली जगहों के लिए मौजूदा नियामक व्यवस्था में किसी कमी की जांच की है। अदालत ने कहा कि MCD के हलफनामे में मुख्य रूप से मास्टर प्लान के प्रावधानों का उल्लेख किया गया है, लेकिन इस तरह की गतिविधियों पर अपनी निगरानी और नियंत्रण को लेकर निगम ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है।
अवैध गतिविधियों पर निगरानी को लेकर सवाल
अदालत ने MCD से यह स्पष्ट करने को कहा कि जिन PG इमारतों के स्वीकृत बिल्डिंग प्लान उपलब्ध नहीं हैं, उनके संबंध में क्या कार्रवाई की गई है। पीठ ने यह भी जानना चाहा कि PG के रूप में इस्तेमाल की जा रही इमारतों में नियमों के उल्लंघन की निगरानी के लिए निगम के पास क्या व्यवस्था है। यह सुनवाई 6 सितंबर को सत्य निकेतन में एक PG इमारत गिरने के बाद इस मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर हो रही है। याचिकाओं में PG में रहने वाले लोगों की सुरक्षा, भवन निर्माण की अनुमति और नियमों के उल्लंघन से जुड़े मुद्दे उठाए गए हैं।
किरण बेदी को अदालत में पक्ष रखने की अनुमति
शुक्रवार की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने पूर्व IPS अधिकारी किरण बेदी को अगली सुनवाई में अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने की अनुमति भी दे दी। पीठ ने अपने आदेश में कहा कि मामले में दाखिल दलीलों की प्रतियां भी किरण बेदी को उपलब्ध कराई जाएं, ताकि वह अगली सुनवाई में अपना पक्ष रख सकें। मामले की अगली सुनवाई 15 दिन बाद होगी।
HC ने पूछा- कितने निरीक्षण किए?
नई दिल्ली। दिल्ली में PG इमारतों की सुरक्षा को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने अधिकारियों से पूछा कि अब तक कितने निरीक्षण किए गए हैं। पीठ ने PG के तौर पर इस्तेमाल हो रही इमारतों की खास जानकारी भी मांगी। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि कुछ इमारतें 50-60 साल पुरानी हैं और अधिकारी उनके बिल्डिंग प्लान तथा दूसरे रिकॉर्ड का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। सॉलिसिटर जनरल ने अधिकारियों के साथ बैठक कर जरूरी जानकारी जुटाने के लिए अदालत से समय मांगा। इस पर पीठ ने MCD के हलफनामे में इमारतों को गिराने, सील करने और कारण बताओ नोटिस से जुड़े आंकड़ों पर भी सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि अधिकारियों को उन इमारतों की पहचान करनी चाहिए, जहां वास्तव में PG संचालित हो रहे थे। पीठ ने कहा कि इसके बजाय केवल गैरकानूनी निर्माण से जुड़े सामान्य आंकड़ों पर निर्भर नहीं किया जाना चाहिए।
6 से 23 सितंबर के बीच 543 संपत्तियां गिराईं
MCD के हलफनामे के मुताबिक, 6 सितंबर से 23 सितंबर के बीच निगम ने 543 संपत्तियों को गिराया और 178 संपत्तियों को सील किया। इसके अलावा गैरकानूनी निर्माण के संबंध में 354 कारण बताओ नोटिस जारी किए गए। MCD ने 205 सीलिंग कारण बताओ नोटिस और 98 बिल्डिंग गिराने के नोटिस भी जारी किए। MCD के अनुपालन हलफनामे में बताया गया कि दिल्ली के सभी 12 जोन में किए गए सर्वे के दौरान 2,453 PG इमारतों की पहचान हुई। इनमें कुल 32,247 कमरे पाए गए और करीब 50,529 लोग रह रहे हैं। हालांकि, निगम के पास उपलब्ध रिकॉर्ड में अभी तक केवल 730 इमारतों के मंजूर बिल्डिंग प्लान का पता लगाया जा सका है। यानी बड़ी संख्या में PG इमारतों के स्वीकृत भवन प्लान का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है या उसका सत्यापन नहीं हो पाया है। MCD ने अपने हलफनामे में इमारतों की स्थिति का भी ब्यौरा दिया है। निगम के मुताबिक सर्वे में 2,342 इमारतें सुरक्षित पाई गईं। वहीं 91 इमारतों को मरम्मत की जरूरत थी। इनमें 30 को बड़ी मरम्मत की आवश्यकता थी, जबकि 4 इमारतें खतरनाक स्थिति में पाई गईं।
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