कुंदन कुमार, पटना। बिहार में आगामी पंचायत चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बड़ा अपडेट दिया है। ग्राम संसद बिहार चैप्टर कार्यक्रम में शामिल हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पंचायतों का परिसीमन कराया जा रहा है और परिसीमन पूरा होने के बाद ही पंचायती राज चुनाव कराए जाएंगे। उन्होंने साफ कहा कि परिसीमन से पहले पंचायत चुनाव की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं होगी।

मुख्यमंत्री के इस बयान से पंचायत चुनाव की तैयारी कर रहे संभावित प्रत्याशियों के बीच एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। खासकर मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति और जिला परिषद के चुनाव लड़ने वाले लोगों के लिए पंचायतों की नई सीमा और आबादी का निर्धारण महत्वपूर्ण होने वाला है।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया कि पंचायतों के परिसीमन के लिए 7500 की आबादी का मानक तय किया गया है। यानी आबादी के आधार पर पंचायतों की सीमाओं को नए सिरे से व्यवस्थित किया जाएगा। उनका कहना था कि बिहार में कई पंचायतें भौगोलिक और आबादी के लिहाज से काफी बड़ी हैं, इसलिए परिसीमन की जरूरत महसूस की गई है।

सीएम ने अपने गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस गांव से वह आते हैं, उसकी आबादी करीब 20 हजार है। इसके बावजूद उसके साथ तीन अन्य गांव भी जुड़े हुए हैं और सभी मिलकर एक ही पंचायत का हिस्सा हैं। ऐसे उदाहरणों से पंचायतों के आकार और प्रशासनिक व्यवस्था को समझा जा सकता है।

उन्होंने कहा कि बिहार में पंचायतों की सीमा काफी बड़ी है और इसी वजह से परिसीमन आवश्यक है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य निर्वाचन आयोग से भी इस संबंध में अनुरोध किया गया था और अब परिसीमन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पंचायत प्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि आमतौर पर लोग मानते हैं कि देश में सबसे बड़ी ताकत प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी के पास होती है, लेकिन उनके मुताबिक जमीनी स्तर पर सबसे महत्वपूर्ण और ताकतवर भूमिका मुखिया की होती है।

सीएम ने कहा कि मुखिया के पास सबसे अधिक काम होता है और मुखिया का चुनाव लड़ना भी आसान नहीं होता। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे चुनाव का स्तर नीचे आता जाता है, चुनावी मुकाबला उतना ही कठिन होता जाता है। वार्ड और मुखिया के चुनाव में स्थानीय स्तर पर रिश्ते और सामाजिक समीकरण भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने लोकतंत्र की जमीनी ताकत का उदाहरण देते हुए कहा कि कई बार यह भी पता नहीं चलता कि बगल में रहने वाला व्यक्ति किसे वोट दे रहा है। यहां तक कि अपने परिवार के सदस्य का वोट किस उम्मीदवार को जाएगा, इसकी भी जानकारी नहीं होती। मुख्यमंत्री ने इसे लोकतंत्र की वास्तविक ताकत बताया।

इसी तरह जिला परिषद या पंचायत स्तर के प्रतिनिधियों को भी यह समझना होगा कि सरकार के पास संसाधन सीमित हैं। उन्होंने कहा कि जनता प्रतिनिधियों को टास्क देती है और जनता ही शासन की असली ताकत है। जनता ही प्रतिनिधियों को चुनती है और किसी तीसरे व्यक्ति द्वारा प्रतिनिधि नहीं चुना जाता।

मुख्यमंत्री ने बिहार की पंचायती राज व्यवस्था की चर्चा करते हुए कहा कि बिहार के अलावा अन्य राज्यों में सरपंच के पद की व्यवस्था इस रूप में नहीं है और बिहार अकेला ऐसा प्रदेश है जहां सरपंच का पद है। उन्होंने पश्चिम बंगाल का उदाहरण देते हुए पंचायत स्तर पर राजस्व और संसाधनों की स्थिति का भी उल्लेख किया।

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