Bihar News: सीएम सम्राट चौधरी ने आज मंगलवार (22, सितंबर) को पटना के ऊर्जा ऑडिटोरियम में दीप प्रज्वलित कर ऊर्जा विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने रिमोट के माध्यम से शिलापट्ट अनावरण कर मुख्यमंत्री सोलर प्रोत्साहन योजना का उद्घाटन किया। इस अवसर पर सीएम सम्राट ने अपने संबोधन में कहा कि, प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत केंद्र सरकार की सहायता के साथ अब बिहार सरकार भी लाभार्थियों को अतिरिक्त वित्तीय सहायता देगी।
उन्होंने बताया कि, 1 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाने वाले लाभार्थी को केंद्र सरकार से मिलने वाली 30 हजार रुपये की सहायता के अतिरिक्त बिहार सरकार की ओर से 10 हजार रुपये दिए जाएंगे। 2 किलोवाट पर केंद्र की 60 हजार रुपये की सहायता के साथ राज्य सरकार 20 हजार रुपये और 3 किलोवाट पर केंद्र की 78 हजार रुपये की सहायता के साथ बिहार सरकार 20 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता देगी।
सीएम सम्राट चौधरी ने कहा कि सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने से आम लोगों के बिजली खर्च में कमी आएगी और सरकार पर बिजली सब्सिडी का बोझ भी कम होगा। उन्होंने कहा कि बिहार में वर्तमान में करीब 2.22 करोड़ बिजली कनेक्शन हैं, जिनमें लगभग 1.94 करोड़ घरेलू उपभोक्ता हैं। इनमें करीब 1.60 करोड़ परिवारों का पिछले एक वर्ष से बिजली बिल शून्य आ रहा है। उन्होंने कहा कि बिहार सरकार बिजली सब्सिडी पर करीब 23 हजार करोड़ रुपये खर्च कर रही है। अकेले कृषि क्षेत्र में बिजली सब्सिडी के रूप में करीब 5000 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। कृषि फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़कर इस राशि की बचत की जा सकती है।
सीएम सम्राट ने कहा कि अगले दो वर्षों में कृषि फीडरों को 100 प्रतिशत सोलर से संचालित करने की दिशा में काम किया जाएगा ताकि सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक सौर ऊर्जा से उत्पादित बिजली किसानों को उपलब्ध कराई जा सके। इससे किसानों को पर्याप्त बिजली मिलने के साथ ही सरकार को कृषि क्षेत्र में बिजली सब्सिडी के मद में करीब 5 हजार करोड़ रुपये तक की बचत हो सकती है। उन्होंने ऊर्जा विभाग को इस संबंध में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया।
उन्होंने कहा कि बिहार में बिजली के क्षेत्र में उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। पहले राज्य में करीब 350 मेगावाट बिजली की खपत थी जो आज बढ़कर करीब 10 हजार मेगावाट हो गयी है। अगले पांच वर्षों में राज्य में उद्योगों और अन्य क्षेत्रों की बढ़ती जरूरतों को देखते हुए 20 हजार मेगावाट बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि केवल बिजली उत्पादन बढ़ाना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए ट्रांसमिशन, वितरण, ग्रिड, तार और अन्य आधारभूत संरचनाओं को भी मजबूत करना होगा।
सीएम सम्राट चौधरी ने आगे कहा कि राज्य सरकार दिन के समय बिजली अपेक्षाकृत सस्ती दर पर खरीदती है, जबकि शाम 6 बजे से रात 10-11 बजे तक 18 से 19 रुपये प्रति यूनिट तक महंगी बिजली खरीदनी पड़ती है। इसलिए सोलर ऊर्जा के साथ पावर स्टोरेज और बैटरी स्टोरेज को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने कहा कि राज्य में सोलर, बैटरी स्टोरेज, पंप स्टोरेज और अन्य ग्रीन एनर्जी सेक्टर में निवेश को बढ़ावा दिया जाएगा। ग्रीन हाइड्रोजन के लिए भी नीति लाने की दिशा में काम किया जा रहा है। इससे बिहार में करीब 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना हैं।
मुख्यमंत्री ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने में बेहतर प्रदर्शन करने वाले स्थानीय निकायों के लिए भी प्रोत्साहन राशि की घोषणा की। जिले में बेहतर प्रदर्शन करने वाली पंचायत को 1 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसी प्रकार नगर निगम को 1 लाख रुपये, नगर परिषद को 75 हजार रुपये और नगर पंचायत को 50 हजार रुपये प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उन्होंने बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों से गांव-गांव जाकर लोगों को सौर ऊर्जा के फायदे और सरकार की सहायता के बारे में जागरूक करने की अपील की।
सीएम सम्राट ने कहा कि सक्षम परिवारों को अपने घरों पर सोलर प्लांट जरूर लगाना चाहिए। उन्होंने बताया कि उन्होंने स्वयं अपने घर पर 13 किलोवाट का सोलर प्लांट लगाया है। उन्होंने मुख्यमंत्री आवास की चर्चा करते हुए कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने वहां पर पहले से ही 190 किलोवाट का सोलर प्लांट लगवा रखा है जिसकी वजह से मुख्यमंत्री आवास का बिजली बिल शून्य आता है। उन्होंने कहा कि नेट मीटरिंग की व्यवस्था के माध्यम से घर की जरूरत से अधिक उत्पादित बिजली का लाभ भी उपभोक्ताओं को मिल सकता है।
उन्होंने स्मार्ट मीटर का उल्लेख करते हुए कहा कि स्मार्ट मीटर से बिजली की खपत और बिल की सही जानकारी उपभोक्ताओं को मिलती है। उन्होंने कहा कि बिहार में उद्योगों के विस्तार के लिए सस्ती और पर्याप्त बिजली जरूरी है। सरकार सोलर, स्टोरेज, बैटरी और अन्य ऊर्जा स्रोतों के माध्यम से बिजली क्षेत्र को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि ऊर्जा क्षेत्र की पूरी संरचना की समीक्षा के लिए कमिटी बनाई गई है। कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि बिहार ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार का विकास केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि 14 करोड़ बिहारवासियों की सामूहिक जिम्मेदारी है।
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