नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को कलकत्ता हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है. कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को बंगाल पुलिस को निर्देश दिया कि वे 2007 के एक आपराधिक मामले में कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान के खिलाफ 12 अक्टूबर तक कोई कार्रवाई न करें. गुरुवार को अदालत ने फैसले में कहा कि पुलिस इस मामले में उन्हें गिरफ्तार नहीं कर सकती। कोर्ट ने मिलन प्रधान को चुनाव लड़ने की भी इजाजत दे दी है.
जस्टिस भट्टाचार्य ने यह भी कहा कि राज्य सरकार की ओर से ऐसा कोई डॉक्यूटमेंट पेश नहीं किया गया, जिससे यह साबित हो कि कोई प्रोडक्शन वारंट जारी किया गया था.
कलकत्ता हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि गिरफ्तार कांग्रेस उम्मीदवार मिलान प्रधान को नंदीग्राम उपचुनाव में लड़ने की इजाज़त दी जानी चाहिए. 2007 के मामले में पुलिस की कार्रवाई पर 12 सितंबर तक रोक लगा दी गई है, जो कांग्रेस उम्मीदवार के लिए महत्वपूर्ण है. इस मामले की अगली सुनवाई 12 अक्टूबर को होगी.
आज की सुनवाई के दौरान मिलोन के वकील अयान भट्टाचार्य ने अदालत को बताया कि कल उनके खिलाफ एक नया मामला दर्ज किया गया है. यह एक नया आरोप है. राज्य सरकार के वकील ने जवाब दिया कि यह कल की बात नहीं है, गलत जानकारी दी गई थी. यह मामला 19 सितंबर का है.
कोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूर्व मेदिनीपुर जिले के खेजुरी पुलिस थाने में दर्ज साल 2007 के इस केस के सिलसिले में 12 अक्टूबर तक प्रधान के खिलाफ कोई कार्रवाई न करे.
कोर्ट ने कहा कि यह हैरानी की बात है कि यह आपराधिक मामला 2007 का है और जांच अधिकारी ने 19 सितंबर को याचिकाकर्ता को ‘गिरफ्तार दिखाया’ मानने का अनुरोध किया. न्यायाधीश ने पलटवार करते हुए पुलिस अधिकारियों से कहा कि शिकायत 2007 की है. गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था, लेकिन इतने वर्षों में आप क्या कर रहे थे.
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