महाराष्ट्र में समान नागरिक संहिता (UCC) के मसौदे को लेकर बनाई गई सात सदस्यीय उच्चस्तरीय कमेटी के मेम्बर बॉम्बे हाईकोर्ट के पूर्व जज जस्टिस आर. सी. चव्हाण के अचानक इस्तीफे के ठीक दो दिन बाद राज्य सरकार ने पूर्व आईएएस शत्रुघ्न सिंह को कमेटी का ‘सदस्य व वरिष्ठ सलाहकार’ नियुक्त कर दिया. यही वह “गैर-सदस्य” थे, जिनकी मौजूदगी का जिक्र जस्टिस चव्हाण ने अपने इस्तीफे वाले ईमेल में किया था.

महाराष्ट्र में UCC का ड्राफ्ट तैयार कर रही उच्चस्तरीय कमेटी के भीतर छिड़ा आंतरिक विवाद अब खुलकर सामने आ गया है. UCC ड्राफ्ट कमेटी का सदस्य बनने के बाद से रिटायर्ड IAS शत्रुघ्न सिंह चर्चा में हैं.

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से समान नागरिकता संहिता (UCC) का मसाैदा तैयार किया जा रहा है. इसके लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी बनाई गई है. सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना देसाई इस 7-सदस्यीय पैनल की अध्यक्षता कर रही हैं. सूत्रों के मुताबिक समिति की अध्यक्ष ने शत्रुघ्न सिंह को 19 सितंबर की बैठक में सलाहकार के तौर पर शामिल होने के लिए बुलाया था.

बस बात यहीं से बिगड़नी शुरू हो गयी. जस्टिस चव्हाण ने अपने इस्तीफे में सीधे तौर पर सवाल उठाया था कि जब शत्रुघ्न सिंह इस सात सदस्यीय पैनल का हिस्सा ही नहीं थे, तो वे किस हैसियत से बैठक में शामिल हुए और दिशा-निर्देश देने लगे. 

शत्रुघ्न सिंह का जन्म 28 दिसंबर 1956 को हुआ था. वह उत्तराखंड कैडर के IAS अधिकारी रहे हैं. वह उत्तराखंड कैडर में 1983 बैच के IAS अधिकारी हैं. रिटायर्ड IAS शत्रुघ्न सिंह उत्तरखंड के मुख्य सचिव रह चुके हैं. उन्होंने साल 2015 में उत्तराखंड के 13वें मुख्य सचिव के रूप में कार्यभार संभाला थे.

रिटायर्ड IAS शत्रुघ्न सिंह ने प्रतिनियुक्ति में केंद्र में भी काम किया है, जिसके तहत उन्होंने मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में प्रधानमंत्री कार्यकाल में संयुक्त सचिव और अतिरिक्त सचिव के तौर पर अपनी सेवाएं दी हैं. शत्रुघ्न सिंह पहले भी जस्टिस रंजना देसाई के साथ उत्तराखंड की समान नागरिक संहिता पर काम कर चुके हैं.

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