किशनगंज/नई दिल्ली। देश में वोट चोरी के कथित आरोपों को लेकर राजनीतिक पारा चढ़ता जा रहा है। इसी कड़ी में किशनगंज में कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भारतीय निर्वाचन आयोग के खिलाफ अपने तेवर और तीखे कर लिए हैं। पार्टी ने साफ कर दिया है कि निष्पक्ष चुनाव और लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए उसका यह आंदोलन तब तक थमेगा नहीं, जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार अपने पद से त्यागपत्र नहीं दे देते।

​राहुल गांधी के आह्वान से देशव्यापी बना आंदोलन

​किशनगंज से कांग्रेस विधायक कमरुल हुदा ने इस विरोध प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतंत्र में जनमत की चोरी एक गंभीर अपराध है। उन्होंने याद दिलाया कि इस मुद्दे को सबसे पहले देश के प्रमुख विपक्षी नेता और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पूरी मुखरता से उठाया था। राहुल गांधी की पहल के बाद ही यह विषय आज राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आ चुका है। विधायक ने दावा किया कि इस लड़ाई में अब केवल राजनीतिक दल ही नहीं, बल्कि देश के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं भी अपने संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए सड़कों पर उतर रहे हैं।

​चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही तय करने पर जोर

​केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोलते हुए कमरुल हुदा ने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया किसी भी लोकतंत्र की आत्मा होती है। मतदाताओं के भरोसे को बनाए रखने और उनके अधिकारों की सुरक्षा के लिए निर्वाचन आयोग की जवाबदेही तय होना बेहद आवश्यक है। विपक्ष का स्पष्ट मानना है कि वर्तमान परिस्थितियों में निष्पक्ष जांच और पारदर्शिता तभी संभव है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त अपने पद से इस्तीफा दें।

​ब्लॉक से लेकर जिला स्तर तक जारी रहेगा संघर्ष

​कांग्रेस नेता ने हुंकार भरते हुए कहा कि पार्टी इस मुद्दे पर किसी भी सूरत में बैकफुट पर आने वाली नहीं है। जिला अध्यक्षों से लेकर बूथ और जमीनी स्तर के कार्यकर्ता तक इस राष्ट्रव्यापी विरोध अभियान को सफल बनाने में दिन-रात जुटे हुए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक उनकी मांग स्वीकार नहीं कर ली जाती, तब तक कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन (INDIA) का हर एक कार्यकर्ता संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष की इस लड़ाई को पूरी ताकत के साथ आगे बढ़ाता रहेगा।