भारतीय कुश्ती महासंघ (WFI) के पूर्व अध्यक्ष बृजभूषण शरण सिंह (Brij Bhushan Singh) को यौन उत्पीड़न मामले में बरी किए जाने के खिलाफ चार महिला पहलवानों की ओर से दायर अपील पर राउज एवेन्यू अदालत (Rouse Avenue Court) ने सोमवार को नोटिस जारी किया। अदालत ने बृजभूषण शरण सिंह और मामले में सह-आरोपी विनोद तोमर से जवाब मांगा है। विशेष न्यायाधीश दिग्विनय सिंह ने दोनों आरोपियों को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 9 अक्टूबर की तारीख तय की है। अब आरोपियों की ओर से अपील पर अपना पक्ष अदालत के समक्ष रखा जाएगा। महिला पहलवानों ने बृजभूषण शरण सिंह को मामले में बरी किए जाने के फैसले को चुनौती देते हुए यह अपील दायर की है।
3 अगस्त के बरी करने के आदेश को दी चुनौती
चारों महिला पहलवानों ने तीन अगस्त को मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी किए जाने के आदेश को सत्र अदालत में चुनौती दी है। शुक्रवार को दायर अपील में निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों के समुचित मूल्यांकन के बजाय अनुमानों और अटकलों पर आधारित है। याचिका में दावा किया गया है कि बरी करने का फैसला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। पहलवानों की ओर से कहा गया है कि यह फैसला रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के कुछ पहलुओं के कथित रूप से त्रुटिपूर्ण और चुनिंदा मूल्यांकन पर आधारित है।
स्थापित कानूनी सिद्धांतों को लागू नहीं करने का आरोप
अपील में यह भी कहा गया है कि निचली अदालत का निष्कर्ष अनुमानों और अटकलों पर टिका है तथा मामले में कानून के बाध्यकारी और स्थापित सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया। अब सत्र अदालत आरोपियों को जारी नोटिस के बाद उनके जवाब और अपील में उठाए गए बिंदुओं पर सुनवाई करेगी। याचिका में दावा किया गया है कि बरी करने का फैसला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। पहलवानों के अनुसार, यह रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के कथित रूप से त्रुटिपूर्ण और चुनिंदा मूल्यांकन पर आधारित था और इसमें कानून के बाध्यकारी एवं स्थापित सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया। अपील में यह भी दावा किया गया है कि ट्रायल कोर्ट की दलीलें यौन उत्पीड़न और यौन अपराधों की पीड़िताओं के ‘अपेक्षित व्यवहार’ को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं पर आधारित हैं। पहलवानों का कहना है कि अदालत ने मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर पर्याप्त विचार नहीं किया।
3 अगस्त के बरी करने के आदेश को दी चुनौती
चारों महिला पहलवानों ने तीन अगस्त को मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा बृजभूषण शरण सिंह और विनोद तोमर को बरी किए जाने के आदेश को सत्र अदालत में चुनौती दी है। शुक्रवार को दायर अपील में निचली अदालत के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा गया है कि निर्णय तथ्यों और साक्ष्यों के समुचित मूल्यांकन के बजाय अनुमानों और अटकलों पर आधारित है। याचिका में दावा किया गया है कि बरी करने का फैसला कानूनी रूप से टिकने योग्य नहीं है। पहलवानों के अनुसार, यह रिकॉर्ड पर मौजूद साक्ष्यों के कथित रूप से त्रुटिपूर्ण और चुनिंदा मूल्यांकन पर आधारित था और इसमें कानून के बाध्यकारी एवं स्थापित सिद्धांतों को लागू नहीं किया गया।
पीड़िताओं के व्यवहार को लेकर पुरानी धारणाओं का आरोप
अपील में यह भी दावा किया गया है कि ट्रायल कोर्ट की दलीलें यौन उत्पीड़न और यौन अपराधों की पीड़िताओं के ‘अपेक्षित व्यवहार’ को लेकर पुरानी और रूढ़िवादी धारणाओं पर आधारित हैं। पहलवानों का कहना है कि अदालत ने मामले के महत्वपूर्ण पहलुओं और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री पर पर्याप्त विचार नहीं किया। इस साल तीन अगस्त को मजिस्ट्रेट अदालत ने विश्व चैंपियनशिप पदक विजेता समेत छह महिला पहलवानों की ओर से दर्ज कराए गए यौन उत्पीड़न मामले में साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए बृजभूषण शरण सिंह को बरी कर दिया था। अदालत ने सह-आरोपी विनोद तोमर को भी बरी कर दिया था।
बरी करते हुए अदालत ने क्या कहा था?
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अश्विनी पंवार ने 239 पन्नों के फैसले में मामले में सामने आई गवाहियों का उल्लेख किया था। अदालत के अनुसार, दो पहलवानों ने कहा था कि उन्हें बृजभूषण शरण सिंह के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाने के लिए कथित तौर पर ‘मजबूर किया गया/दबाव डाला गया’। फैसले में अदालत ने कहा था कि इन गवाहियों से यह प्रतीत होता है कि मामला राजनीति से प्रेरित था और इसे कथित तौर पर झूठा, मनगढ़ंत तथा गहरी साजिश के तहत सामूहिक रूप से तैयार किया गया था। ये टिप्पणियां मजिस्ट्रेट अदालत के 3 अगस्त के फैसले में दर्ज निष्कर्षों का हिस्सा हैं, जबकि अब चार महिला पहलवानों ने उसी फैसले को सत्र अदालत में चुनौती दी है।
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