अशोक कुमार जायसवाल, डीडीयू नगर. कैलाशपुरी स्थित एक बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर संचालित कथित साइबर कॉल सेंटर का पुलिस ने पर्दाफाश किया है. स्वाट, सर्विलांस, साइबर टीम और मुगलसराय पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि तीन अन्य को नामजद किया गया है. पुलिस के अनुसार, गिरोह जापान के नागरिकों को तकनीकी सहायता के नाम पर झांसा देकर उनके कंप्यूटर का रिमोट एक्सेस हासिल करता था और फिर बैंकिंग संबंधी जानकारी के जरिए रकम ठगी जाती थी.

पुलिस को सूचना मिली थी कि स्वागत इलेक्ट्रॉनिक शोरूम और आदित्य विजन के बगल स्थित बिल्डिंग की तीसरी मंजिल पर संदिग्ध साइबर कॉल सेंटर चल रहा है. टीम ने वीडियोग्राफी करते हुए मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की. जांच के दौरान कंप्यूटर स्क्रीन पर विदेशी भाषा में लाइव कॉल चलती मिली. इसके बाद पुलिस ने मौके से पांच लोगों को गिरफ्तार कर लिया.
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार आरोपियों में रौनक सिंह निवासी नालंदा, रोशन कुमार व अमन कुमार निवासी गया, अंकित कुमार निवासी नवादा और विकास वैभव निवासी गया शामिल हैं. रौनक को कॉल सेंटर का मैनेजर बताया गया है. एक अन्य आरोपी के दो बैंक खातों में करीब नौ लाख रुपये फ्रीज कराए गए हैं. पुलिस मुख्य संचालक और अन्य साथियों की तलाश कर रही है.

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पूछताछ में आरोपियों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने नालंदा और गया में जापानी भाषा सीखी थी. वे VoIP कॉलिंग के जरिए जापान में फोन करते और खुद को कंप्यूटर या बैंक का तकनीकी सहायता कर्मचारी बताते थे. इसके बाद पीड़ित को कथित सपोर्ट वेबसाइट पर जाने और छह अंकों का पिन डालने के लिए कहा जाता था. पिन डालते ही रिमोट एक्सेस हासिल कर कंप्यूटर पर नियंत्रण किया जाता था. पुलिस के अनुसार, गिरोह का मुख्य निशाना तकनीक से कम परिचित बुजुर्ग जापानी नागरिक होते थे. रिमोट एक्सेस के दौरान पीड़ितों से इंटरनेट बैंकिंग या बैंकिंग ऐप में लॉग-इन कराया जाता था. प्राप्त बैंकिंग विवरण को व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए अन्य सदस्यों तक पहुंचाया जाता था. पुलिस को आशंका है कि रकम अलग-अलग म्यूल बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती थी.

19 मॉनिटर, 20 CPU बरामद

पुलिस ने मौके से 19 मॉनिटर, 20 सीपीयू, 19 की-बोर्ड, 18 माउस, 18 हेडफोन, तीन लैपटॉप, छह मोबाइल फोन, चार राउटर/नेटवर्किंग उपकरण और एक स्विच हब बरामद किया है. इसके अलावा वाराणसी के पते पर बनाए गए पांच कूटरचित आधार कार्ड भी बरामद हुए हैं. पुलिस के अनुसार बरामद इलेक्ट्रॉनिक और भौतिक साक्ष्यों की जांच की जा रही है. ठगी की कुल रकम, कितने लोगों को निशाना बनाया गया, रकम किन खातों में गई और विदेशी कॉलिंग व रिमोट एक्सेस की सुविधा किसने उपलब्ध कराई, इसकी जांच जारी है. फॉरेंसिक जांच के बाद मामले में और तथ्य सामने आने की बात पुलिस ने कही है. इस संबंध में मुगलसराय थाने में मुकदमा अपराध संख्या 510/2026 के तहत बीएनएस की विभिन्न धाराओं और आईटी एक्ट की धारा 66C व 66D में मुकदमा दर्ज किया गया है.