Deepender Hooda Statement : झज्जर। हरियाणा की सियासत में इन दिनों बयानों के तीर बेहद तीखे और दिलचस्प हो चले हैं। झज्जर में आयोजित कांग्रेस सम्मेलन के मंच से रोहतक के सांसद दीपेंद्र सिंह हुड्डा ने एक ऐसा बयान दिया, जिसने न सिर्फ विरोधियों को सोचने पर मजबूर कर दिया, बल्कि खुद कांग्रेस के भीतर भी सुगबुगाहट तेज कर दी है। दीपेंद्र हुड्डा ने अपने चिर-परिचित मजाकिया लेकिन बेहद सधे हुए अंदाज में कहा—”पूरी कैबिनेट मेरे पीछे पड़ी रहती है। 11-11 मंत्री सुबह से शाम तक मेरे खिलाफ बयानबाजी करते हैं। शाम को घर पहुंचता हूँ तो अभय चौटाला निशाने पर ले लेते हैं। जब खाना खाकर सोने की तैयारी करता हूँ, तो जेजेपी वाले शुरू हो जाते हैं और रात को… रात को तो अपने ही निशाने पर लेने लगते हैं।”
ऊपरी तौर पर मुस्कुराते हुए दिए गए इस बयान के पीछे गहरी राजनीतिक कूटनीति और हरियाणा के आगामी सियासी समीकरण छिपे हुए हैं। आइए समझते हैं कि दीपेंद्र हुड्डा के इस बयान के असल मायने क्या हैं:
- खुद को हरियाणा की राजनीति का ‘केंद्र बिंदु’ बनाना
दीपेंद्र हुड्डा का यह बयान एक सोची-समझी कूटनीति का हिस्सा है, जिसके जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की है कि सत्तापक्ष (भाजपा) हो या अन्य क्षेत्रीय दल (इनेलो और जेजेपी), सभी के निशाने पर सिर्फ वही हैं। राजनीति का सीधा नियम है—जो सबसे मजबूत होता है, हमले उसी पर होते हैं। इस बयान के जरिए दीपेंद्र ने खुद को हरियाणा में विपक्ष के सबसे बड़े और इकलौते चेहरे के रूप में स्थापित करने का दांव खेला है।
- भाजपा कैबिनेट को एक साथ घेरना
यह आरोप लगाकर कि ’11 मंत्री’ उनके पीछे पड़े हैं, दीपेंद्र हुड्डा ने सीधे तौर पर सत्ताधारी दल की पूरी मशीनरी पर तंज कसा है। इसके जरिए वह जनता को यह दिखाना चाहते हैं कि सरकार जनहित के मुद्दों को छोड़कर सिर्फ एक सांसद को घेरने में अपनी ऊर्जा लगा रही है। यह जनता के बीच सहानुभूति (Sympathy Card) बटोरने की एक बेहद सधी हुई राजनीतिक चाल है।
- ‘अपनों’ पर वार: कांग्रेस की अंतर्कलह पर कूटनीतिक इशारा
बयान का सबसे चौंकाने वाला और कूटनीतिक हिस्सा था—”रात को अपने ही निशाने पर लेने लगते हैं।” यहाँ ‘अपने’ शब्द का इस्तेमाल करके दीपेंद्र ने कांग्रेस के भीतर चल रही गुटबाजी पर सीधा और तीखा प्रहार किया है। हरियाणा कांग्रेस में हुड्डा कैंप और विरोधी गुटों के बीच की खींचतान किसी से छिपी नहीं है। दीपेंद्र ने बिना किसी का नाम लिए अपनी ही पार्टी के उन नेताओं को कटघरे में खड़ा कर दिया, जो बंद कमरों में या कूटनीतिक तरीके से हुड्डा परिवार के बढ़ते प्रभाव को रोकने की कोशिशों में जुटे रहते हैं।
- अभय चौटाला और जेजेपी को ‘वोट कटवा’ साबित करने की कोशिश
शाम को अभय चौटाला और सोने के वक्त जेजेपी (जननायक जनता पार्टी) का जिक्र करके दीपेंद्र ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि ये क्षेत्रीय दल मुख्य लड़ाई का हिस्सा नहीं हैं। कूटनीतिक रूप से वह जनता के बीच यह धारणा मजबूत करना चाहते हैं कि इनेलो और जेजेपी का एकमात्र एजेंडा भाजपा के खिलाफ लड़ना नहीं, बल्कि हुड्डा परिवार और कांग्रेस को कमजोर करना है।
राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज
झज्जर के इस मंच से दीपेंद्र हुड्डा ने एक तीर से कई निशाने साधे हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक व्यस्तता और चौतरफा हमलों को एक ‘विक्टिम कार्ड’ और ‘हीरोइक इमेज’ दोनों में बदल दिया है। अब देखना यह होगा कि दीपेंद्र हुड्डा के इस ‘चौतरफा चक्रव्यूह’ वाले बयान पर भाजपा कैबिनेट, अभय चौटाला और खुद कांग्रेस के अंदर बैठे उनके ‘अपने’ क्या पलटवार करते हैं।
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