दिल्ली-NCR में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए लागू होने वाले ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) में बदलाव किया गया है। अब GRAP के अलग-अलग चरणों को संबंधित AQI की निर्धारित सीमा तक पहुंचने से पहले भी लागू किया जा सकेगा। इसका उद्देश्य हवा की गुणवत्ता खराब होने से पहले ही प्रदूषण नियंत्रण के उपाय शुरू करना है। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) एडवाइजरी जारी कर संशोधित GRAP और हवा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए किए गए बदलावों की जानकारी दी।

चार चरणों में 48 एक्शन शामिल

संशोधित GRAP में चार चरणों के तहत कुल 48 एक्शन शामिल किए गए हैं। CAQM ने GRAP के विभिन्न चरणों में कई बदलाव किए हैं, ताकि प्रदूषण बढ़ने की स्थिति में समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। नए प्रावधानों में धूल नियंत्रण से जुड़े नियमों को भी पहले की तुलना में सख्त किया गया है। निर्माण और अन्य गतिविधियों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए संबंधित एजेंसियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं।

सर्दियों में प्रदूषण रोकने के लिए GRAP में बदलाव

दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) में बदलाव किए गए हैं। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. एसडी अत्री ने संशोधित GRAP के तहत किए गए बदलावों और प्रदूषण नियंत्रण उपायों की जानकारी दी। डॉ. अत्री के मुताबिक, GRAP के चार चरण अलग-अलग AQI स्तर के आधार पर निर्धारित किए गए हैं। इन चारों चरणों में कुछ बदलाव किए गए हैं, ताकि सर्दियों के दौरान प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने पर समय रहते प्रभावी कदम उठाए जा सकें। संशोधित GRAP में प्रदूषण की स्थिति के अनुरूप कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है। इसके तहत AQI के निर्धारित स्तर तक पहुंचने से पहले भी परिस्थितियों को देखते हुए संबंधित चरण के उपाय लागू किए जा सकेंगे।

GRAP के चरणों में क्यों किया गया बदलाव?

दिल्ली-NCR में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण से निपटने के लिए ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) में बदलाव किए गए हैं। CAQM के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. एसडी अत्री ने बताया कि संशोधन का मुख्य उद्देश्य प्रदूषण बढ़ने का इंतजार करने के बजाय पहले ही जरूरी कदम उठाना है, ताकि हवा की गुणवत्ता ज्यादा खराब होने से रोकी जा सके।

AQI के हिसाब से लागू होते हैं GRAP के चार चरण

डॉ. एसडी अत्री के मुताबिक, GRAP के चार चरण अलग-अलग AQI स्तर के आधार पर लागू होते हैं।

स्टेज I: AQI 201 से 300

स्टेज II: AQI 301 से 400

स्टेज III: AQI 401 से 450

स्टेज IV: AQI 450 से अधिक

संशोधित व्यवस्था में इन चरणों के तहत कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया है, ताकि प्रदूषण की स्थिति बिगड़ने की आशंका होने पर भी समय रहते कार्रवाई की जा सके।

निर्माण परियोजनाओं के लिए पंजीकरण जरूरी

GRAP में मुख्य रूप से दो तरह के बदलाव किए गए हैं। इनमें निर्माण और विध्वंस गतिविधियों से जुड़े निर्देशों में संशोधन शामिल है। NCR में 500 वर्गमीटर से अधिक क्षेत्रफल वाले निर्माण प्रोजेक्टों के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा संचालित वेब पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।इसके अलावा, परियोजनाओं से जुड़ी स्व-प्रमाणित रिपोर्टिंग 15 दिनों के भीतर पूरी करने जैसे प्रावधान भी लागू किए जाएंगे।

कुछ पुराने एक्शन को दूसरे चरण से पहले चरण में किया गया शामिल

CAQM के मेंबर सेक्रेटरी डॉ. एसडी अत्री के मुताबिक, संशोधित GRAP में अलग-अलग चरणों के तहत लागू होने वाली कुछ कार्रवाइयों को भी पुनर्गठित किया गया है। इसके तहत पहले जो प्रतिबंध प्रदूषण का स्तर बढ़ने के बाद लागू होते थे, उन्हें अब शुरुआती चरण में ही लागू करने का प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य AQI के गंभीर स्तर तक पहुंचने का इंतजार किए बिना प्रदूषण नियंत्रण के उपाय शुरू करना है।

BS-IV और उससे नीचे की बसों पर पहले चरण से पाबंदी

28 सितंबर को CAQM के पूर्ण आयोग की 30वीं बैठक में NCR के लिए मौजूदा GRAP शेड्यूल में बदलावों को मंजूरी दी गई। संशोधित शेड्यूल के तहत दिल्ली-एनसीआर में दूसरे राज्यों से आने वाली BS-IV और उससे नीचे के उत्सर्जन मानक वाली बसों पर लागू होने वाली पाबंदी को स्टेज-II से हटाकर स्टेज-I (AQI 201-300) में शामिल कर दिया गया है। यानी अब जैसे ही दिल्ली-एनसीआर का AQI 201 से 300 के बीच पहुंचता है, संबंधित बसों की आवाजाही पर प्रतिबंध लागू किए जा सकेंगे। पहले यह कार्रवाई GRAP के दूसरे चरण में की जाती थी। संशोधित GRAP में डीजल जनरेटर सेट से जुड़े प्रतिबंधों को भी स्टेज-II से स्टेज-I में स्थानांतरित किया गया है। इसका मतलब है कि AQI के 201-300 के स्तर पर पहुंचते ही डीजल जनरेटर के इस्तेमाल पर निर्धारित पाबंदियां लागू की जा सकेंगी।

AQI बढ़ने का इंतजार नहीं करेगा सिस्टम

CAQM के मुताबिक GRAP में किए गए बदलावों का प्रमुख उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण व्यवस्था को अधिक सक्रिय बनाना है। अब किसी प्रदूषणकारी गतिविधि पर कार्रवाई के लिए AQI के अगले गंभीर चरण में पहुंचने का इंतजार नहीं करना होगा। शुरुआती स्तर पर ही जरूरी प्रतिबंध लागू करके प्रदूषण को और बढ़ने से रोकने की कोशिश की जाएगी। संशोधित GRAP में चार चरण बरकरार हैं। स्टेज-I AQI 201-300, स्टेज-II 301-400, स्टेज-III 401-450 और स्टेज-IV 450 से ऊपर AQI पर लागू होता है। नए बदलावों के तहत इन चरणों में शामिल कई कार्रवाइयों को उनकी प्रकृति और प्रदूषण नियंत्रण की जरूरत के अनुसार पुनर्व्यवस्थित किया गया है।

स्टेज-III और स्टेज-IV में भी किए गए अहम बदलाव

संशोधित GRAP में स्टेज-III और स्टेज-IV के प्रावधानों में भी बदलाव किया गया है। पहले इन दोनों चरणों के दौरान जरूरी सामान जैसे फल, दूध और अन्य आवश्यक वस्तुएं ले जाने वाले BS-IV और उससे नीचे के मानक वाले मालवाहक वाहनों को कुछ परिस्थितियों में छूट मिलती थी। संशोधित व्यवस्था में यह छूट खत्म कर दी गई है।

5 जिलों में लागू होगा कारों पर प्रतिबंध

स्टेज-III के एक्शन नंबर-1 में भी बदलाव किया गया है। अब BS-III पेट्रोल और BS-IV डीजल से चलने वाली कारों पर प्रतिबंध सिर्फ दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद और गौतमबुद्ध नगर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सोनीपत जिले में भी लागू होगा। इस बदलाव के बाद स्टेज-III लागू होने पर इन इलाकों में संबंधित उत्सर्जन मानकों वाली कारों की आवाजाही पर पाबंदी का दायरा बढ़ जाएगा।

पुराने डीजल मालवाहक वाहनों की दिल्ली में एंट्री पर रोक

नए प्रावधानों के तहत स्टेज-III लागू होने पर दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-IV और उससे कम मानक वाले डीजल चालित हल्के और मध्यम मालवाहक वाहनों (LGV/MGV) के दिल्ली में प्रवेश पर पूरी तरह रोक रहेगी। यानी ऐसे वाहनों को अब स्टेज-III के दौरान दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी। इससे दिल्ली में बाहरी राज्यों से आने वाले पुराने डीजल मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर नियंत्रण और कड़ा होगा।

सड़क मरम्मत जैसे कामों को छूट

हालांकि, स्टेज-III के सख्त प्रतिबंधों के दौरान कुछ जरूरी गतिविधियों को राहत दी गई है। इनमें सड़कों के गड्ढों की मरम्मत जैसे आवश्यक कार्य शामिल हैं। इसका उद्देश्य प्रदूषण नियंत्रण के साथ-साथ जरूरी सार्वजनिक कार्यों को पूरी तरह प्रभावित होने से बचाना है।

सिटिजन चार्टर में भी बदलाव, कुल 48 एक्शन तय

संशोधित GRAP शेड्यूल में प्रत्येक चरण के तहत सिटिजन चार्टर में दिए गए क्या करें और क्या न करें से जुड़े निर्देशों में भी बदलाव किया गया है। कुछ नए निर्देशों को शामिल करने के साथ अलग-अलग चरणों में लागू होने वाली कार्रवाइयों को दोबारा व्यवस्थित किया गया है। अब संशोधित GRAP में कुल 48 एक्शन निर्धारित किए गए हैं। इनमें स्टेज-I में 25, स्टेज-II में 8, स्टेज-III में 10 और स्टेज-IV में 5 एक्शन शामिल हैं।

निर्माण स्थलों की निगरानी का दायरा बढ़ा

आयोग ने NCR में निर्माण एवं विध्वंस (C&D) गतिविधियों से होने वाले धूल प्रदूषण की निगरानी के लिए वेब पोर्टल आधारित व्यवस्था को भी मजबूत किया है। इसके तहत निर्देश संख्या 11 से 18 में संशोधन किया गया है। अब मौजूदा वेब-पोर्टल रजिस्ट्रेशन और मॉनिटरिंग सिस्टम का दायरा बढ़ाकर नगरपालिका सीमाओं के बाहर के शहरी क्षेत्रों, नियंत्रित क्षेत्रों, औद्योगिक विकास क्षेत्रों और हाईवे कॉरिडोर जोन तक कर दिया गया है। इससे इन क्षेत्रों में चल रहे निर्माण और विध्वंस कार्यों पर धूल नियंत्रण उपायों की निगरानी की जा सकेगी।

स्कूल-कॉलेज के खेल आयोजनों के लिए भी एडवाइजरी

संशोधित व्यवस्था में सर्दियों के दौरान NCR में होने वाले स्कूल-कॉलेज के खेल आयोजनों को लेकर भी निर्देश जारी किए गए हैं। एडवाइजरी के मुताबिक, नवंबर-दिसंबर में आयोजित होने वाली शारीरिक खेल प्रतियोगिताओं का समय स्थानीय वायु गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए तय किया जाना चाहिए। खास तौर पर छात्रों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आयोजन का समय निर्धारित करने की सलाह दी गई है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि निर्देशों की अनदेखी होने पर आवश्यक कार्रवाई की जा सकती है।

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