दिल्ली दंगों Delhi Riots) से जुड़े कथित साजिश मामले में उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) को दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) से एक बार फिर राहत नहीं मिली है। अदालत ने दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। यह फैसला 30 सितंबर 2026 को सुनाया गया। हाई कोर्ट के इस फैसले के बाद उमर खालिद की ओर से दायर जमानत अपील तीसरी बार खारिज हुई है, जबकि शरजील इमाम को इस मामले में दूसरी बार जमानत से इनकार किया गया है।

2020 से जेल में हैं दोनों

दोनों आरोपी फरवरी 2020 में हुए उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों से जुड़े बड़े साजिश मामले में आरोपी हैं और सितंबर 2020 से हिरासत में हैं। मामले में उन पर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA समेत विभिन्न धाराओं के तहत आरोप हैं। इससे पहले दिल्ली हाई कोर्ट ने सितंबर 2025 में भी दोनों की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं। अदालत ने उस समय अभियोजन की ओर से लगाए गए आरोपों और उपलब्ध सामग्री के आधार पर जमानत देने से इनकार किया था।

उमर खालिद-शरजील इमाम की तीसरी जमानत याचिका खारिज

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े ‘वृहद साजिश’ वाले UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाई कोर्ट से राहत नहीं मिली है। दोनों ने जमानत के लिए दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे जस्टिस प्रतिभा एम. सिंह और जस्टिस दिनेश भट्ट की बेंच ने खारिज कर दिया। यह इस मामले में दोनों आरोपियों की ओर से दायर तीसरी जमानत याचिका थी। सुनवाई के दौरान बेंच ने कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के 5 जनवरी के फैसले में निर्धारित शर्तों को बदल नहीं सकती।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया हवाला

सुप्रीम कोर्ट ने 5 जनवरी के अपने फैसले में दोनों आरोपियों के लिए जमानत आवेदन करने की समय-सीमा से जुड़ी व्यवस्था की थी। अदालत के मुताबिक, दोनों आरोपी गवाही पूरी होने या आदेश पारित होने की तारीख से एक साल की अवधि पूरी होने के बाद जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। इनमें से जो तारीख पहले आएगी, उसके आधार पर जमानत आवेदन किया जा सकेगा। दिल्ली हाई कोर्ट की बेंच ने इसी व्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश में बदलाव नहीं कर सकती।

फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगों से जुड़े ‘वृहद साजिश’ वाले UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम को दिल्ली हाई कोर्ट से एक बार फिर जमानत नहीं मिली। 30 सितंबर 2026 को अदालत ने दोनों की तीसरी जमानत याचिका खारिज कर दी। इन दंगों के दौरान 53 लोगों की मौत हुई थी और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। मामला नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद हुई हिंसा से जुड़ा है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इस मामले में UAPA समेत कई धाराओं के तहत आरोप लगाए हैं।

पुलिस ने दोनों पर लगाए साजिश के आरोप

दिल्ली पुलिस ने उमर खालिद और शरजील इमाम पर दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश में शामिल होने के आरोप लगाए हैं। वहीं, एक्टिविस्ट खालिद सैफी और आम आदमी पार्टी के पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन समेत कई अन्य लोग भी इस मामले में आरोपी हैं। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच स्पेशल सेल ने की है। हालांकि, आरोपों पर अंतिम फैसला अभी नहीं हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी 2026 में भी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज करते हुए स्पष्ट किया था कि ये टिप्पणियां जमानत के चरण तक सीमित हैं और इन्हें ट्रायल में मामले के अंतिम गुण-दोष पर फैसला नहीं माना जाएगा।

2020 में हुई थी उमर खालिद और शरजील इमाम की गिरफ्तारी

दिल्ली दंगों से जुड़े ‘वृहद साजिश’ वाले UAPA मामले में उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाएं पहले निचली अदालत में भी खारिज हो चुकी हैं। इसके बाद दोनों ने दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। शरजील इमाम को इस मामले में 25 अगस्त 2020 को गिरफ्तार किया गया था, जबकि उमर खालिद की गिरफ्तारी 13 सितंबर 2020 को हुई थी। दिल्ली पुलिस ने हाई कोर्ट में दोनों की जमानत याचिकाओं का विरोध किया था। पुलिस का आरोप है कि दोनों 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों की कथित बड़ी साजिश के मुख्य साजिशकर्ताओं में शामिल थे। इन आरोपों पर अंतिम फैसला ट्रायल के दौरान होना है।

अक्टूबर में शरजील इमाम को 7 दिन की अंतरिम राहत

हालांकि दिल्ली हाई कोर्ट ने शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिका खारिज कर दी है, लेकिन उन्हें अक्टूबर में सात दिनों के लिए जेल से बाहर आने की अनुमति मिली है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश समीर बाजपेयी ने शरजील इमाम को अंतरिम जमानत दी है। उन्हें एक रिश्तेदार की शादी में शामिल होने के लिए 4 अक्टूबर से 10 अक्टूबर तक जेल से बाहर रहने की अनुमति दी गई है।

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