Bihar News: बिहार के खगड़िया जिले के पांच मजदूरों की दिल्ली में हुए निर्माणाधीन इमारत हादसे में मौत हो गई। सभी मजदूर बेलदौर प्रखंड की बोबिल पंचायत के रहने वाले थे। हादसे में पांचों की मौत की पुष्टि होने के बाद उनके पैतृक गांव बेसीबासा और हनुमाननगर में मातम पसरा हुआ है। दीपावली से पहले हुई इस घटना ने पांच परिवारों की खुशियां छीन ली हैं। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
बता दें कि यह हादसा दिल्ली के दरियागंज स्थित अजमेरी गेट-चावड़ी बाजार इलाके में हुआ था। यहां एक बहुमंजिला इमारत में छत की ढलाई का काम चल रहा था। इसी दौरान इमारत का हिस्सा गिरने से कई मजदूर मलबे में दब गए थे। हादसे के बाद से ही बचाव अभियान चलाया जा रहा था।
तीसरे दिन मलबे से निकाले गए चार और शव
हादसे के तीसरे दिन शनिवार को रेस्क्यू टीम ने मलबे से चार और मजदूरों के शव बरामद किए। इससे पहले गुरुवार को संजीत राम का शव निकाला गया था। चार अन्य शव मिलने के बाद खगड़िया के पांचों मजदूरों की मौत की पुष्टि हो गई। मृतक बेलदौर प्रखंड की बोबिल पंचायत के वार्ड संख्या 2, 3 और 4 के रहने वाले थे। इनमें बेसीबासा और हनुमाननगर गांव के मजदूर शामिल हैं। मौत की खबर मिलते ही गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस
पांचों मजदूरों के शव मिलने के बाद अब उनके अंतिम संस्कार को लेकर असमंजस बना हुआ है। परिजन और ग्रामीण चाहते हैं कि सभी के पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव लाए जाएं, ताकि परिवार के लोग और ग्रामीण अंतिम दर्शन कर सकें। पंचायत प्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने जिला प्रशासन से शवों को गांव पहुंचाने की व्यवस्था करने की मांग की है। हालांकि, खबर लिखे जाने तक यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि अंतिम संस्कार दिल्ली में होगा या शवों को खगड़िया लाया जाएगा।
पीड़ित परिवारों से मिले श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी
शनिवार को पांचों मजदूरों की मौत की पुष्टि के बाद श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सह प्रभारी बीईओ मनोहर कुमार चौधरी दोनों गांव पहुंचे। उन्होंने मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी। साथ ही राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सहायता जल्द दिलाने का भरोसा दिया।
उन्होंने बताया कि सरकारी सहायता की प्रक्रिया के लिए परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट, एफआईआर की प्रमाणित प्रति और मृत्यु प्रमाण पत्र जमा करना होगा। इस दौरान मुखिया प्रतिनिधि संजय सिंह, जदयू नेता सह समाजसेवी ऋषभ कुमार समेत कई ग्रामीण और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
50 लाख मुआवजा और नौकरी देने की मांग
हादसे के बाद मृतकों के परिवारों के लिए मुआवजे की मांग भी उठने लगी है। जदयू नेता और समाजसेवी ऋषभ कुमार ने जिला प्रशासन और श्रम विभाग से पीड़ित परिवारों को जल्द सरकारी सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार से प्रत्येक मृतक के परिवार को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। इसके साथ ही पांचों मजदूरों के शवों को सम्मानपूर्वक उनके पैतृक गांव पहुंचाने की व्यवस्था करने की अपील की है। ऋषभ कुमार ने कहा कि मांगों पर सकारात्मक पहल नहीं होने पर ग्रामीणों के साथ आंदोलन किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर चक्का जाम भी किया जा सकता है।
दिल्ली में हुए इस हादसे ने पांच परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। रोजी-रोटी कमाने के लिए घर से दूर गए मजदूर अब कभी वापस नहीं लौटेंगे। जिन परिवारों को दीपावली पर उनके लौटने का इंतजार था, वहां अब उनके पार्थिव शरीर आने की प्रतीक्षा हो रही है।
ये भी पढ़ें- कमर से ऊपर गोली क्यों मारी? मनेर एनकाउंटर में मारे गए युवकों के घर पहुंचे पप्पू यादव ने उठाए सवाल

