अगर आप भी ऑनलाइन लेन-देन करते हैं, तो यह खबर आपके लिए चेतावनी साबित हो सकती है। राजधानी दिल्ली में साइबर क्राइम के मामले इतनी तेजी से बढ़े हैं कि पिछले 10 सालों के रिकॉर्ड टूट गए हैं। आंकड़ों के मुताबिक, 2015 में ऑनलाइन ठगी का कुल आंकड़ा 6.3 करोड़ रुपये था, जबकि 2025 में यह बढ़कर 1271 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, यानी लगभग 190 गुना वृद्धि दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल लेन-देन और मोबाइल बैंकिंग के बढ़ते प्रयोग के साथ-साथ सुरक्षा उपायों की कमी, साइबर ठगों के लिए अवसर पैदा कर रही है। पुलिस और साइबर सेल ने नागरिकों से सावधानी बरतने, OTP या बैंक डिटेल्स साझा न करने और सिर्फ भरोसेमंद प्लेटफॉर्म पर ट्रांजैक्शन करने की अपील की है।
50 लाख से ज्यादा के बड़े साइबर फ्रॉड
हैरत की बात यह है कि ठग अब छोटे-मोटे लेन-देन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि करोड़ों रुपये के ऑनलाइन फ्रॉड करने लगे हैं। दिल्ली पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, 2025 में 376 ऐसे मामले दर्ज किए गए, जिनमें प्रत्येक पीड़ित से 50 लाख रुपये या उससे अधिक की ठगी हुई।
सबसे बड़ा जाल: इन्वेस्टमेंट और डिजिटल अरेस्ट
दिल्ली में साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं और इंटेलिजेंस फ्यूजन एंड स्ट्रैटेजिक ऑपरेशंस (IFSO) यूनिट के आंकड़े इसे साफ दिखाते हैं। 2025 में 50 लाख रुपये से अधिक की ठगी वाले 376 मामलों में सबसे बड़ा हथियार इन्वेस्टमेंट फ्रॉड रहा। इनमें से 230 मामले सीधे निवेश के झांसे में फंसे लोगों से जुड़े थे। दूसरे नंबर पर रहा डिजिटल अरेस्ट स्कैम, जिसमें 57 मामले दर्ज किए गए। इसमें ठग पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर पीड़ितों को डराते हैं और गिरफ्तारी का खौफ दिखाकर पैसे वसूलते हैं।
मनोवैज्ञानिक दबाव बना रहे अपराधी
पुलिस जांच में सामने आया है कि साइबर ठगी अब रैंडम स्कैम तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह पूरी तरह सुनियोजित अपराध का रूप ले चुकी है। ठग पीड़ितों पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाते हैं, जिससे वे कुछ ही घंटों के भीतर बड़ी रकम ट्रांसफर करने को मजबूर हो जाते हैं। जांच में यह भी सामने आया है कि अपराधी फर्जी पहचान, नकली दस्तावेजों और म्यूल बैंक खातों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि ठगी की रकम को तुरंत अलग अलग खातों में ट्रांसफर किया जा सके और जांच एजेंसियों को गुमराह किया जा सके।
जामताड़ा नहीं, अब यहां से चल रहा है खेल
आमतौर पर साइबर क्राइम का जिक्र होते ही झारखंड के जामताड़ा का नाम सामने आता है, लेकिन ताज़ा डेटा कुछ और ही कहानी बयां करता है। गिरफ्तारी के आंकड़ों के अनुसार अब साइबर ठगों के नेटवर्क दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और हरियाणा तक फैल चुके हैं। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जामताड़ा से मुख्य सरगनाओं की गिरफ्तारी बहुत कम हो पाती है, क्योंकि गिरोह के मास्टरमाइंड अक्सर दूसरे राज्यों में बैठकर ऑपरेट करते हैं और निचले स्तर के लोगों को आगे कर देते हैं।
UPI फ्रॉड का बोलबाला
हालांकि बड़े अमाउंट वाले मामलों में इन्वेस्टमेंट फ्रॉड सबसे आगे रहा, लेकिन आम जनता सबसे ज्यादा UPI स्कैम का शिकार हो रही है। आंकड़ों के मुताबिक, कुल साइबर ठगी शिकायतों में करीब 40–45 प्रतिशत मामले UPI से जुड़े हुए थे। पुलिस का कहना है कि ठग फर्जी कलेक्ट रिक्वेस्ट, QR कोड और लिंक भेजकर लोगों को झांसे में लेते हैं, और छोटी रकम के नाम पर धीरे-धीरे खाते से बड़ी राशि निकाल लेते हैं। यही वजह है कि UPI स्कैम तेजी से आम लोगों की जेब पर सीधा असर डाल रहा है।
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