दिल्ली में लापता लोगों, खासकर बच्चों को लेकर फैल रही अफवाहों के बीच दिल्ली पुलिस का आधिकारिक बयान सामने आया है। दिल्ली पुलिस के जॉइंट कमिश्नर संजय त्यागी ने स्पष्ट किया है कि राजधानी में लापता व्यक्तियों की संख्या को लेकर किसी भी तरह की घबराहट या भय की कोई जरूरत नहीं है। जॉइंट सीपी संजय त्यागी ने कहा कि पहले की तुलना में दिल्ली में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि जनवरी 2026 में लापता व्यक्तियों के मामलों में पिछले वर्षों की समान अवधि की तुलना में कमी दर्ज की गई है।

अफवाहों से बचने की अपील

दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर ध्यान न दें। पुलिस का कहना है कि कुछ असत्यापित दावे और भ्रामक पोस्ट अनावश्यक डर और भ्रम पैदा कर रहे हैं। इस संबंध में दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल X (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा, “हम नागरिकों से अपील करते हैं कि वे लापता बच्चों के मामलों में अचानक वृद्धि की अफवाहों का शिकार न हों।”

दिल्ली पुलिस ने कहा कि ऐसे दावों का खंडन करते हुए, हम अफवाह फैलाने वालों को आंकड़ों को गलत तरीके से प्रस्तुत करके अनावश्यक भय फैलाने के लिए कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी भी देते हैं. प्रत्येक बच्चे की सुरक्षा दिल्ली पुलिस के लिए सर्वोपरि है. दिल्ली पुलिस 24×7 सेवा देने और लापता और अपहृत बच्चों का पता लगाने तथा उन्हें उनके परिवार के सदस्यों के साथ शीघ्रता से मिलाने के लिए पूरी तरह से प्रयासरत है.

राजधानी में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग

दिल्ली में लापता व्यक्तियों, खासकर बच्चों को लेकर फैल रही चर्चाओं के बीच दिल्ली पुलिस ने स्थिति साफ की है। पुलिस ने कहा है कि राजधानी में पहले की तुलना में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कोई वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि जनवरी 2026 में पिछले वर्षों की समान अवधि की तुलना में ऐसे मामलों में कमी दर्ज की गई है।

दिल्ली पुलिस के अनुसार, विभाग निष्पक्ष और पारदर्शी अपराध रिपोर्टिंग नीति का पालन करता है। किसी भी लापता व्यक्ति की शिकायत को गंभीरता से लिया जाता है और तय प्रक्रिया के तहत तुरंत कार्रवाई की जाती है। दिल्ली पुलिस ने बताया कि लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट केवल स्थानीय पुलिस थाने में ही नहीं, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से और ERSS-112 (इमरजेंसी रिस्पॉन्स सपोर्ट सिस्टम) के जरिए भी आसानी से दर्ज कराई जा सकती है।

लापता बच्चों के मामलों को प्राथमिकता

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत लापता व्यक्तियों का तुरंत पता लगाने का प्रयास किया जाता है। विशेष रूप से लापता बच्चों के मामलों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है और बिना किसी देरी के खोज अभियान शुरू किया जाता है। पुलिस ने बताया कि इस उद्देश्य के लिए सभी जिलों में डेडिकेटेड मिसिंग पर्सन स्क्वाड तैनात हैं। इसके अलावा, क्राइम ब्रांच की एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) भी सक्रिय रूप से कार्यरत है, ताकि मानव तस्करी समेत किसी भी संभावित अपराध को रोका जा सके और मामलों में त्वरित व प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

हर दिन 82 लोग गायब, हर घंटे 3 लोग लापता

दिल्ली पुलिस के आश्वासन के बावजूद राजधानी में लापता लोगों से जुड़े आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। उपलब्ध आंकड़ों पर नजर डालें तो दिल्ली में हर दिन औसतन 82 लोग और हर घंटे करीब 3 लोग लापता हो रहे हैं। यह केवल आंकड़े नहीं हैं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों का दर्द है, जिनकी रातें जागते हुए और दिन पुलिस थानों के चक्कर काटते हुए गुजर रहे हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति लापता बच्चों और महिलाओं को लेकर सामने आई है। जिन लोगों का अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है, उनमें 616 बच्चे और 1,372 महिलाएं शामिल हैं। लापता बच्चों की संख्या ने हालात को और भी गंभीर बना दिया है और समाज के लिए बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

1,372 महिलाएं भी लापता, सुरक्षा पर बड़ा सवाल

दिल्ली में लापता लोगों के मामले केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रह गए हैं, बल्कि अब यह महिला सुरक्षा और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, लापता लोगों में 1,372 महिलाएं शामिल हैं, जो राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे तमाम दावों पर सवालिया निशान लगाते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि 36 दिनों में पुलिस सिर्फ़ 17 प्रतिशत लोगों को ही खोज पाई, जबकि 83 प्रतिशत लोग अब भी लापता हैं। इन मामलों में एक बात लगातार सामने आ रही है अधिकांश मामलों में परिजन खुद ही अपनों की तलाश में जुटे हुए हैं, जबकि पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

परिजनों का आरोप: सिस्टम से भी लड़ना पड़ रहा है

लापता लोगों के परिवारों का कहना है कि उन्हें सिर्फ़ अपने प्रियजनों को ढूंढने की चिंता नहीं है, बल्कि सिस्टम की बेरुखी और सुस्त प्रक्रिया से भी जूझना पड़ रहा है। कई परिजनों का आरोप है कि शुरुआती दिनों में पर्याप्त गंभीरता नहीं दिखाई गई, जिससे समय निकलता गया और तलाश और मुश्किल होती चली गई।

अफवाहों पर ध्यान ना देने की अपील

दिल्ली पुलिस के संयुक्त पुलिस आयुक्त संजय त्यागी ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें। जॉइंट सीपी संजय त्यागी ने कहा, “हम अपील करते हैं कि किसी प्रकार की अफवाह पर ध्यान न दें। अफवाह फैलाने वालों के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दिल्ली में बच्चों के लापता होने या अपहरण के मामलों में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है। पुलिस के अनुसार, इस तरह की बातें बिना तथ्य के फैलाई जा रही हैं, जिससे लोगों में अनावश्यक डर पैदा हो रहा है।

अफवाहों से डर का माहौल

पुलिस ने कहा है कि सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक पोस्ट और संदेश वायरल किए जा रहे हैं, जिनका कोई ठोस आधार नहीं है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इस तरह की अफवाहें लोगों में अनावश्यक डर और भ्रम पैदा कर रही हैं। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसी सूचनाओं को न तो साझा करें और न ही उन पर भरोसा करें। पुलिस ने साफ किया है कि जानबूझकर गलत जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों का कहना है कि अफवाहों के कारण न केवल जनता में घबराहट फैलती है, बल्कि जांच और पुलिस की कार्रवाई भी प्रभावित होती है।

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