नई दिल्ली . MCD ने संपत्तिकर से राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर काम करना शुरू कर दिया है. दिल्ली नगर निगम बिजली कंपनियों के डेटाबेस को संपत्तिकर विभाग में समायोजित करेगा.

निगम ने वित्तीय वर्ष 2024-25 में 4 हजार करोड़ रुपये से अधिक संपत्तिकर प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है. निगम ने उन संपत्तियों को भी अपने डाटा में जोड़ने का फैसला किया है, जो अभी तक संपत्तिकर का भुगतान नहीं करते थे. अभी नगर निगम के पास कुल 13 लाख करदाताओं का डाटा उपलब्ध है. ये सभी संपत्तिकर का भुगतान करते हैं. इस संबंध में अधिकारियों ने बताया कि बिजली कंपनियों के पास लगभग 70 लाख संपत्तियों का डाटा मौजूद है. इन सभी को संपत्तिकर विभाग के दायरे में लाया जाएगा. इससे राजस्व बढ़ेगा और लोगों को सहभागिता योजना से भी जोड़ेंगे.

बिजली कंपनियों के डाटा को चार माह में संपत्तिकर विभाग के डाटा से जोड़ने की योजना बनाई गई है. दिल्ली विद्युत नियामक आयोग (DERC) और बिजली वितरण करने वाली सभी कंपनियों को 2 माह में कई पत्र भी लिखे गए हैं.

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बिजली कंपनियों का कहना है कि अभी दिल्ली में मांग 5 हजार के आंकड़े के ही पार पहुंची है, जबकि हम 8 हजार मेगावाट मांग तक को आपूर्ति करने में सक्षम है. इन कंपनियों की मानें, तो 2024 में गर्मियों की मांग के पूर्वानुमान के तहत विभिन्न स्रोतों से पर्याप्त बिजली की व्यवस्था कर रखी है.

इसमें बिजली से लेकर सौर ऊर्जा व अन्य विकल्प शामिल हैं . कंपनियों का कहना है कि अचानक जहां खराबी आती है वहां तय समय के लिए बिजली बंद की जाती है और उसके बाद तुरंत चालू कर दी जाती है.

बिजली कंपनियों का दावा है दिल्ली में इस बार बिजली की मांग अब तक के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ते हुए 8 हजार मेगावाट के उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है. इसलिए विभिन्न राज्यों व विभिन्न स्रोतों से पूर्व में बिजली आपूर्ति समझौते कर रखे हैं.