राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार चिंताजनक बना हुआ है। गुरुवार को भी दिल्ली की हवा बेहद खराब श्रेणी में दर्ज की गई। हालांकि, बुधवार के मुकाबले वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) में मामूली गिरावट देखने को मिली। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को दिल्ली का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक 369 दर्ज किया गया, जबकि बुधवार को यह 377 था। इस तरह एक दिन में AQI में आठ अंकों की कमी आई है। गुरुवार को दिनभर धुंध का असर देखने को मिला। हालांकि, दोपहर तक धूप निकलने से प्रदूषण के स्तर में मामूली सुधार दर्ज किया गया। इसके बावजूद हवा की गुणवत्ता में कोई खास राहत नहीं मिली और राजधानी की आबोहवा बेहद खराब श्रेणी में बनी रही।
प्रदूषण के स्रोतों की बात करें तो गुरुवार को इसमें सबसे अधिक 17.913 प्रतिशत योगदान वाहनों का रहा, जबकि पराली जलाने की हिस्सेदारी 15.60 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा कूड़ा जलाने, एनसीआर से आने वाले प्रदूषण और अन्य कारकों ने भी राजधानी की हवा को प्रदूषित करने में भूमिका निभाई। राजधानी में प्रदूषण की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि करीब 20 इलाकों में शाम के समय वायु गुणवत्ता सूचकांक 400 के पार पहुंच गया। जहांगीरपुरी में सबसे अधिक 454 AQI दर्ज किया गया, जो गंभीर श्रेणी में आता है।
प्रदूषण के साथ धुंध और कोहरे का भी रहेगा असर
मौसम विभाग के अनुसार, फिलहाल अधिकतम और न्यूनतम तापमान में किसी बड़े बदलाव के आसार नहीं हैं। ऐसे में दिल्लीवासियों को प्रदूषण के साथ सुबह के समय धुंध और कोहरे का सामना करना पड़ सकता है। राजधानी में गुरुवार को अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में गिरावट दर्ज की गई। अधिकतम तापमान 26.6 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 0.9 डिग्री कम दर्ज किया गया। वहीं, न्यूनतम तापमान 16.4 डिग्री सेल्सियस रहा, जो सामान्य से 1.1 डिग्री कम था। इसके अलावा दिल्ली में नमी का स्तर भी काफी अधिक दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार, गुरुवार को अधिकतम आर्द्रता 100 प्रतिशत और न्यूनतम आर्द्रता 64 प्रतिशत रही।
प्रदूषण से बचाव के लिए बरतें ये सावधानियां
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए लोगों को अपनी सेहत का विशेष ध्यान रखने की जरूरत है। प्रदूषित हवा के दुष्प्रभाव से बचने के लिए विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए।
एन-95 मास्क पहनें: यदि किसी जरूरी काम से बाहर निकलना पड़े तो अच्छी फिटिंग वाला एन-95 मास्क पहनें। यह हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कणों से बचाव में मदद करता है। सामान्य कपड़े के मास्क से पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलती।
खुले में व्यायाम करने से बचें: सुबह और शाम के समय प्रदूषण का असर अधिक महसूस हो सकता है। ऐसे में बाहर टहलने, दौड़ने और खुले में एक्सरसाइज करने से बचें।
बच्चों और बुजुर्गों का रखें विशेष ध्यान: बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा से पीड़ित लोगों को प्रदूषित वातावरण में अधिक समय बिताने से बचना चाहिए। संभव हो तो उन्हें घर के अंदर ही रहने दें।
खिड़की-दरवाजे बंद रखें: जब बाहर प्रदूषण का स्तर अधिक हो, तब घर की खिड़कियां और दरवाजे बंद रखें। हवा की गुणवत्ता बेहतर होने पर ही घर में ताजी हवा आने दें।
सफाई का तरीका बदलें: घर में धूल उड़ने से रोकने के लिए झाड़ू लगाने के बजाय गीले कपड़े से सफाई करें या पोछा लगाएं।
घर के अंदर धुएं से बचें: प्रदूषण से बचने के लिए घर के अंदर अगरबत्ती, धूप और मच्छर भगाने वाली कॉइल जलाने से परहेज करें। इनके धुएं से घर के भीतर भी हवा की गुणवत्ता खराब हो सकती है।
अस्पतालों की ओपीडी में बढ़े अस्थमा के मरीज
राजधानी में बढ़ते वायु प्रदूषण का असर अब लोगों की सेहत पर भी दिखाई देने लगा है। अस्पतालों की रेस्पिरेटरी मेडिसिन ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित मरीजों की संख्या बढ़ रही है। बच्चों में भी प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। खांसी, जुकाम और एलर्जी की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंच रहे हैं। राम मनोहर लोहिया अस्पताल के पल्मोनरी मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. दीपक ने बताया कि ओपीडी में अस्थमा के मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। प्रदूषण के कारण सांस संबंधी परेशानियों से जूझ रहे मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल आना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि अस्पताल में प्रत्येक सोमवार को प्रदूषण क्लीनिक संचालित किया जाता है, लेकिन फिलहाल वहां सीधे मरीज नहीं पहुंच रहे हैं। इसके बावजूद सामान्य ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या बढ़ती दिखाई दे रही है। बच्चों में भी खांसी, जुकाम और एलर्जी जैसी शिकायतें सामने आ रही हैं।
प्रदूषण को लेकर सिरसा ने पंजाब सरकार को घेरा, पराली जलाने पर उठाए सवाल
दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण के बीच पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने पंजाब की आम आदमी पार्टी (आप) सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने पंजाब में पराली जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने में विफल रहने को लेकर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सिरसा ने कहा कि पंजाब सरकार ने चार साल पहले पराली जलाने की समस्या को खत्म करने का वादा किया था, लेकिन इसके बावजूद राज्य में बड़े पैमाने पर पराली जलाई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने इस समस्या को खत्म करने का भरोसा दिया था, तो अब तक इस दिशा में प्रभावी कदम क्यों नहीं उठाए गए। पर्यावरण मंत्री ने पराली जलाने की घटनाओं को रोकने में नाकामी को लेकर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब लिया जाना चाहिए।
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