राजधानी दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए सरकार ने विकास कार्यों की शुरुआत की है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने मंगलवार को राजस्थानी उद्योग नगर औद्योगिक क्षेत्र से 170 करोड़ रुपये की लागत वाली विकास परियोजनाओं का शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं के तहत दिल्ली के 9 औद्योगिक क्षेत्रों में 15 किलोमीटर लंबी सड़कों का निर्माण किया जाएगा। इसके साथ ही बरसाती पानी की निकासी के लिए 34 किलोमीटर लंबी नालियां भी बनाई जाएंगी।

9 औद्योगिक क्षेत्रों में सुधरेगा बुनियादी ढांचा

इन विकास कार्यों का उद्देश्य औद्योगिक क्षेत्रों में सड़क संपर्क और जल निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाना है। नई सड़कों के निर्माण से औद्योगिक इकाइयों और यहां आने-जाने वाले लोगों को सुविधा मिलने की उम्मीद है। वहीं, बरसाती पानी की निकासी के लिए नालियां बनने से बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से निपटने में मदद मिल सकती है। इन परियोजनाओं पर कुल 170 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने राजस्थानी उद्योग नगर औद्योगिक क्षेत्र से इन कार्यों की शुरुआत की।

इन औद्योगिक क्षेत्रों का होगा कायाकल्प

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली के कई प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर विकास कार्य शुरू किए गए हैं। इनमें नांगलोई जाट, एस-ब्लॉक ओखला फेज-2, राजस्थानी उद्योग नगर, जीटीके उद्योग नगर, नारायणा इंडस्ट्रियल एरिया, लॉरेंस रोड, नजफगढ़ (रामा रोड) और डीएलएफ मोती नगर जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इन इलाकों में सड़क, जल निकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को दूर करने पर जोर दिया जाएगा।

15 किलोमीटर सड़कें और 34 किलोमीटर ड्रेनेज का होगा निर्माण

मुख्यमंत्री के मुताबिक, इन औद्योगिक क्षेत्रों में करीब 15 किलोमीटर लंबी सड़कों और लगभग 34 किलोमीटर लंबे ड्रेनेज नेटवर्क का निर्माण किया जाएगा। इससे औद्योगिक क्षेत्रों में वाहनों की आवाजाही आसान होने और बारिश के दौरान जलभराव की समस्या कम करने में मदद मिलेगी।

विकास कार्यों के लिए बजट की नहीं होगी कमी

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली के औद्योगिक क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए बजट की कमी नहीं होने दी जाएगी। उन्होंने बेहतर ड्रेनेज व्यवस्था की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि नालियों के निर्माण से बारिश के दौरान जलभराव की समस्या को कम करने में मदद मिलेगी। साथ ही, बेहतर सड़कें और जल निकासी व्यवस्था औद्योगिक क्षेत्रों में प्रदूषण की समस्या कम करने में भी सहायक हो सकती हैं।

बार-बार नहीं खोदनी पड़ेंगी सड़कें

इन परियोजनाओं के तहत भूमिगत यूटिलिटी डक्ट्स भी बनाई जाएंगी। इससे बिजली, पानी, टेलीकॉम और अन्य जरूरी सेवाओं की लाइनें व्यवस्थित तरीके से बिछाई जा सकेंगी। भविष्य में इन सेवाओं की मरम्मत या नई लाइनें डालने के लिए बार-बार सड़कों की खुदाई करने की जरूरत कम होगी। इससे सड़कों को लंबे समय तक बेहतर स्थिति में बनाए रखने में मदद मिलेगी।

25 वर्षों से औद्योगिक क्षेत्रों में विकास की कमी का दावा

इस मौके पर दिल्ली के उद्योग मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि पिछले 25 वर्षों में राजधानी के औद्योगिक क्षेत्रों में अपेक्षित स्तर पर विकास कार्य नहीं हो पाए। उन्होंने बताया कि अब दिल्ली सरकार ने 170 करोड़ रुपये की लागत से 9 औद्योगिक क्षेत्रों के कायाकल्प का निर्णय लिया है।

50 हजार नए CCTV कैमरों से लैस होगी दिल्ली, स्मार्ट स्ट्रीटलाइटों पर भी जोर

दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूरी राष्ट्रीय राजधानी में 50 हजार नए सीसीटीवी कैमरे और स्मार्ट स्ट्रीटलाइटें लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य शहर में निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ स्ट्रीटलाइटों के रखरखाव को अधिक प्रभावी बनाना है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रस्तावित सीसीटीवी कैमरों को एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) के तहत रखा जाएगा। इससे कैमरों की नियमित सर्विसिंग सुनिश्चित करने और खराब होने की स्थिति में समय पर मरम्मत कराने में मदद मिलेगी। इसका मकसद यह है कि रखरखाव में देरी के कारण कैमरे लंबे समय तक बंद न रहें।

स्मार्ट स्ट्रीटलाइटें खुद पकड़ेंगी खराबी

योजना के तहत लगाई जाने वाली स्मार्ट स्ट्रीटलाइटें आधुनिक तकनीक से लैस होंगी। ये लाइटें अपने आप खराबी का पता लगा सकेंगी, जिससे संबंधित अधिकारियों को समय रहते मरम्मत कराने में मदद मिलेगी। इन स्ट्रीटलाइटों को इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम से जोड़ा जाएगा। इस सिस्टम के जरिए लाइटों की स्थिति पर नजर रखी जा सकेगी और तकनीकी खराबी सामने आने पर समय पर कार्रवाई करना आसान होगा।

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