पटना। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फर्जी दिव्यांग प्रमाणपत्र के जरिए दाखिला कराने वाले परीक्षा माफिया डॉ. रविशंकर सम्राट के काले कारनामों से जुड़े नए खुलासे सामने आए हैं। वह अभ्यर्थियों से 40 लाख से 50 लाख रुपए तक की वसूली करता था। पावापुरी मेडिकल कॉलेज में पढ़ाई के दौरान जालसाजी में लिप्त रविशंकर ने मधुप्रिया से शादी की और अपनी पत्नी को डॉक्टर बनाने की सनक में अपराध की सारी हदें पार कर दीं।

​सुनियोजित जालसाजी और फर्जीवाड़ा के चरण

​रविशंकर ने अपनी पत्नी मधुप्रिया को मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कराने के लिए लगातार कई हथकंडे अपनाए:

  • ​वर्ष 2023 का प्रयास: शादी से पहले रविशंकर ने मधुप्रिया का नीट यूजी फॉर्म भरवाया, जिसकी 7 मई 2023 को कंकड़बाग के शिवम कॉन्वेंट में परीक्षा हुई थी।
  • ​वर्ष 2024 में सॉल्वर का इस्तेमाल: मगध विश्वविद्यालय से बीएससी पास करने के बाद मधुप्रिया से प्रेम विवाह कर उसने उसकी जगह परीक्षा में दूसरी लड़की को बैठाया। धांधली की भनक लगने पर सीबीआई ने रिजल्ट होल्ड कर दिया था।
  • ​वर्ष 2026 में फर्जी जाति प्रमाणपत्र: आरक्षित कोटे का लाभ पाने के लिए पटना के संपतचक अंचल कार्यालय के नाम से फर्जी एससी जाति प्रमाणपत्र तैयार कराया गया, जबकि मधुप्रिया वास्तव में ओबीसी वर्ग से है। जांच में यह पूरी तरह जाली साबित हुआ।
  • ​सॉल्वर सिंडिकेट का पर्दाफाश: 3 मई 2026 की परीक्षा में पीएमसीएच छात्र सौरभ कुमार को एक लाख रुपए देकर पूनम कुमारी नामक सॉल्वर की व्यवस्था की गई। नवादा केंद्र पर बायोमेट्रिक मैनेज करने का प्रयास हुआ, लेकिन पेपर लीक से परीक्षा रद्द हो गई। री-नीट (21 जून) के दौरान लखीसराय में पूनम कुमारी सॉल्वर के रूप में रंगेहाथ पकड़ी गई, जिसके बाद रविशंकर फरार हो गया।

​प्रशासनिक जांच और दस्तावेजों की जब्ती

​आर्थिक अपराध इकाई (EOU) द्वारा सुनैना अपार्टमेंट और संध्या हाइट्स में की गई छापेमारी के दौरान मधुप्रिया के नाम से कई संदिग्ध कागजात बरामद किए गए। जब ईओयू ने संपतचक अंचलाधिकारी कार्यालय से प्रमाणपत्र की सत्यता की जांच की, तो वहां ऐसा कोई रिकॉर्ड नहीं मिला और दस्तावेज पूरी तरह फर्जी पाया गया।