किसान आत्महत्या मामला: जांच रिपोर्ट आई सामने, पिता ने पुलिस को दिया ये बयान…

चंद्रकांत देवांगन, दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के धमधा ब्लॉक के बोरी थाना क्षेत्र में एक किसान ने पेड़ पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. आत्मघाती कदम उठाने के पीछे की वजह साफ नहीं हो पाई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. लेकिन मृतक के पिता धनीराम ने इसी वर्ष बोरी सहकारी समिति से 50 हजार रुपए का कर्ज लिया है. धनीराम ने पुलिस को बताया कि घर बनाने के लिए उसने प्रेम लाल को 50 हजार दिए थे.

मिली जानकारी के मुताबिक मृतक किसान का नाम प्रेम लाल साहू (35 वर्ष), जो कि ग्राम डोमा का निवासी है. प्रेम लाल बुधवार की रात खाना खाने के बाद सो गया था. सुबह 5 बजे रोज की तरह खेत में काम करने निकला था, लेकिन गांव के ही भरत वर्मा के खेत में लगे बबूल के पेड़ पर उसका लटकता हुआ शव बरामद हुआ. घटना की सूचना गांव के पंच के माध्यम से बोरी थाना पुलिस को दी गई.

बोरी क्षेत्र के नायब तहसीलदार अखिलेश ने बताया कि जांच के दौरान मृतक के पिता धनीराम के द्वारा उन्हें दिए बयान में उल्लेखित किया है कि उसके पास कुल 9 एकड़ 38 डिसमिल खेत है. जिसमें से 6 एकड़ खेत 4 पुत्रों में बराबर डेढ़-डेढ़ एकड़ मौखिक रूप से बांट दी है. दस्तावेजों में विभाजन नहीं हुआ है. पहली बार धनीराम ने 50 हजार कर्ज लिया. धनीराम ने पुलिस को बताया कि घर बनाने के लिए उसने प्रेम लाल को 50 हजार दिए थे.

मृतक किसान के छोटे भाई संदीप ने बताया कि उसके बड़े भाई द्वारा आत्महत्या किए जाने के कारण सभी अचंभित हैं. उसके तीन छोटी छोटी बच्चियां हैं. एक 7वीं कक्षा में एक 4थीं कक्षा में और एक 8 माह की बच्ची है. जब की बोरी पुलिस ने बताया कि किसान द्वारा की गई आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है. उसकी पत्नी रामेश्वरी बाई (32 वर्ष) से भी बयान लिया गया है. जिस पर कोई कारण सामने नहीं आया है.

धमधा एसडीएम बृजेश सिंह क्षत्रिय ने बताया कि मृतक किसान प्रेम लाल साहू को मौखिक रूप से उसके पिता ने 1.30 एकड़ खेत दिया गया है. किसान का ग्रामीण बैंक में खाता है. जिसमें 1 हजार 150 रुपए जमा है. उसके द्वारा किसी भी सहकारी बैंक या सोसाइटी से कर्ज नहीं लिया गया था. आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है. अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण प्रज्ञा मेश्राम ने बताया कि किसान द्वारा आत्महत्या क्यों की गई, इसकी जांच की जा रही है. प्रारंभिक जांच में किसान के ऊपर कर्ज था यह स्पष्ट नहीं हो सका है.

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