यमन संकट और क्षेत्रीय तनाव के बीच मिस्र की संसद में सोमवार को सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने के प्रस्ताव पर मोहर लग गयी. मिस्र की संसद ने राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सिसी को सऊदी अरब की रक्षा के लिए सैन्य कदम उठाने की मंजूरी दे दी है. इस सैन्य सहायता की खास बात ये है कि यमन सऊदी की रक्षा तो करेगा मगर किसी देश पर हमला नहीं करेगा.

अब्देल फतह अल-सिसी ने संसद से मिस्र के खाड़ी अरब सहयोगी और दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक की रक्षा के लिए मिलिट्री सपोर्ट देने की मंजूरी मांगी थी.

मिस्र की संसद ने सोमवार को राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी को सऊदी अरब की रक्षा में मदद के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने की अनुमति दे दी. जिसके बाद से ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच चल रहे संघर्ष में और अधिक सीधे तौर पर शामिल हो सकता है.

मिस्र ने अक्सर खाड़ी देशों पर ईरान और ईरान-समर्थित हमलों की निंदा की है, लेकिन वह सार्वजनिक रूप से सीधे युद्ध में शामिल नहीं हुआ है. मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने इस बारे में कहा कि मिस्र की प्रस्तावित सैन्य पहल का उद्देश्य सऊदी अरब के क्षेत्र की रक्षा करना है, न कि यमन पर हमला करना. 

मिस्र के लिए सऊदी अरब एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है. सीसी के शासनकाल में, सऊदी अरब ने मिस्र को अरबों की सहायता दी है. यमन में युद्ध 2014 में शुरू हुआ था. मिस्र के राष्ट्रपति फतह अल सिसी ने पिछले हफ्ते संसद के सामने प्रस्ताव रखा था कि क्या उनके देश को सऊदी अरब की मदद करनी चाहिए. सऊदी अरब, मिस्र का बड़ा साझेदार है.

मिस्र की संसद काहिरा ने राष्ट्रपति अल-सिसी के प्रस्ताव को बहुमत से हरी झंडी दिखा दी है. मिस्र के स्थानीय मीडिया के मुताबिक, सोमवार को संसद ने सऊदी अरब की सहायता करने की मंजूरी दे दी. इस अनुमति के बाद सऊदी अरब, यमन और ईरान में चल रहा विवाद बड़े दायरे में फैल सकता है.

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