पटना‌। बिहार के परिवहन विभाग में तैनात मोबाइल सब-इंस्पेक्टर अमित कुमार गुप्ता की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। बुधवार सुबह आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में उनके कई ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई आरा और पटना में स्थित उनके आवासों पर चल रही है, जहां अधिकारी दस्तावेजों और संपत्तियों की बारीकी से जांच कर रहे हैं।

​कहां-कहां चल रही है रेड?

​आर्थिक अपराध इकाई की टीमों ने दो प्रमुख ठिकानों को एक साथ खंगाला है:

  • ​आरा: शहर के पॉश अवधपुरी इलाके में स्थित एक तीन मंजिला मकान पर सुबह-सुबह EOU की टीम पहुंची और पूरे परिसर को अपने कब्जे में ले लिया।
  • ​पटना: जिले के दानापुर क्षेत्र के आंसुपुर स्थित फ्लैट नंबर 609 पर भी EOU की एक अन्य टीम लगातार जांच-पड़ताल कर रही है।

​आय से 150 प्रतिशत अधिक संपत्ति का आरोप

​जांच एजेंसी के अनुसार, सब-इंस्पेक्टर अमित कुमार गुप्ता पर उनकी वैध आय से करीब 1 करोड़ 49 लाख रुपये से अधिक की संपत्ति अर्जित करने का गंभीर आरोप है। यह अनुपात उनकी ज्ञात आय के स्रोतों से लगभग 150 प्रतिशत से भी ज्यादा बैठता है। बताया जा रहा है कि छापेमारी के दौरान जब टीम घर पहुंची, तो शुरुआती हलचल के बीच कुछ कागजात घर से बाहर फेंके जाने की चर्चा रही, जिन्हें सुरक्षा के मद्देनजर जब्त कर लिया गया है। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

​चल-अचल संपत्तियों का ब्योरा

​स्थानीय सूत्रों और शुरुआती जानकारी के अनुसार, अधिकारी कई अन्य संपत्तियों की भी टोह ले रहे हैं:

  • ​कोइलवर इलाके में सब-इंस्पेक्टर के नाम पर 12 कट्ठा जमीन होने की बात सामने आ रही है।
  • ​आरा शहर में ही 2.6 कट्ठा जमीन पर आलीशान मकान का निर्माण कराया जा रहा है।
  • ​इसके अलावा, परिसर में खड़ी एक इलेक्ट्रिक कार और वित्तीय लेन-देन के सभी रिकॉर्ड्स की गहनता से जांच की जा रही है।

​2014 बैच के हैं अधिकारी, परिवार में कौन-कौन?

​अमित कुमार गुप्ता वर्ष 2014 बैच के मोबाइल सब-इंस्पेक्टर हैं और वर्तमान में भभुआ जिले में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी, एक बेटा और एक बेटी हैं। उनकी बेटी मेडिकल की पढ़ाई (MBBS) कर रही है, जबकि बेटा स्कूली छात्र है। इसके अलावा, उनके छोटे भाई सीआरपीएफ में कमांडेंट के पद पर देश की सेवा कर रहे हैं।
​फिलहाल, EOU की तलाशी अभियान और छापेमारी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही बरामद दस्तावेजों, बेनामी संपत्तियों और वित्तीय लेन-देन से जुड़ा विस्तृत आधिकारिक आंकड़ा सामने आ पाएगा।