पंकज श्रीवास्तव, छपरा। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में हुई मूसलाधार बारिश का असर अब बिहार के सारण जिले में साफ तौर पर दिखने लगा है। गंडक नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ गया है, जिससे इस सीजन में दूसरी बार सारण वासियों के सामने भीषण बाढ़ का संकट खड़ा हो गया है। नदी के बढ़ते जलस्तर और भारी दबाव के कारण आज सारण जिले के मकेर प्रखंड अंतर्गत बाघा कोल और हैजलपुर इलाकों में तटबंध टूट गया। तटबंध के टूटने से दर्जनों गांवों और निचले इलाकों में बाढ़ का पानी तेजी से फैल गया है, जिससे स्थानीय जनजीवन और मवेशी पूरी तरह से प्रभावित हो चुके हैं।

​जिला प्रशासन की शुरुआती तैयारियां और निरीक्षण

​बाढ़ के संभावित खतरे को भांपते हुए सारण जिला प्रशासन की ओर से पहले से ही एहतियाती कदम उठाए जा रहे थे। जिला प्रशासन द्वारा तटबंधों की सुरक्षा और मजबूती के लिए लगातार कार्य किए जा रहे थे। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव और वरीय पुलिस अधीक्षक (SSP) रोशन कुमार खुद लगातार इन संवेदनशील तटबंधों का मैराथन निरीक्षण कर रहे थे ताकि किसी भी संभावित खतरे से समय रहते निपटा जा सके।

​पानी के भारी दबाव से हुआ तटबंध क्षतिग्रस्त

​प्रशासनिक स्तर पर पूरी चौकसी बरती जा रही थी, लेकिन पानी का बहाव और दबाव इतना अधिक था कि तटबंध उसे रोक नहीं पाया। पहले तटबंध में एक छोटी सी दरार पड़ी, जो देखते ही देखते विकराल रूप धारण कर गई और तटबंध का एक बड़ा हिस्सा टूट गया। तटबंध के कटने से बाढ़ का पानी अनियंत्रित होकर दर्जनों नए गांवों में घुस गया। इस आपदा के कारण खेतों में खड़ी फसलें नष्ट हो गई हैं और लोग अपने घरों तथा मवेशियों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

​युद्ध स्तर पर मरम्मत और राहत कार्य जारी

​घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन के तमाम वरीय अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर पहुंच गए। प्रशासन की प्राथमिकता इस समय युद्ध स्तर पर टूटे हुए तटबंध को दुरुस्त करने और पानी के बहाव को रोकने की है। इसके साथ ही, प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्यों को पूरी तेजी से शुरू कर दिया गया है। एनडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें प्रभावित गांवों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्रियां पहुंचाने के काम में जुटी हुई हैं। स्थिति पर लगातार उच्च स्तर से नजर रखी जा रही है।