अभय मिश्रा, मऊगंज। फाइलों में योजनाएं शत-प्रतिशत पूरी हो जाती हैं, लेकिन जमीन पर उतरते ही भ्रष्टाचार का ढांचा पहली ही बारिश या टेस्टिंग में ढह जाता है। मऊगंज के नईगढ़ी विकासखंड में ‘जल जीवन मिशन’ के नाम पर जनता के खून-पसीने के 3.85 करोड़ कैसे ठिकाने लगाए गए, इसकी बानगी खटखरी गांव में देखने को मिली। जहां नव-निर्मित पानी की टंकी पहली ही टेस्टिंग में ताश के पत्तों की तरह ढह गई। सामाजिक कार्यकर्ता कुंजबिहारी तिवारी की शिकायत पर 6 महीने तक चली जांच के बाद अब EOW यानी आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने PHE के बड़े अधिकारियों और ठेकेदार पर FIR दर्ज कर ली है। आखिर कागजों में जल बहाकर सरकारी खजाने पर डाका डालने का यह पूरा खेल क्या है और कैसे खुली इस सिस्टम की पोल…

मामले की शुरुआत होती है वर्ष 2021 से… जल जीवन मिशन के तहत मऊगंज जिले के नईगढ़ी विकासखंड में घर-घर साफ पानी पहुंचाने का प्रोजेक्ट पास हुआ। तय शेड्यूल के मुताबिक, यह काम 9 महीने के भीतर पूरा होना था। योजना में पानी की टंकी, पाइपलाइन, पंप हाउस, सबमर्सिबल मोटर और हर घर तक नल कनेक्शन दिया जाना था। लेकिन तय समय बीतने के बाद भी पानी तो नहीं पहुंचा, हां-अफसरों और ठेकेदार की जुगलबंदी से ठेकेदार को 3 करोड़ 85 लाख 900 रुपये का भारी-भरकम भुगतान ज़रूर कर दिया गया। भुगतान पूरा होने के बाद जब जमीनी हकीकत का ऑडिट हुआ, तो भ्रष्टाचार के एक-एक कर कई परतें उधड़ती चली गईं।

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  • खटखरी गांव: यहां नवनिर्मित पानी की टंकी में जब पहली बार टेस्टिंग के लिए पानी भरा गया, तो घटिया निर्माण के चलते पूरी टंकी भरभरा कर गिर गई।
  • करह उर्फ खैरागढ़: कागजों पर 5 मोटर पंप दर्ज थे, लेकिन मौके पर सिर्फ 1 सबमर्सिबल मोटर मिली। 740 घरेलू कनेक्शन का दावा पूरी तरह फर्जी निकला, क्योंकि किसी घर में नल की फिटिंग ही नहीं थी।
  • शिवराजपुर व जुड़मनिया रघुनाथ: शिवराजपुर में ओवरहेड टैंक और सम्पवेल सालों बाद भी अधूरे पड़े हैं। वहीं जुड़मनिया रघुनाथ में मुख्य पाइपलाइन आधे गांव में ही बिछाकर बजट डकार लिया गया।

नतीजा यह हुआ कि 5 साल बीत जाने के बाद भी गांव के लोग बूंद-बूंद पानी को तरस रहे हैं। घटिया निर्माण और सरकारी धन की खुली लूट की इस शिकायत को जब सामाजिक कार्यकर्ता कुंजबिहारी तिवारी ने उठाया, तो EOW ने मामले की प्राथमिक जांच की। 6 महीने की जांच में आरोप सही पाए जाने पर EOW ने शिकंजा कस दिया है।

EOW ने इन पर किया केस दर्ज

इओडब्ल्यू ने मामले में तत्कालीन कार्यपालन यंत्री (EE) जे.पी. द्विवेदी, सहायक यंत्री (AE) संजय पाण्डेय, उपयंत्री (Sub-Engineer) ए.पी. तिवारी और ठेकेदार शिवेंद्र कुमार तिवारी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। अब EOW की विवेचना यह तय करेगी कि फर्जी भुगतानों की इस काली कमाई में किसकी कितनी हिस्सेदारी थी।

खटखरी में ताश के पत्तों की तरह ढही टंकी दरअसल घटिया तंत्र और बेलगाम भ्रष्टाचार का प्रतीक है। EOW की FIR से आरोपी अफसरों और ठेकेदार के पसीने छूट रहे हैं, लेकिन असली सवाल अब भी वही है- कि कागजों पर पानी बहाने वाले इन गुनहगारों से वसूली कब होगी? और क्या मऊगंज के प्यासे ग्रामीणों के नलों में कभी वाकई पानी आ पाएगा?

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