अभय मिश्रा, मऊगंज। बिहार में पुल गिरने की खबरें तो आपने बहुत सुनी होंगी, लेकिन आज हम आपको मध्य प्रदेश के मऊगंज से भ्रष्टाचार की एक ऐसी ‘वाटरप्रूफ’ कहानी बताने जा रहे हैं, जिसे जानकर आप दंग रह जाएंगे। जल जीवन मिशन के तहत करोड़ों की लागत से बनी 30 फीट ऊंची पानी की टंकी कल रात मिट्टी के ढेर में तब्दील हो गई। चौंकाने वाली बात यह है कि विधानसभा में इस काम को कागजों पर ‘पूरा’ बता दिया गया था, लेकिन जैसे ही इस टंकी ने पहली बार पानी का बोझ सहा, भ्रष्टाचार की नींव डगमगा गई और पूरी टंकी भरभरा कर गिर गई।
उद्घाटन से पहले जमींदोज
दरअसल, मऊगंज जिले की जनपद पंचायत नईगढ़ी का ग्राम पंचायत खटखरी में कल रात एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया। जल जीवन मिशन के तहत बनी यह 30 फीट ऊंची टंकी भ्रष्टाचार की ऐसी भेंट चढ़ी कि उद्घाटन से पहले ही जमींदोज हो गई।
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मौत करीब थी, लेकिन किस्मत मेहरबान रही
टंकी के ठीक बगल में एक जेसीबी चालक सो रहा था, जो बाल-बाल बच गया। सरपंच सुरेश कुमार जायसवाल की मानें तो टंकी में लीकेज था, जिसे सुधारने के बाद कल रात टेस्टिंग के लिए पानी भरा गया था। लेकिन ठेकेदार और इंजीनियरों की मिलीभगत देखिए…30 फीट ऊंचे ढांचे को खड़ा करने के लिए महज 8 एमएम के पतले सरियों का इस्तेमाल किया गया! सवाल यह है कि जब कलेक्टर से लेकर मंत्रालय तक इसकी शिकायतें की गई थीं, तो जांच में क्या निकला? विधानसभा में झूठ क्यों बोला गया कि कार्य पूर्ण हो चुका है ?
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जांच के नाम पर मलबे में दबेगी फाइल या होगी कार्रवाई ?
मऊगंज में 50 करोड़ से ज्यादा के प्रोजेक्ट्स को पूरा दिखाकर जनता की आंखों में धूल झोंकी जा रही है, जबकि हकीकत आपके सामने मलबे के रूप में बिखरी पड़ी है। यह घटना सिर्फ एक टंकी का गिरना नहीं है, बल्कि उस तंत्र का गिरना है जो जनता के टैक्स के पैसे को अपनी जेबों में भर रहा है। क्या अब उन अधिकारियों और ठेकेदारों पर कार्रवाई होगी, जिन्होंने 8mm के सरिए पर जनता की जान दांव पर लगा दी? या फिर एक और जांच के नाम पर इस मलबे को भी फाइलों में दबा दिया जाएगा?

