Automobile desk: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) उद्योग का ग्राफ काफी तेजी से ऊपर चढ़ रहा है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र देश के भीतर रोजगार सृजन का एक प्रमुख आधार बनकर उभरने वाला है। प्रसिद्ध टैलेंट और स्टाफिंग समाधान कंपनी एडिको इंडिया (Adecco India) के हालिया अध्ययन के अनुसार, वर्ष 2030 तक देश के ईवी उद्योग में करीब 3 से 4 करोड़ नए नौकरियों के अवसर तैयार होने की प्रबल संभावना है। बाजार में इलेक्ट्रिक वाहनों की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए इस क्षेत्र की सालाना भर्तियों में 15 से 20 प्रतिशत की निरंतर वृद्धि दर्ज की जा सकती है।

कारों तक सीमित नहीं रहा ईवी उद्योग
वर्तमान में इलेक्ट्रिक वाहनों का दायरा केवल व्यक्तिगत कारों तक सीमित नहीं रह गया है। टू-व्हीलर्स, कमर्शियल फ्लीट, सार्वजनिक बस परिवहन और लॉजिस्टिक्स में भी इलेक्ट्रिक वाहनों का उपयोग तेजी से बढ़ा है। यही कारण है कि यह पूरा उद्योग अब महज वाहन असेंबलिंग तक सीमित न होकर बैटरी मैन्युफैक्चरिंग, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, कंपोनेंट इलेक्ट्रॉनिक्स, मोटर डिजाइनिंग और रीसाइक्लिंग जैसे बहुआयामी क्षेत्रों में तब्दील हो रहा है। करीब 100 से अधिक कंपनियों के आंकड़ों और फीडबैक पर आधारित यह रिपोर्ट दर्शाती है कि आने वाले समय में असेंबली लाइन पर काम करने वाले मैन्युअल वर्कफोर्स के अलावा स्किल्ड इंजीनियर्स, सेमीकंडक्टर विशेषज्ञों, एनर्जी सिस्टम एक्सपर्ट्स और पावर इलेक्ट्रॉनिक्स के पेशेवरों की मांग में अभूतपूर्व उछाल आएगा।
90% तक नौकरियां अप्रत्यक्ष रूप से मिलेंगी
रोजगार के इन कुल अवसरों में से 10 से 15 प्रतिशत नौकरियां प्रत्यक्ष (Direct Jobs) रूप से ईवी मैन्युफैक्चरिंग और कोर कंपनियों में मिलेंगी। वहीं 85 से 90 प्रतिशत नौकरियां अप्रत्यक्ष (Indirect Jobs) रूप से सप्लाई चेन मैनेजमेंट, आफ्टर-सेल्स सर्विस, चार्जिंग स्टेशनों के रखरखाव, लॉजिस्टिक्स और संबद्ध उद्योगों के माध्यम से पैदा होंगी। करियर की शुरुआत के लिहाज से देखें तो शुरुआती चरण में लगभग 40 से 50 प्रतिशत नियुक्तियां फ्लेक्सी-स्टाफिंग या कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर हो सकती हैं, जो आगे चलकर उम्मीदवारों के प्रदर्शन और अनुभव के आधार पर स्थायी (Permanent) रोल्स में तब्दील हो जाएंगी।
इंडिया में ईवी नीतियों से मजबूत हो रही ईवी सेक्टर
एडिको इंडिया के लीडरशिप के अनुसार, वैश्विक पैसेंजर ईवी बाजार में भारत का योगदान फिलहाल लगभग 4 प्रतिशत है, जबकि इलेक्ट्रिक दोपहिया सेगमेंट में भारत की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार की ‘मेक इन इंडिया’ पहल और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा लागू की जा रही नई ईवी नीतियों से इस सेक्टर की रीढ़ मजबूत हो रही है। यदि देश में मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी और स्किल्ड मैनपावर का सही तालमेल बनता है, तो भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रमुख केंद्र बन सकता है।
बैटरी रीसाइक्लिंग और चार्जिंग सेक्टर में तेजी से उछाल
ईवी उद्योग के भीतर कुछ विशिष्ट सेगमेंट बहुत तेजी से उभर रहे हैं। बैटरी रीसाइक्लिंग उद्योग ने बीते कुछ वर्षों में लगभग 55 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (CAGR) प्रदर्शित की है। इसके अतिरिक्त, देश भर में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार को देखते हुए आगामी एक दशक में इस क्षेत्र में 45 प्रतिशत तक नए तकनीकी टैलेंट की आवश्यकता होगी। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा मिलने से न केवल नए अवसर तैयार होंगे, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर भारत की निर्भरता घटेगी, ऊर्जा सुरक्षा सुदृढ़ होगी और देश के दीर्घकालिक नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्यों को हासिल करने में भी बड़ी मदद मिलेगी।
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