अमेरिका और इजरायल ने जबसे ईरान पर अटैक किया है, पूरी दुनिया मुसीबत में आ गई है. अमेरिकी सबमरीन ने जबसे श्रीलंका के तट पर ईरानी वॉरशिप IRIS डेना को सबमरीन अटैक में तबाह किया है, तबसे भारतीय उपमहाद्वीप में भी खलबली मची हुई है. अब विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक ऐसी बात का खुलासा किया है, जिससे नई दिल्‍ली और तेहरान के पुख्‍ता रिश्‍तों का अंदाजा लगाया जा सकता है. अमेरिकी सबमरीन ने श्रीलंका के तट पर तीसरा ईरानी वॉरशिप IRIS डेना को तबाह कर आग में घी डालने का काम कर दिया. IRIS Lavan को कोच्चि के बंदरगाह पर शेल्‍टर दिया गया. दूसरे शिप को श्रीलंका ने त्रिंकोमाली पोर्ट पर एंकर होने की अनुमति दे दी.

पेट्रोल-डीजल और LPG के सप्‍लाई चेन के बाधित होने से अफरा-तफरी का आलम है. चौंकाने वाली बात यह है कि वेस्‍ट एशिया में जब तनाव बढ़ा तो ईरान के 3 वारशिप इस क्षेत्र में मौजूद थे. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने IRIS Lavan के बचने की अनसुनी कहानी बताई है. भारत के कदम से न केवल IRIS Lavan अमेरिकी पनडुब्‍बी के संभावित हमले से बचा, बल्कि उसपर सवार दर्जनों कैडेट की जान भी बच गई. फिलहाल यह वॉरशिप और ईरानी कैडेट भारत में सुरक्षित हैं.

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत ने तकनीकी समस्या में फंसे एक ईरानी जहाज को मानवीय आधार पर मदद प्रदान की और उसे भारतीय बंदरगाह पर आने की अनुमति दी. जयशंकर के अनुसार, ईरान की ओर से भारत को संदेश मिला था कि उनका एक जहाज (जो उस समय भारतीय जलक्षेत्र के सबसे नजदीक था) तकनीकी दिक्कतों का सामना कर रहा है और भारतीय बंदरगाह में आने की अनुमति चाहता है. उन्होंने बताया कि यह संदेश करीब 28 तारीख के आसपास प्राप्त हुआ था, जिसके बाद 1 मार्च को भारत सरकार ने जहाज को भारतीय बंदरगाह में आने की अनुमति दे दी. इसके कुछ दिनों बाद जहाज कोच्चि पोर्ट पहुंचा, जहां वह फिलहाल खड़ा है. विदेश मंत्री ने बताया कि जहाज पर कई युवा कैडेट भी सवार थे, जिन्हें सुरक्षित रूप से उतार लिया गया है और उन्हें पास के एक सुरक्षित स्थान पर रखा गया है।

जयशंकर ने कहा कि ये जहाज पहले एक फ्लीट रिव्यू में हिस्सा लेने के लिए आए थे, लेकिन बाद में क्षेत्रीय परिस्थितियां बदलने के कारण वे कठिन स्थिति में फंस गए. उन्होंने बताया कि एक अन्य जहाज श्रीलंका पहुंच गया, जबकि दुर्भाग्यवश एक जहाज रास्ते में ही डूब गया. विदेश मंत्री ने कहा कि भारत ने पूरे मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखा और परिस्थितियों के अनुसार हर संभव सहायता प्रदान की.

जयशंकर ने बताया कि हाल के दिनों में जिन टैंकरों पर हमले हुए हैं, उनमें से दो जहाजों पर भारतीय नागरिकों की मौत भी हुई है. उन्होंने कहा कि मर्चेंट मरीन में काम करने वाले भारतीयों की सुरक्षा को लेकर देश में और गंभीरता से चर्चा किए जाने की जरूरत है, क्योंकि यह केवल समुद्री व्यापार ही नहीं बल्कि भारतीय नागरिकों की सुरक्षा से जुड़ा मामला है.

विदेश मंत्री ने यह भी बताया कि खाड़ी क्षेत्र में करीब 90 लाख से एक करोड़ भारतीय रहते हैं. इसलिए उनकी सुरक्षा, भलाई और हितों की रक्षा भारत की विदेश नीति तय करने में अहम भूमिका निभाती है. उन्होंने कहा कि यही कारण है कि पिछले दो वर्षों से जब हूती विद्रोही जहाजों पर हमले कर रहे थे, तब भारत ने उत्तरी अरब सागर में अपनी नौसेना तैनात कर समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने का कदम उठाया.

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m