हेमंत शर्मा, इंदौर। शहर में लोन प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही और धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। एक महिला को तब झटका लगा जब उसने दोबारा लोन के लिए आवेदन किया और पता चला कि उसके नाम पर पहले से ही 40 हजार रुपये का लोन चल रहा है। हैरानी की बात यह थी कि महिला ने कभी ऐसा कोई लोन लिया ही नहीं था। शिकायत के बाद इंदौर क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की तो पूरे मामले का चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

लोन नहीं मिला, दोबारा आवेदन किया तो खुली पोल

पुलिस के अनुसार अमरीन बाग नाम की महिला ने कुछ समय पहले लोन के लिए आवेदन किया था, लेकिन उनका लोन स्वीकृत नहीं हुआ। बाद में जब उन्होंने फिर से लोन लेने की कोशिश की तो रिकॉर्ड में उनके नाम पर पहले से 40 हजार रुपये का लोन सक्रिय मिला। यह जानकारी सामने आते ही महिला ने मामले की शिकायत की, जिसके बाद क्राइम ब्रांच ने जांच शुरू की।

जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही

क्राइम ब्रांच की जांच में पता चला कि अमरीन बाग और अमरीन खान नाम की दो अलग-अलग महिलाओं के नामों में एक जैसे होने के कारण पूरे मामले में गड़बड़ी हुई। आरोप है कि लोन स्वीकृत करने के दौरान जरूरी दस्तावेजों और पहचान की सही तरीके से जांच नहीं की गई। इसी का फायदा उठाकर अमरीन खान के नाम पर लोन जारी कर दिया गया, जबकि रिकॉर्ड में दूसरी महिला का नाम जुड़ गया।

बैंक मैनेजर पर गंभीर सवाल

पुलिस का कहना है कि लोन स्वीकृत करने से पहले संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी होती है कि वह आवेदक की पहचान, दस्तावेज, फोटो और अन्य जरूरी जानकारियों का सत्यापन करे। लेकिन इस मामले में यह प्रक्रिया पूरी तरह संदिग्ध नजर आई। आरोप है कि आरोहण फाइनेंस कंपनी के मैनेजर दिलीप यादव ने आवश्यक सत्यापन किए बिना ही लोन मंजूर कर दिया।

दो आरोपी गिरफ्तार

मामले में कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच ने कस्टमर सर्विस रिप्रेजेंटेटिव राहुल पोरवाल और आरोहण फाइनेंस कंपनी के मैनेजर दिलीप यादव को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह केवल लापरवाही का मामला है या फिर इसके पीछे कोई संगठित धोखाधड़ी का नेटवर्क काम कर रहा था।

फर्जी लोन के और मामले भी आ सकते हैं सामने

क्राइम ब्रांच को आशंका है कि यह मामला सिर्फ एक महिला तक सीमित नहीं हो सकता। प्रारंभिक जांच में कई ऐसे बिंदु सामने आए हैं जिनसे संकेत मिल रहे हैं कि अन्य लोगों के नाम पर भी इसी तरह फर्जी या संदिग्ध तरीके से लोन जारी किए गए हो सकते हैं। इसी वजह से पुलिस अब पुराने रिकॉर्ड और लोन फाइलों की भी जांच कर रही है।

सवालों के घेरे में लोन कंपनियों की जांच प्रक्रिया

इस मामले ने एक बार फिर लोन कंपनियों की वेरिफिकेशन पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि नाम की समानता के आधार पर बिना पर्याप्त जांच के लोन स्वीकृत हो सकते हैं, तो आम लोगों की पहचान और वित्तीय सुरक्षा पर गंभीर खतरा पैदा हो सकता है। फिलहाल क्राइम ब्रांच पूरे मामले की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।

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