कुंदन कुमार, पटना। बिहार के गृह विभाग ने राजधानी पटना में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में राज्य की कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिस आधुनिकीकरण का विस्तृत लेखा-जोखा पेश किया। इस उच्चस्तरीय प्रेस वार्ता में डीजीपी विनय कुमार, एडीजी लॉ एंड ऑर्डर केएस अनुपम, एडीजी मुख्यालय सुनील कुमार, गृह सचिव प्रणव कुमार और गृह विभाग के स्पेशल सेक्रेटरी क्षेत्रनील सिंह मौजूद रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बिहार में अपराध ग्राफ लगातार नीचे आ रहा है और पुलिस बल को आधुनिक व सशक्त बनाया जा रहा है।

​अपराध के आंकड़ों में भारी गिरावट

​गृह विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य में गंभीर अपराधों पर काफी हद तक लगाम लगी है:

  • ​हत्या के मामलों में 10.1 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।
  • ​डकैती की घटनाओं में 31.32 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।
  • ​दंगों के मामलों में 18.97 प्रतिशत की कमी आई है।

डीजीपी विनय कुमार ने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि जहां कभी साल में करीब 15,000 दंगे होते थे, वहीं अब यह आंकड़ा घटकर मात्र 100 के करीब रह गया है। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में हत्या के ज्यादातर मामले प्रेम प्रसंग, जमीन विवाद और पारिवारिक कलह जैसे सामाजिक कारणों से जुड़े हैं।

​नक्सलमुक्त हुआ बिहार और उग्रवाद प्रभावित जिलों का विकास

​कड़े नक्सल विरोधी अभियानों के परिणामस्वरूप अब बिहार का एक भी जिला उग्रवाद प्रभावित नहीं बचा है। वर्ष 2005 से पहले की स्थिति को खतरनाक बताते हुए डीजीपी ने याद दिलाया कि तब नक्सली किस हद तक हावी थे और मुंगेर के एसपी तक नक्सली हिंसा का शिकार हो चुके थे। अब नक्सलमुक्त हो चुके इन क्षेत्रों को पर्यटन, शिक्षा और उद्योगों के माध्यम से विकसित करने की योजना पर तेजी से काम किया जा रहा है।

​पुलिस बल का विस्तार और बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण

​राज्य में पुलिसिंग को मजबूत करने के लिए बड़े पैमाने पर भर्तियां और इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है:

  • ​पिछले डेढ़ साल में 22,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती की जा चुकी है।
  • ​26,574 नए पदों पर बहाली की प्रक्रिया सुचारू रूप से चल रही है, जो आगामी एक साल के भीतर पूरी हो जाएगी।
  • ​कुल मिलाकर अगले डेढ़ साल में 50,000 से अधिक पुलिसकर्मियों की भर्ती होगी।
  • ​डेढ़ साल के भीतर 600 नए थाना भवनों का निर्माण कार्य प्रगति पर है।
  • ​172 करोड़ रुपये की लागत से डायल 112 सेवा के लिए मजबूत बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है।
  • ​पटना में पुलिस साइबर सेल के लिए एक विशाल और विस्तृत भवन का निर्माण किया जाएगा।

​नशाखोरी और ह्यूमन ट्रैफिकिंग पर चिंता

​युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले रहे नशे के कारोबार पर चिंता व्यक्त करते हुए डीजीपी ने कहा कि इससे निपटना सिर्फ पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह एक सामाजिक चुनौती है। नेपाल, पूर्वोत्तर और अन्य बाहरी राज्यों से ट्रकों के ट्रक गांजा और ड्रग्स की सप्लाई हो रही है, जिस पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इसके अलावा, बच्चों की चोरी और ह्यूमन ट्रैफिकिंग की बढ़ती घटनाओं पर उन्होंने कहा कि गरीबी और अशिक्षा इसके मूल कारण हैं, जिन्हें दूर करने के लिए समाज को भी अपनी सहभागिता निभानी होगी।

​बिहार पुलिस को पहली बार ‘प्रेसिडेंट कलर्स अवार्ड’ और वीरता पुरस्कार

​बिहार पुलिस के इतिहास में एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ने जा रही है। उत्तर प्रदेश को यह प्रतिष्ठित सम्मान वर्ष 1954 में ही मिल चुका था, लेकिन बिहार को पहली बार ‘प्रेसिडेंट कलर्स अवार्ड’ से सम्मानित किया जाएगा।
​इसके साथ ही, इस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर वीरता के लिए बिहार के 18 पुलिसकर्मियों को सम्मानित किया जाएगा। इनमें सिपाही और हवलदार वर्ग के जवानों की संख्या सबसे अधिक है, साथ ही एक महिला एसपी, डीएसपी और आईजी रैंक के अधिकारी को भी इस सम्मान के लिए चुना गया है।

​भरत तिवारी मामले पर न्यायिक जांच जारी

​प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान चर्चित भरत तिवारी मामले पर बोलते हुए डीजीपी विनय कुमार ने स्पष्ट किया कि इस घटना की न्यायिक जांच चल रही है। जिन पुलिसकर्मियों ने जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग किया है और जो अन्य पुलिसकर्मी इसमें शामिल पाए जाएंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने दोहराया कि कानून में एके-47 चलाना वर्जित है, और इस घटना में संलिप्त पाए गए संबंधित पुलिसकर्मी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है।