कुंदन कुमार, पटना। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश कार्यालय में आज ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस गरिमामयी और गंभीर आयोजन में प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता बड़ी संख्या में मौजूद रहे। इस दौरान देश के इतिहास के उस काले पन्ने को याद किया गया जब भारत का विभाजन हुआ था और अनगिनत लोगों को अपनी मातृभूमि से विस्थापित होना पड़ा था।
देश के बंटवारे के दर्द को किया गया याद
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि आज का दिन हमारे देश के इतिहास का सबसे दर्दनाक और संवेदनशील दिन है। आज ही के दिन हमारा अखंड भारत दो हिस्सों में विभक्त हुआ था। इसी त्रासदी की याद में और उन तमाम लोगों के संघर्ष व बलिदान को समर्पित करते हुए हम इस दिन को ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ के रूप में मनाते हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश के विभाजन के दौरान जो दर्द और पीड़ा लोगों ने सही है, उसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।
स्वतंत्रता संग्राम के युवा बलिदानियों को नमन
अपने संबोधन के दौरान प्रदेश अध्यक्ष ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को भी गहराई से याद किया। उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में कम उम्र के युवाओं और सेनानियों ने जिस अदम्य साहस का परिचय दिया और अपना सर्वस्व बलिदान कर दिया, वह आज भी हम सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है। उस दौर के युवा देश की आन-बान और शान के लिए अपनी जान की परवाह किए बिना हर परिस्थिति का मुकाबला करने को हमेशा तैयार रहते थे।
आज की जेन जी पीढ़ी को राष्ट्रवाद का पाठ
आज की युवा पीढ़ी (जेन जी) का जिक्र करते हुए संजय सरावगी ने कहा कि उस दौर के युवा आज की पीढ़ी की तुलना में कहीं अधिक राष्ट्रवादी हुआ करते थे। उन्होंने आज के युवाओं को स्वतंत्रता सेनानियों और उस दौर के बलिदानियों के जीवन से सीख लेने की सलाह दी। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि आज की ‘जेन जी’ पीढ़ी को राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए इतिहास के पन्नों से प्रेरणा लेनी चाहिए, क्योंकि जो युवा देश के लिए कुछ भी कर गुजरने का जज्बा रखते हैं, वही देश के भविष्य को सुरक्षित और मजबूत बना सकते हैं।
यह कार्यक्रम न केवल देश के विभाजन के दर्द को याद करने का माध्यम बना, बल्कि वर्तमान पीढ़ी को राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना से जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी साबित हुआ।


