पटना। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद संजय झा ने कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता तेजस्वी यादव पर तीखा राजनीतिक प्रहार किया है। राहुल गांधी द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश की विदेश नीति पर दिए गए बयानों पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए संजय झा ने उन्हें अपने संवैधानिक पद की मर्यादा का ध्यान रखने की नसीहत दी है। इसके साथ ही उन्होंने बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम और फरक्का संधि के मुद्दे पर भी पार्टी का स्पष्ट और कड़ा रुख सामने रखा है।

​राहुल गांधी की भाषा और शैली पर उठाए गंभीर सवाल

​संजय झा ने राहुल गांधी के बयानों की आलोचना करते हुए कहा कि एक महत्वपूर्ण और संवैधानिक पद पर आसीन नेता को अपनी बात हमेशा जिम्मेदारी के साथ रखनी चाहिए। उन्होंने तीखे शब्दों में कहा कि राहुल गांधी का आचरण इस समय सही नहीं दिख रहा है और बिहार की आम भाषा में कहें तो उनका व्यवहार एक ‘लफुआ’ की तरह प्रतीत हो रहा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि देश के शीर्ष नेतृत्व और विदेश नीति जैसे संवेदनशील विषयों पर बयान देते समय राजनीतिक परिपक्वता और शालीनता का पूरी तरह पालन किया जाना चाहिए।

​तेजस्वी यादव की पार्ट टाइम पॉलिटिक्स पर तंज

​राजद नेता तेजस्वी यादव द्वारा 19 अगस्त को एके-47 से जुड़े एक मामले को लेकर राजभवन मार्च किए जाने के ऐलान पर भी संजय झा ने जोरदार पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि तेजस्वी यादव केवल पार्ट टाइम पॉलिटिक्स यानी अंशकालिक राजनीति करते हैं, जबकि वे पूर्णकालिक सक्रिय नेता नहीं हैं।
​संजय झा ने तंज कसते हुए कहा कि जब बिहार में विभिन्न मुद्दों पर राजनीतिक हलचल और हंगामे की स्थिति थी, तब तेजस्वी यादव देश से बाहर विदेश में छुट्टियां मना रहे थे। अब जब वे राजनीतिक दौड़ में काफी पीछे छूट चुके हैं, तो सुर्खियों में बने रहने के लिए इस तरह के मुद्दों पर राजनीति करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने तेजस्वी को सलाह दी कि केवल राजनीतिक रोटियां सेकने के बजाय उन्हें उन गंभीर मुद्दों पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, जिनका सामना आज बिहार के आम छात्र कर रहे हैं।

​फरक्का संधि पर जदयू का सख्त रुख: केंद्र से की बड़ी मांग

​पार्टी के आधिकारिक रुख को स्पष्ट करते हुए संजय झा ने फरक्का संधि का मुद्दा मजबूती से उठाया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि जदयू इस संवेदनशील विषय पर किसी भी हद तक जाने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने केंद्र सरकार से मांग की है कि इस साल दिसंबर के महीने में समाप्त हो रही फरक्का संधि को किसी भी कीमत पर आगे न बढ़ाया जाए।
​संजय झा ने आरोप लगाया कि यह विवादित संधि पिछली यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान हुई थी, जिसके गंभीर दुष्परिणाम आज बिहार को भुगतने पड़ रहे हैं। इस संधि के कारण बिहार के हिस्से का 73 प्रतिशत पानी पड़ोसी देश बांग्लादेश चला जाता है, जबकि वर्तमान में खुद बिहार भयंकर जल संकट और पानी की कमी से जूझ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिहार के हितों के खिलाफ इस समझौते को अब और अधिक सहन नहीं किया जा सकता है।