पंकज श्रीवास्तव, छपरा। फरक्का जल संधि पर कल मंगलवार को सारण के भिखारी ठाकुर प्रेक्षा गृह में जनता दल यूनाइटेड के द्वारा नीतीश संवाद का कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य मुद्दा फरक्का जल संधि को आगे बढ़ाया जाए या नहीं? क्योंकि जदयू का मानना है कि इस जल संधि के अनुसार बिहार को नुकसान हो रहा है और यह जल संधि तीस वर्ष के लिए की गई थी, जो दिसंबर में खत्म होने वाला है। इसलिए बिहार की भलाई के लिए इस संधि को बढ़ाया जाए या नहीं? इस पर विचार करना होगा। बिहार का 70 प्रतिशत पानी दुसरे प्रदेश में चला जाता है।
आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए बिहार प्रदेश राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने कहा कि, 1996 में भारत और बांग्लादेश के बीच हुए संधि भारत के लिए खासकर बिहार के हित में नहीं है। इसलिए इसका नवीनीकरण नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि, अगर कोई संधि होती है, तो बिहार को वर्ष 2050 तक जल आवश्यकताओं को ध्यान में रख कर किया जाना चाहिए। इस जल संधि के कारण बिहार का जल प्रबंधन बुरी तरह बिगड़ा है और हम गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं। बिहार के हित में इस वक्त यह विचार जरूरी है।
संजय कुमार झा ने आगे कहा कि फरक्का (गंगा) जल संधि के मुताबिक शुष्क मौसम (1 जनवरी से 31 मई) में जब बक्सर के पास गंगा का प्रवाह महज 400 क्यूमेक (लगभग 14 हजार क्यूसेक) तक रह जाता है, तब भी फरक्का से बांग्लादेश के लिए 1500 क्यूमेक (लगभग 53 हजार क्यूसेक) पानी छोड़না पड़ता है, इसका मतलब यह है कि सिर्फ गंगा ही नहीं, बल्कि बिहार की आंतरिक नदियों से भी पानी खींचकर बांग्लादेश को दिया जा रहा है। यह सीधे तौर पर बिहार की हकमारी है।
संजय झा ने कहा कि, बिहार और केंद्र की तत्कालीन सरकार में बैठे लोगों ने बिहार के हितों की बलि चढ़ा दी। उन लोगों ने यह नहीं सोचा कि ऐसा करके वे बिहार के किसानों की सिंचाई, लोगों का पेयजल, उद्योगों की पानी की जरूरत, लाखों लोगों की आजीविका और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा रहे हैं।
इस कार्यक्रम के तहत पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा एवं प्रदेश अध्यक्ष उमेश शुक्ला कुशवाहा का गंगा किनारे बसे बिहार के 12 जिले बक्सर भोजपुर ,सारण ,पटना ,वैशाली, समस्तीपुर ,बेगूसराय लखीसराय, मुंगेर ,खगड़िया ,भागलपुर और कटिहार में संवाद कार्यक्रम निर्धारित किया गया है, जो इस संधि के सबसे बड़े अधिक प्रभावित क्षेत्र हैं। इस दौरान जदयू के कई बड़े नेता और मंत्री व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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