फ्रांस इन दिनों जलने के साथ ही उबल रहा है. गली-गली में बगावत हो रही है. सरकार और स्टूडेंट आमने-सामने हैं. स्थिति को कंट्रोल करने के लिए फ्रांस की सरकार पूरी सख्ती कर रही है, मगर हिंसा थमने का नाम ही नहीं ले रहा है. फ्रांस के स्टूडेंट प्रोटेस्ट पर सरकार की सख्ती पर ईरान तक ने कहा है कि ऐसी सख्ती नहीं करनी चाहिए. भारत के स्टूडेंट प्रोटेस्ट को दुनिया भर में सुर्खियां मिलीं और आज भी मिल रही हैं.
आंदोलन अब इतना बड़ा हो गया है कि सोमवार से अब तक 5,000 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. शुक्रवार को ही करीब 1,747 लोग गिरफ्तार किए गए.
फ्रांस में इन दिनों हाईस्कूल के हजारों छात्र सड़कों पर हैं. स्कूलों के गेट बंद किए जा रहे हैं, कूड़ेदानों में आग लगाई जा रही है. इस आंदोलन की सबसे बड़ी वजह कई साल से चली आ रही स्कूल व्यवस्था से जुड़ी शिकायतें हैं. जिस पर कोई भी सुनवाई नहीं हो सकी है.
सबसे बड़ी समस्या शिक्षकों की कमी है. कई स्कूलों में शिक्षक नहीं हैं या उनके लंबे समय तक अनुपस्थित रहने पर उनकी जगह दूसरे शिक्षक नहीं मिलते. इसका सीधा असर छात्रों की पढ़ाई पर पड़ रहा है.
इसके बाद भी बड़ी समस्या भीड़भरी कक्षाएं और खराब इमारतें हैं. कहीं पानी की समस्या है तो कहीं गर्मी और जर्जर इमारतों की शिकायत है. छात्रों का कहना है कि स्कूलों में पढ़ाई के घंटे बहुत लंबे हैं। कक्षाओं में पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं. कई कमरों में बहुत गर्मी रहती है. शिक्षकों और दूसरे कर्मचारियों की कमी से भी पढ़ाई प्रभावित होती है.
आंदोलन अब देशभर में फैल चुका है और 6 अक्टूबर को बड़ा प्रदर्शन होगा. शुक्रवार को करीब 735 शिक्षण संस्थान प्रभावित हुए. इससे पहले गुरुवार को यह संख्या 1,000 से ज्यादा हाईस्कूल तक पहुंच गई थी.
स्थिति को कंट्रोल करने के लिए फ्रांस की सरकार पूरी सख्ती कर रही है, मगर हिंसा बढ़ती जा रही है. स्कूल तक जलाए जा रहे हैं. ये करीब एक सप्ताह से चल रहा है. यह आंदोलन पिछले सप्ताह पेरिस से शुरू हुआ था. अब यह देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया है.
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