France Violence: फ्रांस पिछले तीन दिन से हिंसा की आग में लग रहा है। फ्रांस में विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा, आगजनी और लूटपाट के बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों (Emmanuel Macron) ने फ्रांस में कर्फ्यू लागू कर दिया है। हिंसा के बीच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने हाईलेवल मीटिंग की। मीटिंग में मैक्रों ने फ्रांस में कर्फ्यू लागू करने का ऐलान किया। साथ ही गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज (Laurent Nuñez) का इस्तीफा ठुकरा दिया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक पर जवाब मांगा है। वहीं तोड़फोड़ करने वालों को इसकी कीमत चुकाने की चेतावनी दी।
बता दें कि महंगाई और सरकारी सुविधाओं में कमी के खिलाफ 17 अक्टूबर को फ्रांस में प्रदर्शन शुरू हुआ था। हालांकि यह प्रदर्शन हिंसा में बदल गई। शनिवार को 8 लाख से ज्यादा लोग सड़कों पर उतरे थे। शुरुआत में हालात शांतिपूर्ण थे लेकिन बाद में काले कपड़े पहने और चेहरे ढके कुछ लोगों ने तोड़फोड़ और लूटपाट शुरू कर दी।
राजधानी पेरिस के अलावा मार्सेई और लियोन जैसे शहरों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं हुईं। शनिवार को एक टाउन हॉल में आग लगा दी गई. दुकानों को लूटा गया। जबकि कई इमारतों की दीवारों पर तोड़फोड़ के निशान दिखे। रविवार को भी पेरिस और मार्सेई में पुलिस को प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए उतरना पड़ा। गृह मंत्रालय के मुताबिक फ्रांस हिंसा में करीब 1,500 दुकानों और कारोबारों में लूटपाट की गई या उन्हें नुकसान पहुंचाया गया। हालात संभालने के लिए पुलिस ने आंसू गैस छोड़ी और भीड़ पर पानी की बौछारें कीं। शनिवार को करीब 1000 पुलिसकर्मी घायल हुए। इनमें सात की हालत गंभीर थी। गृह मंत्री नुनेज पर आरोप लग रहे हैं कि वे पहले से तय प्रदर्शनों के लिए पर्याप्त तैयारी नहीं कर पाए।
60 हजार सुरक्षाकर्मी भी नहीं संभाल पाए हालात
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज ने बताया कि शनिवार को फ्रांस में 60 हजार पुलिसकर्मियों और अन्य सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया था। इसके बावजूद कुछ शहरों में हिंसक भीड़ को काबू करना मुश्किल हो गया। प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने दंगे और लूटपाट पर काबू पाने के लिए सीमित इलाकों में कर्फ्यू लगाने की अपील की है। हिंसा के बाद नुनेज ने इस्तीफे की पेशकश की, लेकिन राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इसे ठुकरा दिया। उन्होंने गृह मंत्री को हालात सुधारने की जिम्मेदारी सौंपी है।
मैक्रों को देश का सबसे कमजोर राष्ट्रपति माना जा रहा
इधर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों अपने राजनीतिक करियर के सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहे हैं। उनके विरोधी उन्हें अब तक का सबसे कमजोर राष्ट्रपति करार दे रहे हैं। हाल ही में हुए एक सर्वे में सिर्फ 15% लोगों ने उनके प्रति सकारात्मक राय जताई, जबकि 82% लोगों ने उनके कामकाज पर नाराजगी जताई। महंगाई, कमजोर अर्थव्यवस्था, बढ़ता सरकारी कर्ज और शिक्षा व दूसरी सरकारी सेवाओं को लेकर लोगों का गुस्सा बढ़ रहा है।
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