न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने पाकिस्तान को एक बार फिर लताड़ लगाते हुए आतंकवाद का पालक बताया. पीएम शहबाज शरीफ का नाम लिए बिना एस. जयशंकर ने कहा कि कल, आतंकवाद को लगातार बढ़ावा देने वाले एक देश ने UNGA के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया. उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के प्रति हमारी ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति में कोई ढील नहीं होगी. इसके अलावा उन्होंने AI, मिडिल ईस्ट संघर्ष से रूस-यूक्रेन जंग तक का जिक्र किया.

विदेश मंत्री ने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अपना बचाव करने के अधिकार का हम इस्तेमाल करते रहेंगे. उन्होंने कहा कि संघर्ष और टकराव आज भी दुनिया की सबसे बड़ी चिंता हैं.

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए वैश्विक शांति और सुरक्षा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया. न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए भारत के विदेश मंत्री जयशंकर ने आतंकवाद को लेकर पूरी दुनिया के सामने पाकिस्तान को बेकनाब कर दिया. उन्होंने आतंकवाद से लेकर AI और मिडिल ईस्ट संघर्ष से रूस-यूक्रेन जंग तक की बात की. जयशंकर ने आतंकवाद पर कड़ा संदेश दिया. 

इस दौरान उन्होंने आतंकवाद के प्रति भारत के ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति को दोहराया और पाकिस्तान पर भी निशाना साधा. जयशंकर ने यूएन के मंच से कहा कि कल, आतंकवाद के एक सीरियल प्रैक्टिशनर ने इस मंच पर गलत तथ्य पेश किए. वहां पर बातें ऐसे पेश की गईं, जैसे आतंकवाद कोई साधारण बात है.

संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत ने मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष से लेकर रूस-यूक्रेन जंग तक पर गहरी चिंता जताई. विदेश मंत्री जयशंकर ने लाल सागर से काला सागर तक कमर्शियल जहाजों और नाविकों पर हमलों का मुद्दा उठाया. भारत ने यूक्रेन संघर्ष के पांचवें वर्ष में पहुंचने पर चिंता जताई. UNGC में पीएम मोदी के बयान का उल्लेख करते हुए जयशंकर ने कहा कि अंतहीन युद्ध को अब युद्ध के अंत का रास्ता देना चाहिए.

साथ ही उन्होंने दुनिया में चल रहे युद्धों पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मानना है कि अब युद्ध की समाप्ति होनी चाहिए. एस जयशंकर ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों के बीच संयम बरतने, तनाव कम करने और आम नागरिकों की बेहतर सुरक्षा की अपील की.

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संयुक्त राष्ट्र की स्थापना दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखने के उद्देश्य से हुई थी. इसके बावजूद आज भी संघर्ष और टकराव दुनिया की सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है. उन्होंने शांति की अपील करते हुए कहा कि शांति बनाए रखने में नाकामी से न सिर्फ सुरक्षा कमजोर होती है, बल्कि विकास और प्रगति की रफ्तार पर भी असर पड़ता है.

विदेश मंत्री ने आगे कहा कि आतंकवाद के खिलाफ अपना बचाव करने के अधिकार का हम इस्तेमाल करते रहेंगे. उन्होंने स्पष्ट किया कि आतंकवाद के प्रति हमारी ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति में कोई ढील नहीं होगी.

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