पंकज श्रीवास्तव, छपरा। सारण जिले के मकेर प्रखंड अंतर्गत बाघाकोल पंचायत के हैजलपुर और बाघाकोल में गंडक नदी का मुख्य तटबंध गत बुधवार को सुबह 7 से 8 बजे के बीच टूट गया था। इस भीषण दुर्घटना के कारण मकेर, परसा, दरियापुर और अमनौर प्रखंड के दर्जनों गांवों में भारी तबाही मची है। हजारों एकड़ में लगी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं और सैकड़ों परिवार बेघर होकर खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
अधिकारियों का विरोध और ग्रामीणों का गुस्सा
घटना के पूरे 7 दिन बाद गंडक विभाग के अध्यक्ष नवल किशोर सिंह के नेतृत्व में चीफ इंजीनियर, एसई और अन्य कई बड़े पदाधिकारी तथा संवेदक मरम्मत कार्य का जायजा लेने और काम शुरू करवाने पहुंचे थे। हालांकि, मौके पर पहुंचते ही उन्हें उग्र ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। अरुण सिंह, सुनील सिंह, गोलू सिंह, सुमन सिंह, दिनेश राय, सीटू सिंह, आकाश कुमार, सुनोद साह, लगन साह और अभिनेष सिंह सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने बालू के पैकेट से बांध की मरम्मत करने से साफ इंकार कर दिया।
मिलीभगत और लापरवाही के गंभीर आरोप
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि विभाग के अधिकारियों, संवेदकों और कुछ जनप्रतिनिधियों की आपसी मिलीभगत के कारण ही बांध निर्माण और मरम्मत के समय मिट्टी की जगह बालू भर दिया गया था। इसी घोर लापरवाही और घटिया निर्माण के चलते बांध कमजोर होकर टूट गया। आक्रोशित ग्रामीणों ने जमकर नारेबाजी की और सभी अधिकारियों को वहां से खदेड़ दिया। जानकारी के अनुसार, अध्यक्ष के पहुंचने से पहले ही ग्रामीण सहायक इंजीनियर (AE) और अन्य अधिकारियों को गांव से वापस लौटा चुके थे।
बांस से अस्थायी घेराबंदी और भविष्य की मांग
बाद में पूर्व मुखिया धर्मेंद्र सिंह उर्फ खेदु सिंह की पहल पर स्थिति थोड़ी शांत हुई। ग्रामीणों ने केवल बांस से घेरा लगाकर अस्थायी रूप से पानी के बहाव को रोकने की सहमति दी, लेकिन बालू से मरम्मत के काम पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया। ग्रामीणों की दो टूक मांग है कि बांध की मरम्मत केवल उच्च गुणवत्ता वाली मिट्टी से और पूरी मजबूती के साथ की जाए, वरना भविष्य में एक बार फिर बड़ा हादसा हो सकता है।

