गयाजी। मानपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में दरोगा के बेटे की हत्या में शामिल दो मुख्य आरोपियों को पुलिस ने एनकाउंटर के दौरान ढेर करने की बजाय पैर में गोली मारकर गिरफ्तार कर लिया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है।

​एनकाउंटर में घायल हुए आरोपी, अस्पताल में भर्ती

​पुलिस के साथ हुई इस मुठभेड़ में घायल हुए दोनों आरोपियों की पहचान श्याम बिहारी और गौरव उर्फ कला के रूप में हुई है। पुलिस की जवाबी कार्रवाई और घेराबंदी के दौरान दोनों को पैर में गोलियां लगीं, जिसके बाद उन्हें तुरंत हिरासत में ले लिया गया। सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों के बीच दोनों आरोपियों को इलाज के लिए मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
​इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक दिलचस्प और चौंकाने वाला पहलू यह भी सामने आया है कि एनकाउंटर में घायल आरोपी श्याम बिहारी के पिता नरेन्द्र सिंह एक रिटायर्ड दरोगा हैं, जिन्हें पुलिस पहले ही इस साजिश के सिलसिले में गिरफ्तार कर चुकी है।

​क्या है पूरा मामला

​यह घटना 19 अक्टूबर की रात गयाजी जिले के मानपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नौरंगा आहार के पास सिद्धार्थपुरी कॉलोनी में घटी थी। अपराधियों ने मोतिहारी में तैनात दरोगा सुधांशु शेखर उर्फ पिंटू सिंह के हंसते-खेलते परिवार को निशाना बनाया था।
​शुरुआती पुलिस जांच में यह खुलासा हुआ है कि किसी पुराने विवाद या जुए से जुड़े मामले के चलते एक सोची-समझी साजिश रची गई थी। अपराधियों ने सुनियोजित तरीके से दोनों भाइयों को फोन करके एक सुनसान जगह पर बुलाया और पहले से घात लगाकर बैठे बदमाशों ने उन पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं।
​इस अंधाधुंध फायरिंग में दरोगा के छोटे बेटे रानू सिंह (30 वर्ष) की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, जबकि उनका बड़ा बेटा मोनू सिंह (32 वर्ष) गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल मोनू सिंह की नाजुक हालत को देखते हुए फिलहाल पटना के एक बड़े अस्पताल में उनका इलाज जारी है।

​परिचित के फोन पर घर से निकले थे दोनों भाई

​घटना के संबंध में पीड़ित परिवार ने रोते हुए बताया कि सोमवार की रात करीब 11 बजे किसी परिचित या दोस्त का फोन आया था। फोन पर बताया गया कि वहां किसी बात को लेकर झगड़ा हो रहा है। इसके बाद रानू और मोनू उस मामले को शांत कराने और बीच-बचाव करने के लिए सिद्धार्थपुरी स्थित घटनास्थल पर पहुंचे थे।
​परिवार का यह भी कहना है कि दोनों भाई बेहद मिलनसार और अच्छे स्वभाव के थे, जिनका किसी से कोई व्यक्तिगत झगड़ा या दुश्मनी नहीं थी। वे तो केवल विवाद सुलझाने गए थे, लेकिन अपराधियों ने धोखे से उन पर गोलियां चला दीं।

​पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी और गिरफ्तारियां

​घटना के बाद से ही गयाजी पुलिस और एसटीएफ की टीमें अपराधियों की धरपकड़ के लिए लगातार ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही थीं। पुलिस के बढ़ते दबाव और लगातार दबिश के कारण अपराधियों के हौसले पस्त हो गए। इस मामले में पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए मुख्य साजिशकर्ता और रिटायर्ड दरोगा नरेंद्र सिंह समेत दो लोगों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था, और अब मुठभेड़ के बाद दो अन्य आरोपियों को भी धर दबोचा गया है।