Technology Desk: अब VR का मतलब भारी-भरकम हेडसेट पहनकर दुनिया से कट जाना नहीं होगा। Meta ने अपनी नई VR Glasses टेक्नोलॉजी पेश कर दी है, जिसे कंपनी ने रोजमर्रा के इस्तेमाल को ध्यान में रखकर डिजाइन किया है। सबसे खास बात इसका वजन है करीब 100 ग्राम। यानी पुराने VR हेडसेट की तुलना में यह काफी हल्का है और इसे लंबे समय तक पहनने के अनुभव को बेहतर बनाने की कोशिश की गई है।
Meta के CEO Mark Zuckerberg के मुताबिक, इसका वजन Meta Quest 3 के पांचवें हिस्से से भी कम है। लेकिन सवाल है कि इतने छोटे और हल्के ग्लासेज में इतनी तकनीक आई कैसे?
चेहरे पर ग्लासेज, जेब में कंप्यूटर
Meta ने इसके लिए एक दिलचस्प तरीका अपनाया है। ग्लासेज के फ्रेम में प्रोसेसर, बैटरी और स्टोरेज जैसे कंपोनेंट ठूंसने के बजाय कंपनी ने कंप्यूटिंग हार्डवेयर को एक अलग छोटे रेक्टेंगुलर बॉक्स में रखा है। यूजर इस बॉक्स को अपनी जेब या बैग में क्लिप कर सकता है। ग्लासेज और इस कंप्यूटिंग बॉक्स के बीच एक ऑप्टिकल टेथर कनेक्शन होगा। यानी चेहरे पर सिर्फ डिस्प्ले और ऑप्टिकल सिस्टम, जबकि असली कंप्यूटिंग पावर जेब में!
आंखों के सामने 5K की वर्चुअल दुनिया
Meta के नए ग्लासेज में 5K Infinite Display दिया गया है, जो माइक्रो-OLED पैनल पर आधारित है। इसमें 37 पिक्सल प्रति डिग्री का सपोर्ट बताया गया है, जिससे छोटे टेक्स्ट और बारीक डिटेल्स को ज्यादा स्पष्ट देखने का दावा किया गया है। पैनकेक लेंस के साथ Dolby Vision और Dolby Atmos स्पेशियल ऑडियो का सपोर्ट भी मिलेगा।
इसका मतलब यह डिवाइस सिर्फ VR गेम खेलने तक सीमित नहीं रहेगा। बड़ी वर्चुअल स्क्रीन पर फिल्म देखना हो या हाई-क्वालिटी स्पेशियल ऑडियो के साथ सिनेमाई अनुभव लेना हो, Meta इसे एक तरह के पोर्टेबल थिएटर के रूप में भी पेश कर रही है।

VR में दुनिया से कटेंगे नहीं
पारंपरिक VR हेडसेट की एक बड़ी समस्या यह है कि उन्हें पहनने के बाद आसपास की दुनिया से संपर्क काफी कम हो जाता है। Meta के नए डिजाइन में इस पहलू पर भी बदलाव किया गया है।
ग्लासेज के साइड खुले रखे गए हैं और पासथ्रू कैमरों की मदद से आसपास के वातावरण को देखने की सुविधा दी गई है। कल्पना कीजिए आप विमान में बैठे हैं और आपके सामने एक साथ कई वर्चुअल स्क्रीन खुली हैं। एक स्क्रीन पर काम, दूसरी पर फिल्म और तीसरी पर कोई गेम। जरूरत पड़ने पर आप आसपास की वास्तविक दुनिया पर भी नजर रख सकते हैं।
कंट्रोलर की जरूरत कम, आंखें और हाथ करेंगे काम
Meta ने अपने Meta AI एजेंट को डिवाइस के ऑपरेटिंग सिस्टम में इंटीग्रेट किया है। यूजर आवाज, आंखों की मूवमेंट और हाथों के नेचुरल जेस्चर से ग्लासेज को कंट्रोल कर सकेगा।
ऐप खोलना, फिल्म चलाना, वर्कस्पेस बदलना या इंटरनेट पर जानकारी खोजना, इनमें से कई काम बिना फिजिकल कंट्रोलर के किए जा सकेंगे। डिवाइस में Qualcomm का Snapdragon Reality Elite प्रोसेसर दिया गया है। कंपनी के मुताबिक, बाहरी कंप्यूटिंग बॉक्स की बैटरी हाई-रेजोल्यूशन मीडिया प्लेबैक के दौरान करीब तीन घंटे तक चल सकती है और इसमें 45W फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट होगा।
फिल्मों का अनुभव भी होगा खास
Meta ने इस डिवाइस को मनोरंजन के लिए भी काफी आक्रामक तरीके से तैयार किया है।
कंपनी के मुताबिक, यह पहला IMAX Enhanced-certified VR डिवाइस होगा। चुनिंदा फिल्मों को IMAX के एक्सपैंडेड आस्पेक्ट रेशियो में देखा जा सकेगा। इसके अलावा Disney के साथ साझेदारी के तहत समर्थित बाजारों में Disney+ के चुनिंदा 3D कंटेंट का एक्सेस मिलेगा। Star Wars, Marvel और Monsters, Inc. जैसी फ्रेंचाइजी से जुड़े इमर्सिव वर्चुअल एनवायरमेंट भी उपलब्ध होंगे।
Meta का नया VR Enhanced Cinema फॉर्मेट फिल्म देखने के अनुभव को और आगे ले जाने की कोशिश करेगा। इसमें फिल्म सिर्फ स्क्रीन पर नहीं चलेगी, बल्कि उसके आसपास का वर्चुअल वातावरण भी कहानी के अनुभव का हिस्सा बन सकता है।
Avengers: Infinity War और Star Wars: A New Hope जैसी फिल्मों के लिए भी इस फॉर्मेट में वर्जन तैयार किए जाने की बात कही गई है।
मैच देखना है? सीट भी आपकी पसंद की!
Meta VR Glasses में स्पोर्ट्स को लेकर भी बड़ी योजनाएं हैं। कंपनी के मुताबिक, लॉन्च के बाद हर साल 100 से ज्यादा इमर्सिव लाइव स्पोर्ट्स इवेंट्स उपलब्ध कराने की योजना है।
इसका मकसद टीवी स्क्रीन के सामने बैठकर मैच देखने के बजाय ऐसा अनुभव देना है, जिसमें दर्शक खुद को वर्चुअल कोर्टसाइड या स्टेडियम पोजिशन में महसूस कर सके। Amazon Prime Video, YouTube, DIRECTV, AMC+, Crunchyroll, Plex और Tubi जैसी सेवाएं भी इसके एंटरटेनमेंट इकोसिस्टम का हिस्सा होंगी। वहीं Peacock, HBO Max और Paramount+ अपने 3D कैटलॉग को प्लेटफॉर्म पर लाने की तैयारी कर रहे हैं।
ऑफिस भी साथ लेकर चलिए
Meta का सपना सिर्फ वर्चुअल सिनेमा तक सीमित नहीं है। कंपनी इन ग्लासेज को एक पोर्टेबल वर्कस्पेस के तौर पर भी देख रही है। यूजर एक बड़ी वर्चुअल स्क्रीन या कई स्क्रीन बना सकता है। ग्लासेज को Mac या Windows PC से वायरलेस तरीके से या USB-C के जरिए कनेक्ट किया जा सकेगा।
यहां तक कि टेबल या डेस्क को वर्चुअल कीबोर्ड और टचपैड की तरह इस्तेमाल करने की सुविधा भी दी गई है। यानी आने वाले समय में शायद लैपटॉप स्क्रीन छोटी लगने लगे, क्योंकि आपकी असली स्क्रीन के बजाय पूरी वर्चुअल डेस्क आपके सामने तैर रही होगी।
गेमिंग में 75 से ज्यादा गेम्स का सपोर्ट
गेमर्स के लिए भी Meta ने खास तैयारी की है। लॉन्च के समय 75 से ज्यादा गेम्स में हैंड जेस्चर कंट्रोल का सपोर्ट मिलेगा। इसके साथ Meta Quest के बड़े गेम कैटलॉग का एक्सेस और Touch Plus कंट्रोलर्स का सपोर्ट भी जारी रहेगा। Xbox Cloud Gaming के जरिए Bluetooth कंट्रोलर से गेम्स स्ट्रीम करने की सुविधा भी मिलेगी।
वीडियो कॉल में सामने आएगा आपका डिजिटल हमशक्ल
Meta का सबसे दिलचस्प फीचर शायद इसका होलोग्राम सिस्टम है।
कंपनी के मुताबिक, यह यूजर का फोटो-रियलिस्टिक डिजिटल रिप्रेजेंटेशन तैयार कर सकता है, जिसमें चेहरे के एक्सप्रेशन और रिएक्शन भी शामिल होंगे।
वीडियो कॉल के दौरान दूसरे VR Glasses यूजर को आपका डिजिटल अवतार वर्चुअल स्पेस में दिखाई दे सकता है। वहीं सामान्य फोन या कंप्यूटर से जुड़े व्यक्ति को स्क्रीन पर यही डिजिटल रिप्रेजेंटेशन नजर आएगा। WhatsApp और Zoom समेत कई कॉलिंग सेवाओं पर इस टेक्नोलॉजी के काम करने की बात कही गई है। स्पेशियल ऑडियो के जरिए आवाज भी वर्चुअल स्पेस में सही दिशा से आती हुई महसूस हो सकती है।
2027 में अमेरिका से होगी शुरुआत
Meta VR Glasses की अमेरिका में बिक्री Spring 2027 से शुरू होने की योजना है। इसकी कीमत $1,299.99 रखी गई है, जो भारतीय मुद्रा में करीब 1.25 लाख रुपये बैठती है। भारत समेत दूसरे बाजारों में इसकी उपलब्धता को लेकर फिलहाल कोई जानकारी नहीं दी गई है।
कुल मिलाकर Meta का नया प्रयोग VR को सिर्फ गेमिंग या मनोरंजन की तकनीक के रूप में देखने के बजाय उसे काम, सिनेमा, गेमिंग, कम्युनिकेशन और रोजमर्रा की कंप्यूटिंग का हिस्सा बनाने की कोशिश है।
सबसे बड़ा बदलाव यही है अब कंप्यूटर आपके सामने स्क्रीन पर नहीं, बल्कि आपकी आंखों के सामने पूरी वर्चुअल दुनिया के रूप में मौजूद हो सकता है।


