अनुज पांडेय, गोपालगंज। जिले के शिक्षा विभाग में एक बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया है, जहां बिना किसी वैध नियुक्ति और योगदान के एक शिक्षिका के बैंक खाते में 17,49,507 रुपये की भारी-भरकम राशि वेतन एरियर के रूप में ट्रांसफर कर दी गई। इस सनसनीखेज मामले के उजागर होने के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और विभाग ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है।

​फर्जी नियुक्ति का पूरा मामला

​मांझा प्रखंड के नवसृजित प्राथमिक विद्यालय, रूपनछाप कर्णपुरा में पदस्थापित बताई जा रही शिक्षिका खुशबू कुमारी की नियुक्ति और योगदान को लेकर गहरा विवाद खड़ा हो गया है। विभागीय रिकॉर्ड के अनुसार, उनका यू-डायस कोड और शिक्षक आईडी दर्ज है। उनकी नियुक्ति कर्णपुरा पंचायत नियोजन प्राधिकार द्वारा 4 फरवरी 2016 के आदेश के आधार पर होने का दावा किया गया था। हालांकि, पंचायत के तत्कालीन मुखिया अवधेश कुमार ने ऐसी किसी भी नियुक्ति से स्पष्ट इनकार किया है, जिससे नियुक्ति पत्र और दस्तावेज पूरी तरह संदिग्ध हो गए हैं।

​बिना योगदान के कैसे ट्रांसफर हुई बड़ी रकम?

​सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शिक्षिका का वास्तविक योगदान स्वीकृत ही नहीं हुआ था, तब उनके खाते में 26 मई को 17 लाख 49 हजार 507 रुपये कैसे भेज दिए गए। शिक्षा विभाग की स्थापना शाखा ने इस गंभीर वित्तीय अनियमितता पर संज्ञान लेते हुए 13 अक्टूबर को स्कूल के तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक मनोज कुमार चौधरी को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा है। विभाग ने पूछा है कि बिना योगदान स्वीकृत किए ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर एंट्री की अनुमति क्यों दी गई।

​शिक्षिका सुनवाई से नदारद, होगी प्राथमिकी

​पटना हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में डीपीओ स्थापना विनय कुमार सुमन ने 21 सितंबर से मामले की सुनवाई शुरू की थी। शिक्षिका को 7 अक्टूबर तक मूल दस्तावेज के साथ उपस्थित होने का निर्देश दिया गया था, लेकिन वह सुनवाई से नदारद रहीं। जिला शिक्षा पदाधिकारी अमरेंद्र कुमार पांडेय ने स्पष्ट किया है कि उच्चस्तरीय जांच पूरी होने और दोषियों की पहचान होते ही सभी संलिप्त लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।