अनुज पांडेय, गोपालगंज। जिले के बैकुंठपुर प्रखंड अंतर्गत शीतलपुर में रिंग तटबंध के अचानक धराशायी होने की घटना को जल संसाधन विभाग ने बेहद गंभीरता से लिया है। प्रशासनिक चूक और घोर लापरवाही के खिलाफ कड़ा संदेश देते हुए विभाग ने ताबड़तोड़ कार्रवाई की है और तीन मुख्य जिम्मेदार इंजीनियरों को तत्काल प्रभाव से उनके पदों से चलता कर दिया है।

गंडक के पानी ने गांवों को किया जलमग्न

​यह भीषण आपदा 30 सितंबर की सुबह करीब 6:30 बजे आई, जब शीतलपुर स्थित रिंग तटबंध अचानक से टूट गया। इसके बाद उफनती गंडक नदी का सैलाब तेज रफ्तार के साथ निचले रिहाइशी इलाकों और रिहाइशी गांवों में घुस गया। देखते ही देखते पूरा क्षेत्र पानी में डूब गया, जिससे स्थानीय ग्रामीणों के बीच भारी भगदड़ और हाहाकार मच गया। इस बड़े हादसे के बाद तटबंध की निगरानी, सुरक्षा और रखरखाव में बरती गई भारी चूक को लेकर शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

कार्यपालक अभियंता समेत तीन अधिकारी नपे

​हादसे की गूंज पटना तक पहुंचने के बाद जल संसाधन विभाग ने बिना देर किए तुरंत और सख्त एक्शन लिया है। विभाग ने कार्यपालक अभियंता मोहम्मद साजिद इकबाल, सहायक अभियंता जावेद और कनीय अभियंता विकास कुमार को उनके पदों से हटा दिया है।

  • ​मुख्यालय अटैचमेंट: शीर्ष अधिकारियों यानी कार्यपालक अभियंता और सहायक अभियंता को सीधे विभाग के मुख्यालय से अटैच किया गया है।
  • ​स्थानांतरण का चाबुक: कनीय अभियंता विकास कुमार को भोरे सिंचाई विभाग में भेजते हुए वहां प्रतिनियुक्त किया गया है।
  • ​विभागीय शिकंजा: पदों से हटाने के साथ ही इन तीनों अभियंताओं के खिलाफ औपचारिक विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

​हाई लेवल कमेटी करेगी पर्दाफाश

​मामले की तह तक जाने और सच्चाई सामने लाने के लिए जल संसाधन विभाग ने एक उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी है। यह जांच टीम मुख्य रूप से इन बिंदुओं को खंगालेगी:

  • ​तटबंध के टूटने के असली कारणों और उस वक्त जलस्तर की असल स्थिति क्या थी।
  • ​तटबंध की तकनीकी स्थिति और इससे पहले भेजी गई रिपोर्टों में कितनी सच्चाई थी।
  • ​ड्यूटी पर तैनात अभियंताओं द्वारा निगरानी और सुरक्षा में किस स्तर की लापरवाही बरती गई।

​विभाग ने साफ कर दिया है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद यदि कर्तव्यहीनता या घोर लापरवाही की पुष्टि होती है, तो दोषियों के खिलाफ और भी बड़े व कड़े दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल प्रभावित इलाकों में पानी के फैलाव को रोकने और युद्ध स्तर पर तटबंध की मरम्मत का कार्य दिन-रात जारी है।