दिल्ली में सरकारी इमारतों के निर्माण और इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी परियोजनाओं को लेकर सरकार कामकाज का तरीका बदलने की तैयारी कर रही है। अब सरकारी निर्माण परियोजनाओं में केवल नक्शा तैयार कराने या अलग-अलग चरणों में तकनीकी सलाहकार नियुक्त करने की व्यवस्था के बजाय शुरुआत में ही विशेषज्ञ आर्किटेक्ट और इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स की नियुक्ति की जाएगी। नई व्यवस्था के तहत इन विशेषज्ञों की जिम्मेदारी परियोजना की शुरुआती योजना तैयार करने से लेकर निर्माण कार्य पूरा कराने और तैयार इमारत या परियोजना को संबंधित विभाग को सौंपने (हैंडओवर) तक होगी।

योजना से लेकर निर्माण तक एक ही टीम संभालेगी जिम्मेदारी

सरकार की इस पहल का उद्देश्य निर्माण परियोजनाओं के अलग-अलग चरणों में समन्वय की समस्या को कम करना और काम की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। इसके तहत आर्किटेक्ट और इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स परियोजना की डिजाइनिंग, तकनीकी योजना, निर्माण संबंधी निगरानी और अंतिम हैंडओवर तक जुड़े रहेंगे।

DSIIDC ने जारी किया एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट

दिल्ली स्टेट इंडस्ट्रियल एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DSIIDC) ने आर्किटेक्ट और इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स को अपने पैनल में शामिल करने के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (EOI) जारी किया है। इसके तहत चयनित विशेषज्ञों की सेवाएं DSIIDC की परियोजनाओं के साथ-साथ दिल्ली सरकार के अन्य विभागों की ओर से सौंपे जाने वाले निर्माण और विकास कार्यों में भी ली जा सकेंगी। इस पहल के जरिए सरकार विभिन्न विभागों की निर्माण परियोजनाओं के लिए विशेषज्ञों का एक पैनल तैयार करना चाहती है, ताकि जरूरत के मुताबिक अनुभवी आर्किटेक्ट और इंजीनियरिंग कंसल्टेंट्स की सेवाएं ली जा सकें।

परियोजना स्थल का अध्ययन कर तैयार होगा मास्टर प्लान

नई व्यवस्था के तहत कंसल्टेंट्स की जिम्मेदारी केवल भवन का नक्शा तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें सबसे पहले परियोजना स्थल का विस्तृत अध्ययन करना होगा। इसमें जमीन की स्थिति, उपलब्ध जगह, लोकेशन और संबंधित विभाग की आवश्यकताओं को समझना शामिल होगा। इन सभी पहलुओं का आकलन करने के बाद विशेषज्ञ परियोजना के लिए मास्टर प्लान तैयार करेंगे। इसके आधार पर आगे की डिजाइनिंग, तकनीकी योजना और निर्माण संबंधी कार्यों को आगे बढ़ाया जाएगा।

आर्किटेक्चर के साथ स्ट्रक्चरल और MEP की भी बनानी होगी योजना

नई व्यवस्था के तहत कंसल्टेंट्स की जिम्मेदारी केवल आर्किटेक्चर डिजाइन तैयार करने तक सीमित नहीं रहेगी। उन्हें स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग और MEP (मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल एवं प्लंबिंग) से जुड़े सभी पहलुओं की योजना भी तैयार करनी होगी। इसके अलावा परियोजना की जरूरत के अनुसार इंटीरियर डिजाइन, फर्नीचर लेआउट और लैंडस्केपिंग की योजना बनाने की जिम्मेदारी भी इन्हीं विशेषज्ञों की होगी। यानी किसी भी सरकारी इमारत या इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट की डिजाइन से लेकर उससे जुड़ी तकनीकी और आंतरिक व्यवस्थाओं तक का काम एक ही कंसल्टेंट टीम के दायरे में आएगा।

निर्माण के दौरान साइट इंस्पेक्शन भी करना होगा

सरकार की नई व्यवस्था में कंसल्टेंट्स की भूमिका निर्माण शुरू होने के बाद खत्म नहीं होगी। उन्हें निर्माण कार्य पूरा होने तक परियोजना से जुड़े रहना होगा और समय-समय पर साइट का निरीक्षण करना होगा। इसके लिए उन्हें ठेकेदारों और प्रोजेक्ट मैनेजमेंट एजेंसी के साथ समन्वय बनाकर काम करना होगा। निर्माण में इस्तेमाल होने वाली विभिन्न वस्तुओं और सामग्रियों के बाजार भाव जानने के लिए कोटेशन जुटाने और उनकी दरों का विश्लेषण करने की जिम्मेदारी भी दी जाएगी।

NOC और अन्य मंजूरियां लेने में भी करनी होगी मदद

परियोजना पूरी होने के बाद कंसल्टेंट्स की जिम्मेदारी समाप्त नहीं होगी। उन्हें तैयार इमारत या प्रोजेक्ट के लिए फायर NOC, ऑक्युपेंसी सर्टिफिकेट (Occupancy Certificate) और अन्य जरूरी वैधानिक मंजूरियां प्राप्त करने की प्रक्रिया में भी सहायता करनी होगी। सरकार का मानना है कि पूरी परियोजना की जिम्मेदारी एक ही कंसल्टेंट एजेंसी को सौंपने से जवाबदेही तय करने में आसानी होगी। इससे अलग-अलग चरणों में होने वाली देरी और तकनीकी समन्वय की समस्याएं कम होंगी। साथ ही निर्माण कार्य की गुणवत्ता बेहतर करने और परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने में मदद मिलेगी।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m