सूरत: त्यौहारों के मौसम से ठीक पहले गुजरात के आम उपभोक्ताओं, दुकानदारों और व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। राज्य की सरकारी बिजली वितरण कंपनियों ने फ्यूल एंड पावर परचेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (FPPAS) में बढ़ोतरी कर दी है। इसके तहत बेस फ्यूल चार्ज को 2.30 रुपये प्रति यूनिट से बढ़ाकर 2.45 रुपये कर दिया गया है, यानी बेस चार्ज में सीधे 15 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि हुई है।
इसके अलावा, बिजली की खपत और फिक्स्ड चार्ज पर 3.99% का अतिरिक्त चार्ज भी लागू किया गया है। इन दोनों बदलावों के कारण ग्राहकों के कुल बिल पर प्रति यूनिट लगभग 30 से 45 पैसे का अतिरिक्त असर पड़ेगा। नई दरें सितंबर 2026 में बनने वाले बिलों से लागू होंगी, लेकिन इसकी वसूली 1 जुलाई 2026 से मानी जाएगी। इस वजह से उपभोक्ताओं को जुलाई और अगस्त महीने का एरियर (बकाया) भी आगामी बिल में चुकाना होगा।
जनता पर कितना बढ़ेगा आर्थिक बोझ?
दक्षिण गुजरात में रोजाना 9 से 10 करोड़ यूनिट बिजली की खपत होती है। इस बढ़ोतरी से दक्षिण गुजरात के लोगों पर रोजाना 1.35 से 1.50 करोड़ रुपये और महीने में करीब 40.50 से 45 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
किसे और कितना होगा नुकसान?
कृषि क्षेत्र को छोड़कर यह बढ़ोतरी सभी आवासीय मकानों, दुकानों, दफ्तरों और कारखानों पर लागू होगी।
- 100 यूनिट: ₹45 तक की बढ़ोतरी
- 300 यूनिट: ₹135 तक की बढ़ोतरी
- 500 यूनिट: ₹225 तक की बढ़ोतरी
- 1000 यूनिट: ₹450 तक की बढ़ोतरी
त्यौहारों के समय बिजली बिल में हुए इस इजाफे ने आम जनता के बजट को बिगाड़ कर रख दिया है।
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