हरियाणा के हांसी जिले के चानौत गांव में भाखड़ा नहर की शहरी पाइपलाइन से टी-कनेक्शन के जरिए पेयजल आपूर्ति की मांग को लेकर आंदोलन और तेज हो गया है। धरना समिति ने अमृत-2 योजना से जुड़े कर्नाटक के दस्तावेज सार्वजनिक कर प्रशासनिक दावों को चुनौती दी है।
हांसी। जिले के चानौत गांव में भाखड़ा नहर की शहरी पाइपलाइन से टी-कनेक्शन के जरिए शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मांग को लेकर चल रहा जन आंदोलन अब काफी उग्र और तेज होता जा रहा है। इस संबंध में गठित धरना समिति ने रविवार को एक महत्वपूर्ण प्रेसवार्ता का आयोजन कर केंद्र सरकार की अमृत-2 योजना से जुड़े कुछ बेहद चौंकाने वाले आधिकारिक दस्तावेज मीडिया के सामने प्रस्तुत किए हैं। समिति का कड़ा दावा है कि इन पुख्ता दस्तावेजों से यह पूरी तरह स्पष्ट होता है कि इस राष्ट्रीय योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को भी आसानी से पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है। इन सरकारी कागजातों में विशेष रूप से कर्नाटक के सात गांवों को अमृत-2 योजना के माध्यम से सीधे पानी उपलब्ध कराने का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। Hansi Chanaut Water Dispute को सुलझाने की दिशा में अब यह एक नया और बेहद रोचक मोड़ साबित हो सकता है।
कर्नाटक जाकर की जमीनी स्टडी
इस पूरे गंभीर मामले की कानूनी पैरवी कर रहे धरना समिति के वरिष्ठ अधिवक्ता विजय कुमार ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि उनकी एक विशेष टीम हाल ही में इस योजना की हकीकत जानने के लिए कर्नाटक गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले उन्होंने सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत इस पूरी परियोजना से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज मांगे थे, लेकिन भविष्य में हरियाणा सरकार या अदालत की ओर से किसी भी प्रकार के जवाब-तलब की संभावना को देखते हुए उन्होंने खुद मौके पर जाकर पूरे मामले का गहराई से जमीनी अध्ययन किया। इस जांच टीम ने कर्नाटक में योजना के सफल क्रियान्वयन और उसकी जटिल तकनीकी प्रक्रिया की भी विस्तृत जानकारी जुटाई है।
छह गांवों को मिला टी-कनेक्शन
अधिवक्ता विजय कुमार ने प्रेस के सामने बड़ा खुलासा करते हुए कहा कि उनकी तकनीकी टीम कर्नाटक के बीदर जिले के ओरद शहर के निकट स्थित ब्याहली गांव पहुंची थी। वहां वर्ष 2023 में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की भारी मांग पर अमृत-2 योजना की मुख्य पाइपलाइन के बीच में पड़ने वाले छह अलग-अलग गांवों को टी-कनेक्शन देकर शुद्ध पेयजल स्थाई रूप से उपलब्ध कराया गया था। उन्होंने बताया कि ओरद शहर तक करीब 42 किलोमीटर लंबी मुख्य पाइपलाइन बिछाई गई है और उसके मार्ग के बीच आने वाले सभी ग्रामीण क्षेत्रों को भी बिना किसी तकनीकी रुकावट के इस जनहित योजना का पूरा लाभ दिया गया है।
हरियाणा सरकार से पूछे सवाल
अधिवक्ता विजय कुमार के अनुसार संबंधित अधिकारियों से बातचीत के बाद उन्हें यह आवश्यक और प्रामाणिक दस्तावेज उपलब्ध कराए गए हैं। इन दस्तावेजों से अब यह कानूनी रूप से पूरी तरह साबित होता है कि अमृत-2 योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्रों को भी पेयजल उपलब्ध कराने की सुदृढ़ व्यवस्था तकनीकी रूप से संभव है। उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए पूछा कि यदि कर्नाटक में बीच रास्ते में आने वाले गांवों को टी-कनेक्शन देकर पानी दिया जा सकता है, तो फिर हरियाणा के चानौत गांव को यह बुनियादी सुविधा देने में आखिर क्या परेशानी है।

