चंडीगढ़. हरियाणा के बाल देखभाल संस्थानों में बच्चों की निजता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए CCTV सिस्टम के इस्तेमाल पर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष तृप्ति श्योराण ने यह वैधानिक एडवाइजरी जारी की है। इसके तहत CCTV सिस्टम को निजी मोबाइल फोन या लैपटॉप से जोड़ने, साझा पासवर्ड रखने और बच्चों की फुटेज WhatsApp, सोशल मीडिया या ईमेल के जरिए प्रसारित करने पर रोक लगाई गई है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट देने के निर्देश भी दिए हैं।
निजी मोबाइल और लैपटॉप से CCTV जोड़ने पर रोक
आयोग ने निरीक्षण के दौरान पाया कि कई बाल देखभाल संस्थानों में CCTV सिस्टम निजी मोबाइल फोन और लैपटॉप से जुड़े हुए हैं। इससे लाइव फुटेज को कहीं से भी देखा, डाउनलोड और प्रसारित किया जा सकता है। आयोग ने इसे बच्चों की निजता और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना है।
नई एडवाइजरी के मुताबिक, CCTV सिस्टम, उसकी फुटेज और पासवर्ड पर केवल संस्थान के प्रभारी का नियंत्रण होगा। सिस्टम तक पहुंच सिर्फ अधिकृत कर्मचारियों को दी जाएगी। साझा पासवर्ड का इस्तेमाल प्रतिबंधित रहेगा और रिमोट एक्सेस की सुविधा डिफॉल्ट रूप से बंद रखनी होगी।
CCTV फुटेज डाउनलोड या शेयर करने पर भी रोक
निर्देशों के अनुसार, कोई भी व्यक्ति CCTV मॉनिटर की तस्वीर, स्क्रीन रिकॉर्डिंग या फुटेज को डाउनलोड, कॉपी या अनधिकृत रूप से प्रसारित नहीं कर सकेगा। WhatsApp, सोशल मीडिया और ईमेल के माध्यम से फुटेज साझा करना भी प्रतिबंधित है।
CCTV के DVR और NVR उपकरणों को सुरक्षित स्थान पर रखना होगा। पासवर्ड समय-समय पर बदलने और सिस्टम के एक्सेस लॉग की नियमित जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी घटना से संबंधित फुटेज को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखना होगा।

बाथरूम और कपड़े बदलने की जगह पर कैमरे लगाने पर रोक
एडवाइजरी में बच्चों की निजता की सुरक्षा के लिए स्पष्ट किया गया है कि शौचालय, स्नानघर और कपड़े बदलने वाले स्थानों के भीतर CCTV कैमरे नहीं लगाए जा सकते।
ये निर्देश किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) मॉडल नियम, 2016 के नियम 67(12) के तहत निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप हैं। प्रत्येक बाल देखभाल संस्थान को CCTV फुटेज तक पहुंच रखने वाले अधिकृत लोगों का रिकॉर्ड रखना होगा।
फुटेज लेने वालों का रिकॉर्ड रखना जरूरी
संस्थानों को फुटेज प्राप्त करने का रजिस्टर भी रखना होगा। इसमें तारीख, फुटेज लेने का उद्देश्य और उसे प्राप्त करने वाले व्यक्ति का विवरण दर्ज किया जाएगा। CCTV सिस्टम तक किसी भी अनधिकृत पहुंच की जानकारी तत्काल सक्षम प्राधिकारी को देनी होगी।
राज्य और जिला स्तर के अधिकारियों को निरीक्षण के दौरान यह जांचना होगा कि CCTV उपकरणों का विवरण उपलब्ध है या नहीं। लाइव फीड और रिकॉर्डेड फुटेज तक पहुंच रखने वाले व्यक्तियों की पहचान और उनका प्राधिकरण भी स्पष्ट होना चाहिए। इसके अलावा पासवर्ड की सुरक्षा, रिमोट एक्सेस सेटिंग्स और रिकॉर्डिंग के सुरक्षित भंडारण की व्यवस्था की जांच की जाएगी।
15 दिन में देनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
आयोग ने महिला एवं बाल विकास विभाग, सभी उपायुक्तों और जिला बाल संरक्षण अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग को अपने अधीन संबंधित जिला अधिकारियों और बाल देखभाल संस्थानों के लिए लिखित निर्देश जारी करने को कहा गया है।
विशेष रूप से बालिकाओं वाले बाल देखभाल संस्थानों में सुरक्षा उपायों की भी जांच की जाएगी। कोई कमी मिलने पर उसे तत्काल दूर करना होगा। एडवाइजरी का पालन नहीं करने वाले संस्थानों के खिलाफ नियमानुसार प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।
आयोग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि CCTV निगरानी बच्चों की संस्थागत सुरक्षा के लिए इस्तेमाल हो। बच्चों की गतिविधियों और उनके ठिकाने से जुड़ी जानकारी किसी अनधिकृत व्यक्ति तक न पहुंचे।
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